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जिला के स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:20 AM IST
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सरस मेले का खाका तैयार, जींद के छोटे उद्योगों के लिए सुनहरा मौका
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
जिला भर में छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूह और एक इकाई लगाकर उत्पादन करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब उनके उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। इसके लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा फरवरी माह में अटल पार्क की साइट पर सरस मेले का आयोजन किया जाएगा।
फिलहाल जिला में करीब 600 स्वयं सहायता समूह और इतने ही एक व्यक्ति आधारित उत्पादन यूनिट काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ समूहों का सामान तो पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। विशेषकर जींद के खादी उत्पादों में जींद के बने सामान की मांग काफी अधिक है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अच्छा काम तो हो रहा है, लेकिन अभी यह सामान स्थानीय मार्केट में ही अपनी जगह बना पाया है।
जींद की चूड़ियों की मांग
जिला के सच्चा खेड़ा में काम कर रहा एक समूह कांच की चूड़ियां और फैंसी कड़ों का निर्माण करता है। इस समूह का सामान जींद जिला के साथ-साथ आसपास के कई जिलों में भी जाता है और यहां बने सामान को काफी ग्राहक भी मिल रहे हैं। इसके बावजूद यह उत्पाद राष्ट्रीय मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पाया है।
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मशरूम उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग भी
ईगराह गांव निवासी किसान अशोक कुमार ने अपने घर में ही खुंबी उत्पादन का काम शुरू किया है। अशोक कुमार ने अब खुंबी उत्पादन के साथ-साथ खुंबी की मिठाई, अचार और मुरब्बा बनाने की प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है। ऐसे उभरते हुए लोगों को सरस मेला नई पहचान दिलवाएगा।
कपड़े और सजावटी सामान का उत्पादन
जिला में कार्यरत स्वयं सहायता समूह और अन्य यूनिट कपड़ा बनाने से लेकर, इस पर कढ़ाई, सजावटी सामान, दुग्ध उत्पाद, अचार, मुरब्बा और चटनी जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इसमें कर्मगढ़ गांव में कार्यरत एक स्वयं सहायता समूह ऐसा भी है, जो अपने खुद के दुग्ध उत्पाद तैयार करता है। इन महिलाओं ने भैंसों की नस्ल सुधार के लिए भी काम शुरू किया है।
देश भर से आते हैं खरीदार
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लगाए जाने वाले इस मेले में देश भर से खरीदार और स्थानीय स्तर पर बनने वाले उत्पादों में रुचि रखने वाले लोग आते हैं। वहीं अन्य राज्यों में छोटी-छोटी उत्पादन लगा कर काम करते हैं। यह लोग भी उत्पादकों से अपने विचार सांझा करेंगे।
महिला सशक्तीकरण को मिलेगा बढ़ावा
अधिकतर स्वयं सहायता समूह फिलहाल महिलाओं द्वारा ही चलाए जा रहे हैं। कुछ समूहों की स्थिति तो यह है कि ये महिलाएं अपने सामान को तैयार करवाने के लिए सैकड़ों अन्य महिलाओं को काम भी दे रही हैं। इसमें हाथ से कताई करने वाला एक समूह भी जींद शहर में है, जिनके तैयार किए कच्चे धागे की काफी मांग है।
साइट तय कर ली गई है
सरस मेला भारत सरकार द्वारा लगाया जाता है। यह मेला पहली बार फरवरी माह में जींद में लगवाया जा रहा है। इससे जिला के छोटे उत्पादकों को बहुत बड़ा मंच मिलेगा और राष्ट्रीय स्तर पर उनके उत्पादों को पहचान मिलेगी। इसके लिए सफीदों रोड स्थित अटल पार्क की साइट तय की गई है। यहां करीब आठ एकड़ जगह है। यदि जरूरत पड़ी तो अन्य साइट भी ली जा सकती है।
धीरेंद्र खडगटा, एडीसी जींद।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
जिला भर में छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूह और एक इकाई लगाकर उत्पादन करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब उनके उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। इसके लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा फरवरी माह में अटल पार्क की साइट पर सरस मेले का आयोजन किया जाएगा।
फिलहाल जिला में करीब 600 स्वयं सहायता समूह और इतने ही एक व्यक्ति आधारित उत्पादन यूनिट काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ समूहों का सामान तो पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। विशेषकर जींद के खादी उत्पादों में जींद के बने सामान की मांग काफी अधिक है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अच्छा काम तो हो रहा है, लेकिन अभी यह सामान स्थानीय मार्केट में ही अपनी जगह बना पाया है।
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जींद की चूड़ियों की मांग
जिला के सच्चा खेड़ा में काम कर रहा एक समूह कांच की चूड़ियां और फैंसी कड़ों का निर्माण करता है। इस समूह का सामान जींद जिला के साथ-साथ आसपास के कई जिलों में भी जाता है और यहां बने सामान को काफी ग्राहक भी मिल रहे हैं। इसके बावजूद यह उत्पाद राष्ट्रीय मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पाया है।
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मशरूम उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग भी
ईगराह गांव निवासी किसान अशोक कुमार ने अपने घर में ही खुंबी उत्पादन का काम शुरू किया है। अशोक कुमार ने अब खुंबी उत्पादन के साथ-साथ खुंबी की मिठाई, अचार और मुरब्बा बनाने की प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है। ऐसे उभरते हुए लोगों को सरस मेला नई पहचान दिलवाएगा।
कपड़े और सजावटी सामान का उत्पादन
जिला में कार्यरत स्वयं सहायता समूह और अन्य यूनिट कपड़ा बनाने से लेकर, इस पर कढ़ाई, सजावटी सामान, दुग्ध उत्पाद, अचार, मुरब्बा और चटनी जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इसमें कर्मगढ़ गांव में कार्यरत एक स्वयं सहायता समूह ऐसा भी है, जो अपने खुद के दुग्ध उत्पाद तैयार करता है। इन महिलाओं ने भैंसों की नस्ल सुधार के लिए भी काम शुरू किया है।
देश भर से आते हैं खरीदार
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लगाए जाने वाले इस मेले में देश भर से खरीदार और स्थानीय स्तर पर बनने वाले उत्पादों में रुचि रखने वाले लोग आते हैं। वहीं अन्य राज्यों में छोटी-छोटी उत्पादन लगा कर काम करते हैं। यह लोग भी उत्पादकों से अपने विचार सांझा करेंगे।
महिला सशक्तीकरण को मिलेगा बढ़ावा
अधिकतर स्वयं सहायता समूह फिलहाल महिलाओं द्वारा ही चलाए जा रहे हैं। कुछ समूहों की स्थिति तो यह है कि ये महिलाएं अपने सामान को तैयार करवाने के लिए सैकड़ों अन्य महिलाओं को काम भी दे रही हैं। इसमें हाथ से कताई करने वाला एक समूह भी जींद शहर में है, जिनके तैयार किए कच्चे धागे की काफी मांग है।
साइट तय कर ली गई है
सरस मेला भारत सरकार द्वारा लगाया जाता है। यह मेला पहली बार फरवरी माह में जींद में लगवाया जा रहा है। इससे जिला के छोटे उत्पादकों को बहुत बड़ा मंच मिलेगा और राष्ट्रीय स्तर पर उनके उत्पादों को पहचान मिलेगी। इसके लिए सफीदों रोड स्थित अटल पार्क की साइट तय की गई है। यहां करीब आठ एकड़ जगह है। यदि जरूरत पड़ी तो अन्य साइट भी ली जा सकती है।
धीरेंद्र खडगटा, एडीसी जींद।