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जाट समाज का आर्थिक और राजनीतिक बहिष्कार करेंगे
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो
Updated Mon, 29 Feb 2016 01:33 AM IST
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उपद्रव की जांच के लिए जो भी कमेटी बने, उसमें कोई भी जाट अधिकारी नहीं होना चाहिए। हम जाटों का राजनीतिक और आर्थिक आधार पर बहिष्कार करते हैं। रविवार को हुई महापंचायत में शामिल 35 बिरादरी के लोगों ने अपनी मांग रखते हुए यह फैसला लिया। महापंचायत में बड़ी घोषणा यह भी की गई कि आरक्षण के नाम पर दंगे में शामिल सरकार के मंत्रियों व विपक्ष के नेताओं को आने वाले समय में 35 बिरादरी सबक सिखाएगी।
महापंचायत में यह भी फैसला लिया गया कि अगर सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाने में देरी करती है तो महापंचायत दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी और जरूरत पड़ी तो संसद का घेराव भी करेगी। महापंचायत में कहा गया कि समुदाय विशेष को गैर जाट मुख्यमंत्री सहन नहीं हो रहा है। पाटौदा में हुई 35 बिरादरी की इस महापंचायत की अध्यक्षता श्रीपाल जिलेदार ने की, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। प्रस्ताव पारित कर आरक्षण की आड़ में हुई लूटपाट व आगजनी की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
राजपूत सभा के नेता वेदपाल तंवर ने कहा कि एक समुदाय के लोगों ने आरक्षण के नाम पर जिस प्रकार से आतंक का माहौल बनाया और लूटपाट की, उससे पूरे प्रदेश में भय का वातावरण बन गया है। दंगाइयों ने सरेआम दुकानों व मकानों को लूटा और उसमें आग लगाई, उससे साबित होता है कि आरक्षण की आड़ में कोई खतरनाक षड्यंत्र रचा गया था। लूटपाट व आगजनी के दौरान प्रशासन व पुलिस शहर से नदारद थी। उन्होंने कहा कि जब आंदोलन जाट कर रहे थे तो लूटपाट व आगजनी करने वाले लोग कौन थे।
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वक्ताओं ने कहा कि आज के बदलते माहौल में समय आ गया है कि 35 बिरादरी के लोगों को एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं फिर से न हो इसके लिए एक मजबूत मंच तैयार करना होगा। महापंचायत ने मांग किया कि आरक्षण के दंगे के पीड़ितों को जल्द मुआवजा देकर उनके परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाए। इन दंगों में शामिल शासन व प्रशासन के व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। इस मौके पर मानसिंह यादव, सतपाल चौहान, देव प्रकाश कोका, रविन्द्र कुलाना, दीपक उर्फ सोनू, दिनेश नंबरदार, बब्लू खेड़ी, अजय यादव, गोधु सरपंच, हनुमंत यादव, मनीष यादव, जय भगवान रतनथल, मुकेश नंबरदार शामिल रहे।
महापंचायत में यह भी फैसला लिया गया कि अगर सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाने में देरी करती है तो महापंचायत दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी और जरूरत पड़ी तो संसद का घेराव भी करेगी। महापंचायत में कहा गया कि समुदाय विशेष को गैर जाट मुख्यमंत्री सहन नहीं हो रहा है। पाटौदा में हुई 35 बिरादरी की इस महापंचायत की अध्यक्षता श्रीपाल जिलेदार ने की, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। प्रस्ताव पारित कर आरक्षण की आड़ में हुई लूटपाट व आगजनी की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
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राजपूत सभा के नेता वेदपाल तंवर ने कहा कि एक समुदाय के लोगों ने आरक्षण के नाम पर जिस प्रकार से आतंक का माहौल बनाया और लूटपाट की, उससे पूरे प्रदेश में भय का वातावरण बन गया है। दंगाइयों ने सरेआम दुकानों व मकानों को लूटा और उसमें आग लगाई, उससे साबित होता है कि आरक्षण की आड़ में कोई खतरनाक षड्यंत्र रचा गया था। लूटपाट व आगजनी के दौरान प्रशासन व पुलिस शहर से नदारद थी। उन्होंने कहा कि जब आंदोलन जाट कर रहे थे तो लूटपाट व आगजनी करने वाले लोग कौन थे।
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वक्ताओं ने कहा कि आज के बदलते माहौल में समय आ गया है कि 35 बिरादरी के लोगों को एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं फिर से न हो इसके लिए एक मजबूत मंच तैयार करना होगा। महापंचायत ने मांग किया कि आरक्षण के दंगे के पीड़ितों को जल्द मुआवजा देकर उनके परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाए। इन दंगों में शामिल शासन व प्रशासन के व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। इस मौके पर मानसिंह यादव, सतपाल चौहान, देव प्रकाश कोका, रविन्द्र कुलाना, दीपक उर्फ सोनू, दिनेश नंबरदार, बब्लू खेड़ी, अजय यादव, गोधु सरपंच, हनुमंत यादव, मनीष यादव, जय भगवान रतनथल, मुकेश नंबरदार शामिल रहे।