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12वीं परीक्षा : 14875 विद्यार्थी आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पास
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जींद। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम सोमवार को घोषित किया गया। इस सत्र में 12वीं कक्षा में 14875 विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पास किया गया है। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के कारण 12वीं कक्षा की परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं। शिक्षा विभाग ने 10वीं कक्षा के 30 प्रतिशत अंक, 10 प्रतिशत अंक 11वीं कक्षा के और 60 प्रतिशत अंक विद्यालयों द्वारा दिए जाने वाले असेसमेंट टेस्ट के आधार पर परीक्षा परिणाम तैयार किया है।
जिला शिक्षा अधिकारी मदन सिंह चोपड़ा ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सही निर्णय लिया है। जो विद्यार्थी परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट हैं, वह दोबारा से परीक्षा दे सकते हैं। जारी परीक्षा परिणाम पर जहां मेधावी विद्यार्थियों में मायूसी है, वहीं जो विद्यार्थी पढ़ने में कम रुचि रखते हैं, वह मेहनत किए बिना ही पास हो गए हैं। अभी सीबीएसई की 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम जारी होना बाकी है।
कॉलेजों में दाखिले के लिए रहेगी होड़
परिणाम आने के बाद उच्चतर शिक्षा विभाग में दाखिले के लिए विद्यार्थियों की होड़ रहेगी। जिलेभर के 16 कॉलेजों में मात्र साढ़े दस हजार सीटें हैं, वहीं इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई के साढ़े 17 हजार से अधिक विद्यार्थी पास होंगे। ऐसे में मेरिट लिस्ट काफी ऊंची जाने की संभावना है और जिले के विभिन्न कॉलेजों में सीट कम होने के कारण काफी विद्यार्थियों को दूसरे जिले के कॉलेजों में दाखिले के लिए आवेदन करना पड़ेगा। सत्र 2020 में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा में जिले में 14321 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 12392 विद्यार्थी पास हुए थे, 1624 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट आई थी और 305 विद्यार्थी फेल हो गए थे। 2020 सत्र में जिलेभर में 86.53 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए और प्रदेशभर में जींद जिला ने दूसरा स्थान प्राप्त किया था।
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संक्रमण को देखते हुए सरकार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है, लेकिन जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा की तैयारी की थी उन्हें इस फैसले से ज्यादा खुशी नहीं मिली। परीक्षाएं होनी चाहिए थी। विषयों के अंक कम कर परीक्षा कराई जा सकती थी। ज्यादातर विद्यार्थी परीक्षा देने के हक में थे। ऐसे में परीक्षा केंद्रों पर कोविड नियमों का पालन करते हुए परीक्षाएं आयोजित करवानी चाहिए थी। इससे विद्यार्थी आंतरिक मूल्यांकन कर पाते।
- सृष्टि, छात्रा।
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वर्तमान परिस्थिति में संक्रमण का स्तर ज्यादा नहीं है। परीक्षा होती तो विद्यार्थियों के लिए अच्छा रहता। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को परीक्षा करवानी चाहिए थी। ऐेसे में हर मेधावी विद्यार्थी इस फैसले से खुश नहीं हैं। यदि कोरोना संक्रमण के कारण कोई छात्र परीक्षा नहीं दे पाता तो उसे एक मौका और मिलना चाहिए था।
- मंजू, छात्रा।
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ज्यादातर विद्यार्थी यही चाहते थे कि परीक्षा हो। जब संक्रमण होने पर सरकार ने दुकानदारों को दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है और अन्य औद्योगिक इकाइयां भी खुली हुई हैं। 12वीं कक्षा की परीक्षा जरूर होनी चाहिए थी। एक कक्षा में 10 से 15 विद्यार्थियों को बैठाया जा सकता है। इससे सोशल डिस्टेंस का पूरा ध्यान रहता और विद्यार्थी मास्क पहनकर परीक्षा देते।
- स्वीटी, छात्रा।
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कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विशेष तैयारी के साथ परीक्षा आयोजित करवाई जा सकती थी। 12वीं की परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए थी, क्योंकि परीक्षा के बिना विद्यार्थियों का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। मुख्य विषयों के पेपर लिए जा सकते थे। सही अंक निर्धारण होने पर विद्यार्थियों में नाराजगी है।अगर परीक्षा होती तो विद्यार्थी अपना मूल्यांकन सही कर पाते।
- मीना, छात्रा।
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बच्चों का सही व तार्किक मूल्यांकन नहीं
12वीं कक्षा का परिणाम इस वर्ष जो शत प्रतिशत रहा है, यह बच्चों का सही व तार्किक मूल्यांकन नहीं है। अच्छा होता यदि व्यापक सुरक्षा प्रबंधों के साथ हिदायतों का पालन करते हुए परीक्षाएं लेकर बच्चों का सही मूल्यांकन किया जाता। मेधावी विद्यार्थियों को ऐसे परिणामों से निराशा होती है। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ मांग करता है कि सभी बच्चों को पिछले वर्षों की भांति मुफ्त किताबें उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि बेपटरी हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
