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Jhajjar-Bahadurgarh News: दशलक्षण महापर्व पर उत्तम तप धर्म दिवस मनाया गया
Tue, 22 Sep 2026 07:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 22 Sep 2026 07:04 PM IST
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-फोटो 81 : श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पूजा अर्चना श्रद्धालु। स्रोत समाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। दशलक्षण पर्युषण महापर्व के सातवें दिन मंगलवार को शहर के सभी जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म दिवस मनाया गया। पद्म प्रभु श्री दिगंबर जैन मंदिर, महावीर दिगंबर जैन मंदिर और अनाजमंडी पांडूशिला सहित कई मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। पूजन प्रक्रिया पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। अग्रवाल कॉलोनी स्थित जैन मंदिर में महिलाओं ने 48 दीपों से भक्ति भाव से भक्ताम्बर का पाठ करते हुए आरती भी की।
सकल जैन समाज बहादुरगढ़ के महासचिव अरविंद जैन ने बताया कि मंगलवार को उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। अनाजमंडी पांडूशिला समिति के प्रधान सुनील जैन ने भी इसकी जानकारी दी। जैन मंदिरों में धर्माचार्यों ने प्रवचन सुनाए। उन्होंने कहा कि कल्याण के लिए तप करना अत्यंत आवश्यक है। तप करने वाला मनुष्य अपने जीवन को निर्मल बना सकता है। मानव का कल्याण तप से ही संभव है। जीवन को पावन और मंगलमय बनाने के लिए त्याग परमावश्यक है।
धर्माचार्यों ने बताया कि हमारी संस्कृति में भोग का नहीं, बल्कि योग का महत्व है। संग्रह के बजाय त्याग को प्राथमिकता दी जाती है। मनुष्य की प्रतिष्ठा उसकी त्याग वृत्ति से बनती है। लोभी व्यक्ति की मानसिकता अपवित्र होती है। ऐसा व्यक्ति कभी भी महानता को प्राप्त नहीं कर सकता। दूसरों की भलाई के लिए अपनी वस्तु को छोड़ देना ही सच्चा त्याग है।
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बहादुरगढ़। दशलक्षण पर्युषण महापर्व के सातवें दिन मंगलवार को शहर के सभी जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म दिवस मनाया गया। पद्म प्रभु श्री दिगंबर जैन मंदिर, महावीर दिगंबर जैन मंदिर और अनाजमंडी पांडूशिला सहित कई मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। पूजन प्रक्रिया पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। अग्रवाल कॉलोनी स्थित जैन मंदिर में महिलाओं ने 48 दीपों से भक्ति भाव से भक्ताम्बर का पाठ करते हुए आरती भी की।
सकल जैन समाज बहादुरगढ़ के महासचिव अरविंद जैन ने बताया कि मंगलवार को उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। अनाजमंडी पांडूशिला समिति के प्रधान सुनील जैन ने भी इसकी जानकारी दी। जैन मंदिरों में धर्माचार्यों ने प्रवचन सुनाए। उन्होंने कहा कि कल्याण के लिए तप करना अत्यंत आवश्यक है। तप करने वाला मनुष्य अपने जीवन को निर्मल बना सकता है। मानव का कल्याण तप से ही संभव है। जीवन को पावन और मंगलमय बनाने के लिए त्याग परमावश्यक है।
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धर्माचार्यों ने बताया कि हमारी संस्कृति में भोग का नहीं, बल्कि योग का महत्व है। संग्रह के बजाय त्याग को प्राथमिकता दी जाती है। मनुष्य की प्रतिष्ठा उसकी त्याग वृत्ति से बनती है। लोभी व्यक्ति की मानसिकता अपवित्र होती है। ऐसा व्यक्ति कभी भी महानता को प्राप्त नहीं कर सकता। दूसरों की भलाई के लिए अपनी वस्तु को छोड़ देना ही सच्चा त्याग है।
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