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नकली आपदा से निपटने में ही छुटे प्रशासन के पसीने

Fri, 22 Dec 2017 12:30 AM IST
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:30 AM IST
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नकली आपदा से निपटने में ही छुटे प्रशासन के पसीने

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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। भूकंप जैसी आपदा से निपटने के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियों को परखने के लिए वीरवार को मॉक ड्रिल का आयोजन किया। नकली आपदा से निपटने के लिए अधूरी तैयारियों के बीच प्रशासन के पसीने छूटते नजर आए। राहत कार्यों में लगी टीमों के बीच तालमेल की कमी नजर आई, वहीं हेल्प डेस्क पर न दवाइयां थी, न अन्य राहत सामग्री। हेल्प डेस्क पर केवल 5-6 युवकों को बैठाया गया था। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि वास्तव में भूकंप जैसी आपदा आ जाए तो प्रशासन इससे निपटने के लिए कितना तैयार है।
सुबह 10 बजे शुरू होने वाली मॉक ड्रिल किसी स्थान पर 10 बजकर 20 मिनट में तो किसी स्थान पर 10 बजकर 25 मिनट पर शुरू हुई। प्रशासन ने रिएक्टर स्केल पर 8 की तीव्रता वाले भूकंप जैसी आपदा से निपटने का अभ्यास किया। इसके लिए पांच स्थानों लघु सचिवालय, एचपी गैस प्लांट, सैनी धर्मशाला, नागरिक अस्पताल और डीएवी स्कूल को शामिल किया गया था। लघु सचिवालय में हुई मॉक ड्रिल में काफी अव्यवस्थाएं देखने को मिली। लघु सचिवालय में मॉक ड्रिल के दौरान दो लोगों की मौत, 14 घायल बताए गए जबकि बचाव टीम ने 20 को सुरक्षित बचाने का नाटक किया। इसमें भूकंप के कारण दो कमरे गिर गए तथा कंप्यूटर लैब जल गई। लघु सचिवालय में एक बार एंबुलेंस दो लोगों को लेकर निकल गई लेकिन उसके बाद लगभग आधे घंटे के बाद वापस पहुंच पाई। यहां हेल्प डेस्क पर बैठने वाले लोग ही गायब हो गए। यहां नोडल अधिकारी जुलाना के तहसीलदार ने जब आकर पूछा कि हेल्प डेस्क पर बैठने वाले लोग कहां गए, काफी देर के बाद ही यह लोग वापस हेल्प डेस्क पर आकर बैठे। हेल्प डेस्क पर सहायता करने के लिए कोई साजोसामान नहीं था। इसी प्रकार से नागरिक अस्पताल में पांच लोगों की मौत, 12 घायल को दिखाया गया जबकि 25 लोगों को टीम ने सुरक्षित बचा लिया। यहां एक अस्थाई शव ग्रह बनाया गया था। यहां प्राथमिकता चिकित्सा देने वाले लोगों को पट्टी करने का भी पता नहीं था। दंत चिकित्सक डॉ. रमेश पांचाल ने मॉक ड्रिल को पूरी तरह सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन कर्मचारियों के बीच तालमेल की कमी यहां भी साफ नजर आ रही थी। किसी कार्य के लिए यहां ड्यूटी पर लगे वालंटियरों व कर्मचारियों को बुलाकर काम लगाना पड़ता था, खुद वे किसी कार्य को नहीं कर पा रहे थे। डीएवी स्कूल में 9 लोगों के घायल होने का समाचार आया। यहां प्रशासन ने एंबुलेंस भेजकर सभी को नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इनमें दो स्कूली बच्चे भी शामिल थे। सभी जगहों पर मृतकों तथा घायलों की पहचान बायोमीट्रिक सिस्टम से की गई। इसी प्रकार सैनी धर्मशाला में भी बचाव व राहत कार्य जोरों से चला।
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नहीं पता था क्या करना है
लघु सचिवालय में हेल्प डेस्क पर बैठे कर्मचारियों को यह भी पता नहीं था कि उन्हें क्या काम करना है। जब इनसे पूछा गया कि उनको क्या कार्य सौंपा गया है तो इन लोगों ने केवल इतना कहा कि इन्हें केवल यहां बैठने के लिए ही कहा गया है।
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बच्चों को मिला सीखने के लिए
प्रशासन द्वारा यह अच्छा प्रयास किया गया है। इससे सुरक्षा इंतजामों को जांचने का मौका मिला है। साथ ही बच्चों को भी पता चला है कि भूकंप की स्थिति में कैसे खुद को और दूसरों की जान को बचाएं। वहीं इस प्रकार की आपदा के समय मिलजुलकर काम करने के लिए भी बच्चों को प्रेरित किया गया।
डॉ. डीडी विद्यार्थी, क्षेत्रीय निदेशक डीएवी संस्थाएं।

कमियों को किया जाएगा दूर
डीसी अमित खत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मॉक ड्रिल पूरी तरह सफल रही। सभी जगहों पर बचाव टीमों ने अच्छा काम करके दिखाया। एक सवाल के जवाब में डीसी ने कहा कि कर्मचारियों के तालमेल के कारण आई कम ी को दूर किया जाएगा। कुछ कमियां अवश्य रही लेकिन अगली बार होने वाली मॉक ड्रिल और बेहतर होगी। प्रशासन हर प्रकार की आपदा से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहता है।

ईमानदारी से किया काम
एसएसएपी डॉ. अरुण सिंह ने कहा कि मॉड ड्रिल में पुलिस कर्मचारियों का तालमेल बेहतर रहा। पुलिस कर्मचारियों ने बचाव व राहत टीम में जो काम किया, वह सराहनीय रहा। जहां-जहां पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई थी, वहां पर उन्होंने पूरी निष्ठा व ईमानदारी से अपना काम किया। पुलिस कसी व्भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हर समय तैयार रहती थी।

भूकंप आने पर ये उपाय करें :
1. मकान, दफ्तर या किसी भी इमारत में अगर आप मौजूद हैं, तो वहां से बाहर निकलकर खुले में आ जाएं।
2. खुले मैदान की ओर भागें। भूकंप के दौरान खुले मैदान से ज्यादा सुरक्षित जगह कोई नहीं होती।
3. किसी भवन के आसपास नहीं खड़े हों।
4. अगर आप ऐसे भवन में हैं, जहां लिफ्ट हो तो लिफ्ट का इस्तेमाल कतई नहीं करें। ऐसी स्थिति में सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करें।
5. घर के दरवाजे और खिड़की को खुला रखें।
6. घर की सभी बिजली स्विच ऑफ कर दें।
7. अगर इमारत बहुत ऊंची हो और तुरंत उतर पाना मुमकिन नहीं हो तो बिल्डिंग में मौजूद किसी मेज, ऊंची चौकी या बेड के नीचे छिप जाएं।
8. भूकंप के दौरान लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो पैनिक न करें। किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं, ऐसे में स्थिति और बुरी हो सकती है।
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