- भूप सिंह वर्मा, प्रेस प्रवक्ता, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ।
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जिला शिक्षा अधिकारी मदन सिंह चोपड़ा ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सही निर्णय लिया है। जो विद्यार्थी परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट हैं, वह दोबारा से परीक्षा दे सकते हैं। जारी परीक्षा परिणाम पर जहां मेधावी विद्यार्थियों में मायूसी है, वहीं जो विद्यार्थी पढ़ने में कम रुचि रखते हैं, वह मेहनत किए बिना ही पास हो गए हैं। अभी सीबीएसई की 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम जारी होना बाकी है।
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कॉलेजों में दाखिले के लिए रहेगी होड़
परिणाम आने के बाद उच्चतर शिक्षा विभाग में दाखिले के लिए विद्यार्थियों की होड़ रहेगी। जिलेभर के 16 कॉलेजों में मात्र साढ़े दस हजार सीटें हैं, वहीं इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई के साढ़े 17 हजार से अधिक विद्यार्थी पास होंगे। ऐसे में मेरिट लिस्ट काफी ऊंची जाने की संभावना है और जिले के विभिन्न कॉलेजों में सीट कम होने के कारण काफी विद्यार्थियों को दूसरे जिले के कॉलेजों में दाखिले के लिए आवेदन करना पड़ेगा। सत्र 2020 में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा में जिले में 14321 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 12392 विद्यार्थी पास हुए थे, 1624 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट आई थी और 305 विद्यार्थी फेल हो गए थे। 2020 सत्र में जिलेभर में 86.53 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए और प्रदेशभर में जींद जिला ने दूसरा स्थान प्राप्त किया था।
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संक्रमण को देखते हुए सरकार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है, लेकिन जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा की तैयारी की थी उन्हें इस फैसले से ज्यादा खुशी नहीं मिली। परीक्षाएं होनी चाहिए थी। विषयों के अंक कम कर परीक्षा कराई जा सकती थी। ज्यादातर विद्यार्थी परीक्षा देने के हक में थे। ऐसे में परीक्षा केंद्रों पर कोविड नियमों का पालन करते हुए परीक्षाएं आयोजित करवानी चाहिए थी। इससे विद्यार्थी आंतरिक मूल्यांकन कर पाते।
- सृष्टि, छात्रा।
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वर्तमान परिस्थिति में संक्रमण का स्तर ज्यादा नहीं है। परीक्षा होती तो विद्यार्थियों के लिए अच्छा रहता। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को परीक्षा करवानी चाहिए थी। ऐेसे में हर मेधावी विद्यार्थी इस फैसले से खुश नहीं हैं। यदि कोरोना संक्रमण के कारण कोई छात्र परीक्षा नहीं दे पाता तो उसे एक मौका और मिलना चाहिए था।
- मंजू, छात्रा।
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ज्यादातर विद्यार्थी यही चाहते थे कि परीक्षा हो। जब संक्रमण होने पर सरकार ने दुकानदारों को दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है और अन्य औद्योगिक इकाइयां भी खुली हुई हैं। 12वीं कक्षा की परीक्षा जरूर होनी चाहिए थी। एक कक्षा में 10 से 15 विद्यार्थियों को बैठाया जा सकता है। इससे सोशल डिस्टेंस का पूरा ध्यान रहता और विद्यार्थी मास्क पहनकर परीक्षा देते।
- स्वीटी, छात्रा।
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कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विशेष तैयारी के साथ परीक्षा आयोजित करवाई जा सकती थी। 12वीं की परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए थी, क्योंकि परीक्षा के बिना विद्यार्थियों का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। मुख्य विषयों के पेपर लिए जा सकते थे। सही अंक निर्धारण होने पर विद्यार्थियों में नाराजगी है।अगर परीक्षा होती तो विद्यार्थी अपना मूल्यांकन सही कर पाते।
- मीना, छात्रा।
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बच्चों का सही व तार्किक मूल्यांकन नहीं
12वीं कक्षा का परिणाम इस वर्ष जो शत प्रतिशत रहा है, यह बच्चों का सही व तार्किक मूल्यांकन नहीं है। अच्छा होता यदि व्यापक सुरक्षा प्रबंधों के साथ हिदायतों का पालन करते हुए परीक्षाएं लेकर बच्चों का सही मूल्यांकन किया जाता। मेधावी विद्यार्थियों को ऐसे परिणामों से निराशा होती है। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ मांग करता है कि सभी बच्चों को पिछले वर्षों की भांति मुफ्त किताबें उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि बेपटरी हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
- भूप सिंह वर्मा, प्रेस प्रवक्ता, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ।