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ओवर टाइम बंद करने के दो दिन बाद भी नहीं बना नया टाइम टेबल, यात्रियों को हो रही परेशानी
Updated Sat, 24 Nov 2018 12:27 AM IST
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ओवर टाइम बंद होने के रोजाना घट रही रोडवेज की कमाई
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। रोडवेज विभाग में चालक और परिचालक का ओवर टाइम बंद करने से विभाग की व्यवस्था डामाडोल हो गई है। नए नियम के अनुसार चालक व परिचालक से सप्ताह में केवल 48 घंटे ही काम लेना है। इस प्रकार विभाग के लिए नई रोटेशन बनाना सिरदर्द बन चुका है। नए नियमानुसार विभागीय अधिकारी दो दिन बाद भी नया रोटेशन नहीं बना पाए हैं। जिससे लोकल रूटों पर यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रूटों पर चक्कर पूरा नहीं करने पर यात्रियों के साथ-साथ विभाग को भी घाटा हो रहा है। रोडवेज विभाग आमतौर से दिन में 15 लाख की कमाई करता है। वहीं ओवर टाइम बंद होने के बाद विभाग को लगातार घाटा हो रहा है। इस प्रकार ओवर टाइम बंद होन से रोडवेज बसें रूटों पर चक्कर पूरा नहीं कर पा रही हैं। लंबे रूटों पर यात्रियों की सुविधा के लिए चालक व परिचालकों से आठ घंटे से ज्यादा काम लिया जा रहा है। नियमानुसार सप्ताह में 48 घंटे काम लेने पर कर्मचारियों की ड्यूटी का अगले दिन समावेश किया जा रहा है, लेकिन लोकल रूटों पर यात्रियों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। लगातार तीन दिन से खरेंटी, पिल्लूखेड़ा, खूंगा व कौथ लोकल रूटों पर बस नहीं चलने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी हुई। ओवर टाइम बंद करने के बाद फ्लांइग, यार्ड विभाग व बुकिंग ब्रांच सहित अन्य विभागों में क्लर्क के रूप में काम कर रहे 76 चालकों और परिचालकों के अपने मूलरूप से काम पर लौटने से इन विभागों में अब कार्यालय का कार्य प्रभावित हो रहा है। अब रोडवेज विभाग में 319 चालक व 294 परिचालक हैं। ओवर टाइम खत्म होने के बाद विभाग को चालक व परिचालक का टोटा पड़ रहा है। इसके चलते विभाग ने मुख्यालय को 54 चालक व 117 परिचालकों की डिमांड भेजी है।
दिन कमाई
19 नवंबर 14,54080 रुपये
20 नवंबर 1233824 रुपये
21 नवंबर 1055677 रुपये
ओवर टाइम खत्म करने के एक सप्ताह पहले देनी चाहिए थी सूचना
सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों का ओवर टाइम खत्म करने के आदेश दिए हैं। ओवर टाइम से बसे सुचारू रूप से अपने रूटों पर चलती थीं, जिससे कर्मचारियों के साथ लोगों को फायदा था। एक दम से ओवर टाइम खत्म करने के बाद रोडवेज विभाग का रूटीन बिगड़ गया है। प्रदेश सरकार को ओवर टाइम खत्म करने के लगभग एक सप्ताह पहले सूचना देनी चाहिए थी, जिससे विभाग आसानी से नए रोटेशन बना सके।
अजीत नेहरा, डीआई अधिकारी
रोडवेज कर्मचारियों ने कहा, ओवर टाइम न दें, पर व्यवस्था होने तक ड्यूटी करने को तैयार
नरवाना। नरवाना में वीरवार को रोडवेज कर्मचारियों की बैठक हुई। जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार ने ओवर टाइम समाप्त करने के नाम पर आम जनता व छात्रों को परेशान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को परेशानी से बचाने के लिए वो ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं, बेशक उन्हें ओवर टाइम न दें। कर्मचारी रामनिवास, सतबीर, राजेश, ईश्वर, सत्यवान, कृष्ण, शमशेर, अनिल, कपिल, नितिन, जगदीप शर्मा ने कहा कि यदि सरकार ओवर टाइम बंद करना चाहती है तो 15-16 हजार कर्मचारियों की सीधी भर्ती करे। उन्होंने कहा कि सरकार अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए परिवहन विभाग को निजी हाथों में सौंपना चाहती है। 