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दो बैंकों को लगाया 17 लाख का चूना

Tue, 26 Aug 2014 12:34 AM IST
jhjhar, Bhadurgarh
jhjhar, Bhadurgarh Updated Tue, 26 Aug 2014 12:34 AM IST
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शहर में लंबे समय से सेक्टर-6 में रह रहे एक व्यक्ति ने 2 बैंकों को 17 लाख का चूना लगा दिया। आरोपियों का अब तक कोई अता-पता नहीं है। वहीं बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार सेक्टर-6 में लंबे समय से अखिल शर्मा नाम का एक व्यक्ति परिवार के साथ किराये पर रह रहा था। उसने फर्जी आईडी व रिहायशी प्रमाण पत्र के अलावा अन्य दस्तावेज बनवाकर शहर के आंध्रा बैंक व पंजाब नेशनल बैंक में गाड़ी के ऋण के लिए आवेदन किया।

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 पीएनबी ने अखिल को 10 लाख का डीडी गाड़ी खरीदने के लिए संबंधित कंपनी के नाम दे दिया। जिसे अखिल ने सिंडीकेट बैंक से कैश करवा लिया। बताया जा रहा है कि अखिल ने फर्जी कंपनी के नाम यह डीडी बनवाया था। अजीत ऑटो मोबाइल के नाम से यह डीडी नांगलोई के सिंडीकेट बैंक से कैश करवाया गया। इसके अलावा आंध्रा बैंक से अखिल ने इसी तरह फर्जी कागजातों के आधार पर 7 लाख का डीडी लेकर एक अन्य फर्जी ऑटो मोबाइल कंपनी के खाते में जमा करवाकर कैश करवा लिया।
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 फिलहाल अखिल का कोई अता-पता नहीं है। जांच में सामने आया है कि अखिल किराए पर सेक्टर-6 में रहता था। जिन खातों से उसने डीडी कैश करवाए वे खाते भी फर्जी पाए गए। जिन दस्तावेजों के आधार पर खाते खुलवाए गए वे भी फर्जी मिले हैं। अखिल का मोबाइल नंबर भी अब बंद है। जांच में पता चला है कि मोबाइल की आईडी भी गलत है।
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बैंकों के प्रबंधकों ने लापरवाही
इस सारे प्रकरण में बैंक अधिकारियों की कार्यशैली भी संदेह के घेरे में है। नियमों के मुताबिक गाड़ी के लोन में यह अनिवार्य है कि डीडी बन जाने के बाद संबंधित बैंक का कर्मचारी गाड़ी के शोरूम पर जाकर खुद गाड़ी लोन धारक को परचेज करवाता है। साथ ही बैंक की लोन फाइल में एक विशेष कागज पर गाड़ी के इंजन नंबर व चेसिस नंबर लिए जाते हैं।

 ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो। मगर अखिल के मामले में दोनों बैंकों के प्रबंधकों ने ऐसा नहीं किया। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं बैंक अधिकारियों ने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए तो ऐसा नहीं किया। बैंक सूत्रों के मुताबिक दोनों बैंकों के मैनेजरों ने लापरवाही बरती। इसके अलावा किराए पर रहने वाले किसी भी शख्स को गाड़ी व मकान का लोन नहीं मिलता है।


 रजिस्ट्री की फोटो कापी बैंक में जमा होने के बाद लोन दिया जाता है। इस मामले में भी बैंक मैनेजरों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मामले के जांच अधिकारी धर्मवीर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। बैंक अधिकारियों से तहकीकात में मदद मांगी गई है।

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