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Jind News: एडीसी से मतदान का वादा पूरा नहीं कर पाईं 108 वर्षीय रामदेवी
Tue, 07 May 2024 03:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 07 May 2024 03:05 AM IST
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अपने कपड़े में बांधे सिक्के को एडीसी को देतीं रामदेवी। फाइल फोटो
जींद। भारत सिनेमा के पास रहने वाली 108 वर्षीय रामदेवी अब मतदान नहीं कर पाएंगी, क्योंकि रविवार को उनका निधन हो गया। एक मई को एडीसी डॉ. हरीश वशिष्ठ ने रामदेवी से मुलाकात की थी तो उन्होंने 25 मई को मतदान करने का वादा किया था। रामदेवी ने एडीसी को भेंट स्वरूप एक सिक्का भी दिया था, जिसे उन्होंने आशीर्वाद समझकर रख लिया था। डॉ. हरीश वशिष्ठ ने कहा कि रामदेवी से मुलाकात करके उन्हें एक अलग अनुभव हुआ था। उनके निधन से उनको बहुत दुख हुआ है।
लोगों को अधिक से अधिक मतदान को प्रेरित करने के लिए जिला प्रशासनिक अधिकारी स्वीप अभियान के तहत बुजुर्गों से मुलाकात कर रहा है। एक मई को एडीसी ने रामदेवी से मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया था। रामदेवी बोलने में सक्षम नहीं थीं। उन्होंने स्लेट पर एडीसी को लिखकर दिया था कि वह 25 मई को मतदान करने जरूर जाएंगी। एडीसी ने उनसे 15 मिनट बात करने के साथ आशीर्वाद लिया था। रामदेवी ने एडीसी को भेंट स्वरूप एक सिक्का भी दिया था, जिसे एडीसी ने आशीर्वाद समझकर रख लिया था। अब उनके निधन से एक बुजुर्ग मतदाता कम हो गया है।
बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलना सौभाग्य की बात है। रामदेवी से मिलकर बहुत अच्छा लगा था। बुजुर्गों के साथ समय बिताकर हमें अलग अनुभूति होती है। उनमें किसी प्रकार का कोई वैरभाव या द्वेष नहीं होता। उनके आशीर्वाद में केवल प्यार होता है। रामदेवी का निधन मेरे स्वयं के लिए भी एक दुखद क्षण है। -डॉ. हरीश वशिष्ठ, एडीसी
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लोगों को अधिक से अधिक मतदान को प्रेरित करने के लिए जिला प्रशासनिक अधिकारी स्वीप अभियान के तहत बुजुर्गों से मुलाकात कर रहा है। एक मई को एडीसी ने रामदेवी से मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया था। रामदेवी बोलने में सक्षम नहीं थीं। उन्होंने स्लेट पर एडीसी को लिखकर दिया था कि वह 25 मई को मतदान करने जरूर जाएंगी। एडीसी ने उनसे 15 मिनट बात करने के साथ आशीर्वाद लिया था। रामदेवी ने एडीसी को भेंट स्वरूप एक सिक्का भी दिया था, जिसे एडीसी ने आशीर्वाद समझकर रख लिया था। अब उनके निधन से एक बुजुर्ग मतदाता कम हो गया है।
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बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलना सौभाग्य की बात है। रामदेवी से मिलकर बहुत अच्छा लगा था। बुजुर्गों के साथ समय बिताकर हमें अलग अनुभूति होती है। उनमें किसी प्रकार का कोई वैरभाव या द्वेष नहीं होता। उनके आशीर्वाद में केवल प्यार होता है। रामदेवी का निधन मेरे स्वयं के लिए भी एक दुखद क्षण है। -डॉ. हरीश वशिष्ठ, एडीसी
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