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Jhajjar-Bahadurgarh News: स्टांप पेपर न मिलने से लटके काम
Wed, 24 Jul 2024 06:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 24 Jul 2024 06:09 AM IST
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बादली। तहसील मुख्यालय पर स्टांप नहीं मिलने के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टांप पेपर विक्रेताओं के लाइसेंस रिन्यू (नवीनीकरण) नहीं होने की वजह से यह समस्या बनी है।
उपमंडल मुख्यालय पर रोजाना 20 से 25 दस्तावेज, जिसमें विक्रय पत्र, हक त्यागपत्र, दान पत्र, समर्पण सहित कई प्रकार के दस्तावेज है, जिनका पंजीयन होता है और यह सारे ही दस्तावेज स्टाम्प पर निष्पादित होते हैं इसके अलावा शपथ पत्र के लिए भी स्टाम्प की जरूरत पड़ती है। इस कारण स्टांप विक्रेताओं के साथ लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तहसील कार्यालय में स्थायी तौर पर वेंडर नहीं है, जबकि अस्थायी तौर पर स्टांप बेचने वालों के लाइसेंस रिन्यू नहीं किए जा रहे हैं। 30 जून को लाइसेंस का समय पूरा हो गया है जिसके बाद अब कोई वेंडर नहीं है। ऐसे में कुछ बाहरी लोग जरूरतमंद लोगों से मनचाही कीमत वसूल रहे हैं। स्टांप की कमी इन दिनों दलालों की कमाई का जरिया बनी हुई है। कम मूल्य के स्टांप के तहसील कार्यालय में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
अटक रहे लोगों के काम
जाति प्रमाण पत्र, शपथ पत्र, सहमति पत्र, रजिस्ट्री, नामांत्रण और न्यायालयीन मामलों सहित अन्य बहुत कामों में स्टांप का उपयोग किया जाता है। तहसील में लंबे समय से 10, 20, 50 और 100 रुपये मूल्य के स्टांप का टोटा बना हुआ है। लोग स्टांप के लिए तहसील प्रांगण में स्टांप वेंडर के चक्कर लगा-लगाकर परेशान हैं।
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आमजन की समस्या का समाधान करवाया जाएगा। वेंडर लाइसेंस पर सरकारी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी, जबकि महंगे दामों पर स्टांप बेचने वालों में लगाम लगाकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। स्टांप पेपर ऑनलाइन भी लिया जा सकता है। स्टांप पेपर विक्रेताओं की फाइल रिन्यू पर कार्य चल रहा है।
प्रमोद चहल, डीआरओ,
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उपमंडल मुख्यालय पर रोजाना 20 से 25 दस्तावेज, जिसमें विक्रय पत्र, हक त्यागपत्र, दान पत्र, समर्पण सहित कई प्रकार के दस्तावेज है, जिनका पंजीयन होता है और यह सारे ही दस्तावेज स्टाम्प पर निष्पादित होते हैं इसके अलावा शपथ पत्र के लिए भी स्टाम्प की जरूरत पड़ती है। इस कारण स्टांप विक्रेताओं के साथ लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तहसील कार्यालय में स्थायी तौर पर वेंडर नहीं है, जबकि अस्थायी तौर पर स्टांप बेचने वालों के लाइसेंस रिन्यू नहीं किए जा रहे हैं। 30 जून को लाइसेंस का समय पूरा हो गया है जिसके बाद अब कोई वेंडर नहीं है। ऐसे में कुछ बाहरी लोग जरूरतमंद लोगों से मनचाही कीमत वसूल रहे हैं। स्टांप की कमी इन दिनों दलालों की कमाई का जरिया बनी हुई है। कम मूल्य के स्टांप के तहसील कार्यालय में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
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अटक रहे लोगों के काम
जाति प्रमाण पत्र, शपथ पत्र, सहमति पत्र, रजिस्ट्री, नामांत्रण और न्यायालयीन मामलों सहित अन्य बहुत कामों में स्टांप का उपयोग किया जाता है। तहसील में लंबे समय से 10, 20, 50 और 100 रुपये मूल्य के स्टांप का टोटा बना हुआ है। लोग स्टांप के लिए तहसील प्रांगण में स्टांप वेंडर के चक्कर लगा-लगाकर परेशान हैं।
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आमजन की समस्या का समाधान करवाया जाएगा। वेंडर लाइसेंस पर सरकारी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी, जबकि महंगे दामों पर स्टांप बेचने वालों में लगाम लगाकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। स्टांप पेपर ऑनलाइन भी लिया जा सकता है। स्टांप पेपर विक्रेताओं की फाइल रिन्यू पर कार्य चल रहा है।
प्रमोद चहल, डीआरओ,