{"_id":"59ee39be4f1c1b69678b6f91","slug":"131508784574-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चरित्र निर्माण शिविर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चरित्र निर्माण शिविर
Updated Tue, 24 Oct 2017 12:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों।
आर्य समाज सफीदों में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा ने बाल चरित्र निर्माण शिविर लगाया। इसमें पतंजलि योग पीठ हरिद्वार के जिला योग प्रचारक सतीश भारतीय और सहशिक्षक सूयांशु आर्य ने बच्चों को आसन, प्राणायाम और जूडो कराटे का प्रशिक्षण दिया। आर्य समाज सफीदों के धर्माचार्य नरेंद्र देव शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य समाज का सुधार करना है। इस कार्य के लिए समाज समय-समय पर इस प्रकार के आयोजन करता है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों का शरीर स्वस्थ होगा तो ही देश विकसित होगा। बच्चे ही इस देश का भविष्य हैं। ऋषियों ने भी कहा है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए शरीर ही माध्यम है। इसके लिए शरीर को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी है। इस शिविर में साधकों को आत्मरक्षा के साथ देश के सच्चे भक्त बनने की शिक्षा दी जाती है। अनुलोम विलोम, कपाल भाति, भ्रामरी, प्राणायाम, ताड़ासन, वृक्षासन और मयूर आसन का अभ्यास बच्चों को कराया जा रहा है।
विज्ञापन
सफीदों।
आर्य समाज सफीदों में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा ने बाल चरित्र निर्माण शिविर लगाया। इसमें पतंजलि योग पीठ हरिद्वार के जिला योग प्रचारक सतीश भारतीय और सहशिक्षक सूयांशु आर्य ने बच्चों को आसन, प्राणायाम और जूडो कराटे का प्रशिक्षण दिया। आर्य समाज सफीदों के धर्माचार्य नरेंद्र देव शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य समाज का सुधार करना है। इस कार्य के लिए समाज समय-समय पर इस प्रकार के आयोजन करता है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों का शरीर स्वस्थ होगा तो ही देश विकसित होगा। बच्चे ही इस देश का भविष्य हैं। ऋषियों ने भी कहा है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए शरीर ही माध्यम है। इसके लिए शरीर को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी है। इस शिविर में साधकों को आत्मरक्षा के साथ देश के सच्चे भक्त बनने की शिक्षा दी जाती है। अनुलोम विलोम, कपाल भाति, भ्रामरी, प्राणायाम, ताड़ासन, वृक्षासन और मयूर आसन का अभ्यास बच्चों को कराया जा रहा है।