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ब्लॉक समिति प्रधान के खिलाफ अश्विस प्रस्ताव से हाईकोर्ट ने हटाई रोक
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ब्लॉक समिति प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से हाईकोर्ट ने हटाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। करीब डेढ़ वर्ष पहले ब्लॉक समिति की प्रधान अंजू देवी और उपप्रधान सुखबीर के खिलाफ बगावत शुरू हुई थी। समित के दो-तिहाई सदस्यों ने विकास कार्यों में भेदभाव एवं ग्रांट में बंदरबांट का आरोप लगाते हुए बगावत कर दिया था। कई बार अविश्वास प्रस्ताव की तारीख तय हुई, मगर अदालत की शरण लेनेे के चलते बैठक को स्थगित कर दिया गया। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक को हटाकर दो अप्रैल को विरोधी गुट के अविश्वास प्रस्ताव पर विचार के लिए बैठक बुलाने के लिए कहा है। अब दो अप्रैल को फैसला होगा कि समिति प्रदान की कुर्सी जाएगी या रहेगी। चौधर को बचाने के लिए प्रधान ने गतिविधि तेज कर दी है। विरोधी भी ब्लॉक समिति सदस्य को लेकर भ्रमण पर निकल चुके हैं। रूठे को मनाने के लिए प्रधान ने मुहिम शुरू कर दी है। यह अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया तो प्रधान अंजू देवी व उपप्रधान सुखबीर को कुर्सी खाली करने पड़ेगी।
तीन वर्ष पहले प्रधान को 26 में से से मिले 25 वोट, उप-प्रधान को 16
करीब तीन वर्ष पहले अंजू देवी को प्रधान व सुखबीर को उपप्रधान बनाया गया था। उस समय चौधर के लिए हुए चुनाव में मंजू को 26 में से 25 और सुखबीर को 16 वोट मिले थे। भाजपा नेताओं ने इनका साथ दिया था। प्रधान बनाने के बाद 26 लाख रुपये की ग्रांट आई थी। इसके एक वर्ष बाद करीब 54 लाख रुपये की ग्रांट सरकार ने विकास कार्य करवाने के लिए दी थी। दोनों ग्रांट का वितरण सही हो गया था। इसके बाद करोड़ों रुपये की ग्रांट आई। इस ग्रांट के वितरण में ब्लॉक समिति सदस्यों ने प्रधान पर भेदभाव के आरोप लगाए। यह आरोप दो-तिहाई से ज्यादा सदस्यों ने लगाया। अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए पिछले वर्ष जनवरी में बैठक बुलाई गई। यह बैठक रद्द हो गई। इसके बाद 10 फरवरी 2018 व 24 मई को बैठक बुलाने की तारीख तय की गई। प्रधान ने इस मामले में अदालत की शरण ली। अदालत ने बैठक पर रोक लगा दी। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस रोक को हटा दिया है और दो अप्रैल को एडीसी की अध्यक्षता में बैठक बुलाने का आदेश दिया है। अब दो अप्रैल को ही फैसला होगा की अंजू की चौधर फिर से जमेगी या खिसकेगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। करीब डेढ़ वर्ष पहले ब्लॉक समिति की प्रधान अंजू देवी और उपप्रधान सुखबीर के खिलाफ बगावत शुरू हुई थी। समित के दो-तिहाई सदस्यों ने विकास कार्यों में भेदभाव एवं ग्रांट में बंदरबांट का आरोप लगाते हुए बगावत कर दिया था। कई बार अविश्वास प्रस्ताव की तारीख तय हुई, मगर अदालत की शरण लेनेे के चलते बैठक को स्थगित कर दिया गया। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक को हटाकर दो अप्रैल को विरोधी गुट के अविश्वास प्रस्ताव पर विचार के लिए बैठक बुलाने के लिए कहा है। अब दो अप्रैल को फैसला होगा कि समिति प्रदान की कुर्सी जाएगी या रहेगी। चौधर को बचाने के लिए प्रधान ने गतिविधि तेज कर दी है। विरोधी भी ब्लॉक समिति सदस्य को लेकर भ्रमण पर निकल चुके हैं। रूठे को मनाने के लिए प्रधान ने मुहिम शुरू कर दी है। यह अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया तो प्रधान अंजू देवी व उपप्रधान सुखबीर को कुर्सी खाली करने पड़ेगी।
तीन वर्ष पहले प्रधान को 26 में से से मिले 25 वोट, उप-प्रधान को 16
करीब तीन वर्ष पहले अंजू देवी को प्रधान व सुखबीर को उपप्रधान बनाया गया था। उस समय चौधर के लिए हुए चुनाव में मंजू को 26 में से 25 और सुखबीर को 16 वोट मिले थे। भाजपा नेताओं ने इनका साथ दिया था। प्रधान बनाने के बाद 26 लाख रुपये की ग्रांट आई थी। इसके एक वर्ष बाद करीब 54 लाख रुपये की ग्रांट सरकार ने विकास कार्य करवाने के लिए दी थी। दोनों ग्रांट का वितरण सही हो गया था। इसके बाद करोड़ों रुपये की ग्रांट आई। इस ग्रांट के वितरण में ब्लॉक समिति सदस्यों ने प्रधान पर भेदभाव के आरोप लगाए। यह आरोप दो-तिहाई से ज्यादा सदस्यों ने लगाया। अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए पिछले वर्ष जनवरी में बैठक बुलाई गई। यह बैठक रद्द हो गई। इसके बाद 10 फरवरी 2018 व 24 मई को बैठक बुलाने की तारीख तय की गई। प्रधान ने इस मामले में अदालत की शरण ली। अदालत ने बैठक पर रोक लगा दी। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस रोक को हटा दिया है और दो अप्रैल को एडीसी की अध्यक्षता में बैठक बुलाने का आदेश दिया है। अब दो अप्रैल को ही फैसला होगा की अंजू की चौधर फिर से जमेगी या खिसकेगी।
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