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किसानों ने खेती पर लागत घटाने पर किया मंथन
Updated Tue, 13 Jun 2017 12:13 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ग्राम विकास गतिविधि के तत्वावधान में सोमवार को हमेटी में जीरो बजट प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान जिले भर के 150 किसानों ने खेती में आ रही लागत को घटा कर खेती को लाभ का सौदा बनाने पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. वजीर सिंह ने किसानों से आह्वान किया कि प्राकृतिक और प्राचीन खेती की पद्धति अपनाकर खेती से लाभ कमाया जा सकता है।
डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि एक समय में हरित क्रांति के समय कृषि विभाग के अधिकारी चोरी से किसानों के खेत में खाद डालते थे, लेकिन अब यह समय बदल गया है। अब कृषि वैज्ञानिक भी प्राचीन और प्राकृतिक खेती को तरजीह दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कृषि पद्धति में मल्टी क्रॉप के माध्यम से किसान अच्छी पैदावार और मुनाफा ले सकता है। इसमें एक फसल के खर्च में ही कई फसल पैदा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि फसल में कुछ भी जहरीला कीटनाशक डालने की जरूरत नहीं है।
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ऐसे उगाएं मल्टी क्रॉप
कार्यक्रम में किसानों को एक साथ एक ही खेत में बहुफसली खेती की जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि कपास के साथ लोबिया, गैंदा, मूंग, उड़द, मक्का जैसी फसलें बोई जा सकती हैं। इससे किसान की दालों पर बाहरी निर्भरता खत्म हो जाएगी। अच्छी पैदावार लेकर दालों को मार्केट में बेचा भी जा सकता है। इसी प्रकार गन्ने की फसल के साथ चना, प्याज, भिंडी, बेल वाली सब्जियां ली जा सकती हैं। इससे फसल में बीमारियां भी कम आती हैं।
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90 प्रतिशत पानी बचाना संभव
कार्यक्रम में वक्ताओं ने खेती की आधुनिक और प्राचीन तकनीक को एक साथ अपना कर महज दस प्रतिशत पानी से ही बेहतर पैदावार के तरीके भी बताए। इसमें किसान को खेत में बेड बनाकर खेती करनी होगी। इससे पानी की सीमित मात्रा में अधिक सिंचाई की जा सकती है।
जिले के किसानों ने खेती पर लागत घटाने पर किया मंथन
प्राचीन और प्राकृतिक खेती को तरजीह दे रहे वैज्ञानिक : डॉ. वजीर
जारी रहेगी मुहिम
जींद जिला ग्राम विकास प्रमुख जितेंद्र चहल ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और लोगों को अच्छा स्वास्थ्य देने के लिए यह अभियान जारी रहेगा। उद्घाटन स्तर में राष्ट्रीय स्वयं संघ प्रांत टोली से राजेश मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित हुए, जबकि अध्यक्षता जाट धर्मार्थ सभा के प्रधान आजाद पंवार ने की।
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जींद।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ग्राम विकास गतिविधि के तत्वावधान में सोमवार को हमेटी में जीरो बजट प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान जिले भर के 150 किसानों ने खेती में आ रही लागत को घटा कर खेती को लाभ का सौदा बनाने पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. वजीर सिंह ने किसानों से आह्वान किया कि प्राकृतिक और प्राचीन खेती की पद्धति अपनाकर खेती से लाभ कमाया जा सकता है।
डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि एक समय में हरित क्रांति के समय कृषि विभाग के अधिकारी चोरी से किसानों के खेत में खाद डालते थे, लेकिन अब यह समय बदल गया है। अब कृषि वैज्ञानिक भी प्राचीन और प्राकृतिक खेती को तरजीह दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कृषि पद्धति में मल्टी क्रॉप के माध्यम से किसान अच्छी पैदावार और मुनाफा ले सकता है। इसमें एक फसल के खर्च में ही कई फसल पैदा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि फसल में कुछ भी जहरीला कीटनाशक डालने की जरूरत नहीं है।
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ऐसे उगाएं मल्टी क्रॉप
कार्यक्रम में किसानों को एक साथ एक ही खेत में बहुफसली खेती की जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि कपास के साथ लोबिया, गैंदा, मूंग, उड़द, मक्का जैसी फसलें बोई जा सकती हैं। इससे किसान की दालों पर बाहरी निर्भरता खत्म हो जाएगी। अच्छी पैदावार लेकर दालों को मार्केट में बेचा भी जा सकता है। इसी प्रकार गन्ने की फसल के साथ चना, प्याज, भिंडी, बेल वाली सब्जियां ली जा सकती हैं। इससे फसल में बीमारियां भी कम आती हैं।
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90 प्रतिशत पानी बचाना संभव
कार्यक्रम में वक्ताओं ने खेती की आधुनिक और प्राचीन तकनीक को एक साथ अपना कर महज दस प्रतिशत पानी से ही बेहतर पैदावार के तरीके भी बताए। इसमें किसान को खेत में बेड बनाकर खेती करनी होगी। इससे पानी की सीमित मात्रा में अधिक सिंचाई की जा सकती है।
जिले के किसानों ने खेती पर लागत घटाने पर किया मंथन
प्राचीन और प्राकृतिक खेती को तरजीह दे रहे वैज्ञानिक : डॉ. वजीर
जारी रहेगी मुहिम
जींद जिला ग्राम विकास प्रमुख जितेंद्र चहल ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और लोगों को अच्छा स्वास्थ्य देने के लिए यह अभियान जारी रहेगा। उद्घाटन स्तर में राष्ट्रीय स्वयं संघ प्रांत टोली से राजेश मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित हुए, जबकि अध्यक्षता जाट धर्मार्थ सभा के प्रधान आजाद पंवार ने की।