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Jind News: 20 साल से हाईटेंशन तारों के तले जी रहे 115 परिवार
Sat, 30 Nov 2024 01:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 30 Nov 2024 01:25 AM IST
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शहर की तीन कॉलोनी के लगभग 115 परिवार हाईटेंशन तारों के भय के साये में जी रहे हैं। हाईटेंशन तारों के नीचे सस्ती जमीन के चक्कर में लोग मकान बना रहे हैं। इससे वह अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। इसको लेकर बिजली निगम बार-बार लोगों को नोटिस दे चुका है, लेकिन फिर भी लोग नहीं मान रहे हैं। ऐसे में परिवार के लोग हाईटेंशन तारों की चपेट में आकर हादसों का शिकार हो रहे हैं।
इन मकानों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन तारों की मकान से मात्र तीन फीट ही। लोग अपने बच्चों को मकानों की छतों पर खेलने से मना करते हैं, उन्हें छत पर भी नहीं चढ़ने देते, लेकिन कभी न कभी बच्चे फिर हादसे का शिकार हो जाते हैं। इन लाइनों के नीचे से कई परिवार तो मकान छोड़कर दूसरी जगह किराये पर रह रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे जरूरतमंद परिवार हैं, जो मकान भी छोड़कर नहीं जा सकते। प्रशासन द्वारा लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस हाईटेंशन तार की लाइन हटाने को लेकर कॉलोनी के लोग कई बार बिजली निगम को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। जब कोई घटना हो जाती है तो कुछ दिन तार बदलने बारे मुद्दा उठता है लेकिन फिर से यह मुद्दा शांत हो जाता है।
हाईटेंशन के नीचे तीन हजार रुपये और आसपास आठ-दस हजार रुपये गज जमीन
शहर के श्याम नगर, जोगेंद्र नगर और राजेंंद्र नगर से दो जगह आठ और 11 केवी की हाईटेंशन तार गुजरती है। इन कॉलोनियों में प्रॉपर्टी डीलरों ने हाईटेंशन तारों की लाइन के नीचे जमीन खरीदी हुई है। कॉलोनियों में जमीन का भाव आठ से दस हजार रुपये गज है, लेकिन हाईटेंशन लाइन के नीचे जमीन तीन हजार रुपये गज मिल जाती है। ऐसे में जरूरतमंद परिवार सस्ती के चक्कर में जमीन खरीद लेते हैं। हालांकि जमीन खरीदने के दौरान जमीन मालिक को एक मंजिल ही बनाने बारे हिदायत दी जाती है, क्योंकि दूसरी मंजिल बनाना परिवार के लिए खतरा है।
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कब-कब हुए हादसे
वर्ष 2019 में नहर के पास सोलगर कॉलोनी में नौ साल वर्षीय मुकेश बिजली का करंट लगने से झुलस गया था। झुलसे बच्चे का कई दिन पीजीआई रोहतक में उपचार चला था।
-जुलाई 2021 में एचटी लाइन की चपेट में आने से कालवा गांव के किसान सुखविंद्र की मौत हो गई थी।
-सितंबर 2021 मलार गांव में एचटी लाइन से तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो घायल हो गए थे। मृतक पानीपत जिले के रहने वाले थे।
-पांच महीने पहले राजनगर में अहिरका गांव के 16 वर्षीय भांजे यश, विकास और उनका मामा राजेंद्र तारों की चपेट में आ गए थे।
-27 नवंबर को श्याम नगर में 13 वर्षीय किशोर भी खेलते समय हाईटेंशन तारों की चपेट में आ गई थी, जिससे उसका शरीर जलकर दो टुकड़ों में बंट गई थी।
बार-बार शिकायत दे चुके
कॉलोनी से हाईटेंशन तारों को हटाने को लेकर बार-बार बिजली निगम को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन अभी तक तो बिजली निगम ने कोई कदम नहीं उठाया है।
-विनोद कुमार, निवासी श्याम नगर
लोगों की जान से खिलवाड़
बिजली निगम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। कॉलोनी में लगभग जरूरतमंद परिवार ही रहते हैं। कॉलोनी में इस तरह के हादसे होते रहते हैं। हादसों में कोई तो जान गंवा देता है तो कोई उम्रभर के लिए दिव्यांग हो जाता है। सरकार को चाहिए कि इन तारों को कॉलोनी से हटाया जाए।
-रिंकू नागर, पूर्व पार्षद
हाईटेंशन तारों की लाइन के नीचे मकान बनाने वाले लोगों को बिजली निगम नोटिस भेज चुका है। यदि कोई हादसा होता है तो उसके लिए बिजली निगम जिम्मेदार नहीं है। हालांकि कुछ एरिया में छोटी लाइन का कुछ हिस्सा हटाया भी जा चुका है।
-विकास मलिक, एक्सईएन, बिजली निगम जींद
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इन मकानों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन तारों की मकान से मात्र तीन फीट ही। लोग अपने बच्चों को मकानों की छतों पर खेलने से मना करते हैं, उन्हें छत पर भी नहीं चढ़ने देते, लेकिन कभी न कभी बच्चे फिर हादसे का शिकार हो जाते हैं। इन लाइनों के नीचे से कई परिवार तो मकान छोड़कर दूसरी जगह किराये पर रह रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे जरूरतमंद परिवार हैं, जो मकान भी छोड़कर नहीं जा सकते। प्रशासन द्वारा लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस हाईटेंशन तार की लाइन हटाने को लेकर कॉलोनी के लोग कई बार बिजली निगम को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। जब कोई घटना हो जाती है तो कुछ दिन तार बदलने बारे मुद्दा उठता है लेकिन फिर से यह मुद्दा शांत हो जाता है।
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हाईटेंशन के नीचे तीन हजार रुपये और आसपास आठ-दस हजार रुपये गज जमीन
शहर के श्याम नगर, जोगेंद्र नगर और राजेंंद्र नगर से दो जगह आठ और 11 केवी की हाईटेंशन तार गुजरती है। इन कॉलोनियों में प्रॉपर्टी डीलरों ने हाईटेंशन तारों की लाइन के नीचे जमीन खरीदी हुई है। कॉलोनियों में जमीन का भाव आठ से दस हजार रुपये गज है, लेकिन हाईटेंशन लाइन के नीचे जमीन तीन हजार रुपये गज मिल जाती है। ऐसे में जरूरतमंद परिवार सस्ती के चक्कर में जमीन खरीद लेते हैं। हालांकि जमीन खरीदने के दौरान जमीन मालिक को एक मंजिल ही बनाने बारे हिदायत दी जाती है, क्योंकि दूसरी मंजिल बनाना परिवार के लिए खतरा है।
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कब-कब हुए हादसे
वर्ष 2019 में नहर के पास सोलगर कॉलोनी में नौ साल वर्षीय मुकेश बिजली का करंट लगने से झुलस गया था। झुलसे बच्चे का कई दिन पीजीआई रोहतक में उपचार चला था।
-जुलाई 2021 में एचटी लाइन की चपेट में आने से कालवा गांव के किसान सुखविंद्र की मौत हो गई थी।
-सितंबर 2021 मलार गांव में एचटी लाइन से तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो घायल हो गए थे। मृतक पानीपत जिले के रहने वाले थे।
-पांच महीने पहले राजनगर में अहिरका गांव के 16 वर्षीय भांजे यश, विकास और उनका मामा राजेंद्र तारों की चपेट में आ गए थे।
-27 नवंबर को श्याम नगर में 13 वर्षीय किशोर भी खेलते समय हाईटेंशन तारों की चपेट में आ गई थी, जिससे उसका शरीर जलकर दो टुकड़ों में बंट गई थी।
बार-बार शिकायत दे चुके
कॉलोनी से हाईटेंशन तारों को हटाने को लेकर बार-बार बिजली निगम को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन अभी तक तो बिजली निगम ने कोई कदम नहीं उठाया है।
-विनोद कुमार, निवासी श्याम नगर
लोगों की जान से खिलवाड़
बिजली निगम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। कॉलोनी में लगभग जरूरतमंद परिवार ही रहते हैं। कॉलोनी में इस तरह के हादसे होते रहते हैं। हादसों में कोई तो जान गंवा देता है तो कोई उम्रभर के लिए दिव्यांग हो जाता है। सरकार को चाहिए कि इन तारों को कॉलोनी से हटाया जाए।
-रिंकू नागर, पूर्व पार्षद
हाईटेंशन तारों की लाइन के नीचे मकान बनाने वाले लोगों को बिजली निगम नोटिस भेज चुका है। यदि कोई हादसा होता है तो उसके लिए बिजली निगम जिम्मेदार नहीं है। हालांकि कुछ एरिया में छोटी लाइन का कुछ हिस्सा हटाया भी जा चुका है।
-विकास मलिक, एक्सईएन, बिजली निगम जींद