700 प्राइवेट बसों को हायर करने का फैसला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, फिर बी सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। रोडवेज विभाग में चालक और परिचालक का ओवर टाइम बंद करने से विभाग की व्यवस्था डामाडोल हो गई है। नए नियम के अनुसार चालक व परिचालक से सप्ताह में केवल 48 घंटे ही काम लेना है। इस प्रकार विभाग के लिए नई रोटेशन बनाना सिरदर्द बन चुका है। नए नियमानुसार विभागीय अधिकारी दो दिन बाद भी नया रोटेशन नहीं बना पाए हैं। जिससे लोकल रूटों पर यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रूटों पर चक्कर पूरा नहीं करने पर यात्रियों के साथ-साथ विभाग को भी घाटा हो रहा है। रोडवेज विभाग आमतौर से दिन में 15 लाख की कमाई करता है। वहीं ओवर टाइम बंद होने के बाद विभाग को लगातार घाटा हो रहा है। इस प्रकार ओवर टाइम बंद होन से रोडवेज बसें रूटों पर चक्कर पूरा नहीं कर पा रही हैं। लंबे रूटों पर यात्रियों की सुविधा के लिए चालक व परिचालकों से आठ घंटे से ज्यादा काम लिया जा रहा है। नियमानुसार सप्ताह में 48 घंटे काम लेने पर कर्मचारियों की ड्यूटी का अगले दिन समावेश किया जा रहा है, लेकिन लोकल रूटों पर यात्रियों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। लगातार तीन दिन से खरेंटी, पिल्लूखेड़ा, खूंगा व कौथ लोकल रूटों पर बस नहीं चलने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी हुई। ओवर टाइम बंद करने के बाद फ्लांइग, यार्ड विभाग व बुकिंग ब्रांच सहित अन्य विभागों में क्लर्क के रूप में काम कर रहे 76 चालकों और परिचालकों के अपने मूलरूप से काम पर लौटने से इन विभागों में अब कार्यालय का कार्य प्रभावित हो रहा है। अब रोडवेज विभाग में 319 चालक व 294 परिचालक हैं। ओवर टाइम खत्म होने के बाद विभाग को चालक व परिचालक का टोटा पड़ रहा है। इसके चलते विभाग ने मुख्यालय को 54 चालक व 117 परिचालकों की डिमांड भेजी है।
दिन कमाई
19 नवंबर 14,54080 रुपये
20 नवंबर 1233824 रुपये
21 नवंबर 1055677 रुपये
ओवर टाइम खत्म करने के एक सप्ताह पहले देनी चाहिए थी सूचना
सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों का ओवर टाइम खत्म करने के आदेश दिए हैं। ओवर टाइम से बसे सुचारू रूप से अपने रूटों पर चलती थीं, जिससे कर्मचारियों के साथ लोगों को फायदा था। एक दम से ओवर टाइम खत्म करने के बाद रोडवेज विभाग का रूटीन बिगड़ गया है। प्रदेश सरकार को ओवर टाइम खत्म करने के लगभग एक सप्ताह पहले सूचना देनी चाहिए थी, जिससे विभाग आसानी से नए रोटेशन बना सके।
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अजीत नेहरा, डीआई अधिकारी
रोडवेज कर्मचारियों ने कहा, ओवर टाइम न दें, पर व्यवस्था होने तक ड्यूटी करने को तैयार
नरवाना। नरवाना में वीरवार को रोडवेज कर्मचारियों की बैठक हुई। जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार ने ओवर टाइम समाप्त करने के नाम पर आम जनता व छात्रों को परेशान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को परेशानी से बचाने के लिए वो ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं, बेशक उन्हें ओवर टाइम न दें। कर्मचारी रामनिवास, सतबीर, राजेश, ईश्वर, सत्यवान, कृष्ण, शमशेर, अनिल, कपिल, नितिन, जगदीप शर्मा ने कहा कि यदि सरकार ओवर टाइम बंद करना चाहती है तो 15-16 हजार कर्मचारियों की सीधी भर्ती करे। उन्होंने कहा कि सरकार अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए परिवहन विभाग को निजी हाथों में सौंपना चाहती है। 700 प्राइवेट बसों को हायर करने का फैसला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, फिर बी सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
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