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शिक्षा के साथ ही चरित्र निर्माण पर बल दें शिक्षक : डीसी
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झज्जर। गांव बिरोहड़ के राजकीय महाविद्यालय में आयोजित सेमीनार में मुख्य अतिथि के तौर पर उपायुक्त शक्ति सिंह ने कहा कि शिक्षा के साथ साथ संस्कारों का विद्यार्थी जीवन में बड़ा महत्व है। ऐसे में शिक्षक विद्यार्थियों को बेहतरीन शिक्षा प्रदान करते हुए चरित्र निर्माण पर बल दें।
डीसी शक्ति सिंह शनिवार को गांव बिरहोड़ स्थित राजकीय महाविद्यालय में उच्चतर शिक्षा विभाग के तत्वावधान में भारत का अन्वेषण: तब और अब विषय पर आयोजित नेशनल सेमिनार के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने प्राचार्य डॉ. अनिता रानी की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का विधिवत शुभारंभ किया। इस बीच मुख्य अतिथि ने सेमिनार के सोविनियर का लोकार्पण भी किया।
डीसी शक्ति सिंह ने कहा कि भारत वर्ष में प्राचीन समय से लेकर अब तक हमारी शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ और मजबूत है। प्राचीन समय में गुरुकुल शिक्षा का केंद्र होते थे, अब समय के बदलाव के साथ ही आज गुरुकुलों का स्थान आधुनिक शिक्षण संस्थानों ने ले लिया है। आज हमें शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करनी होगीञ जिससे विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास संभव हो सके। उन्होंने कहा कि देश के विकास में शिक्षा का अहम योगदान है, ब्रिटिश शासकों ने भारत की शिक्षा प्रणाली को योजनाबद्ध तरीके से खराब करने की पूरी कोशिश की थी, मगर देश की मजबूत शिक्षा व्यवस्था के चलते, वो अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। उन्होंने गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए शोध की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि शोध के जरिये हो वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अच्छी शिक्षा के माध्यम से केवल पढ़े लिखे नागरिक ही तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षित करके संस्कारवान बनाना है। इस बीच प्राचार्य डॉ अनिता फोगाट ने मुख्य अतिथि शक्ति सिंह का स्वागत करते हुए कालेज में आयोजित होने वाली गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश में स्थापित इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों को न केवल शिक्षा के साथ साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कालेज परिवार की ओर से डीसी शक्ति सिंह और पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ जीसी चौहान को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान दिया। सेमिनार के संयोजक और कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता सुनश्चयन प्रकोष्ठ प्रभारी. डॉ अमरदीप ने सेमिनार के शुभारंभ सत्र के दौरान सभी मुख्य मेहमानों और वक्ताओं को विषय वस्तु से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों, शोधकर्ताओं को आधुनिक शिक्षा पद्धति से अवगत कराना है। इस अवसर पर सेमिनार के सहसंयोजक डॉ सुरेंद्र सिंह, संगठन सचिव डॉ प्रदीप कुंडू, डॉ फूल कुमार, डॉ सुनील कुमार सहित आदि वक्ताओं ने सेमिनार में भाग लिया।
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डीसी शक्ति सिंह शनिवार को गांव बिरहोड़ स्थित राजकीय महाविद्यालय में उच्चतर शिक्षा विभाग के तत्वावधान में भारत का अन्वेषण: तब और अब विषय पर आयोजित नेशनल सेमिनार के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने प्राचार्य डॉ. अनिता रानी की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का विधिवत शुभारंभ किया। इस बीच मुख्य अतिथि ने सेमिनार के सोविनियर का लोकार्पण भी किया।
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डीसी शक्ति सिंह ने कहा कि भारत वर्ष में प्राचीन समय से लेकर अब तक हमारी शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ और मजबूत है। प्राचीन समय में गुरुकुल शिक्षा का केंद्र होते थे, अब समय के बदलाव के साथ ही आज गुरुकुलों का स्थान आधुनिक शिक्षण संस्थानों ने ले लिया है। आज हमें शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करनी होगीञ जिससे विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास संभव हो सके। उन्होंने कहा कि देश के विकास में शिक्षा का अहम योगदान है, ब्रिटिश शासकों ने भारत की शिक्षा प्रणाली को योजनाबद्ध तरीके से खराब करने की पूरी कोशिश की थी, मगर देश की मजबूत शिक्षा व्यवस्था के चलते, वो अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। उन्होंने गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए शोध की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि शोध के जरिये हो वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अच्छी शिक्षा के माध्यम से केवल पढ़े लिखे नागरिक ही तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षित करके संस्कारवान बनाना है। इस बीच प्राचार्य डॉ अनिता फोगाट ने मुख्य अतिथि शक्ति सिंह का स्वागत करते हुए कालेज में आयोजित होने वाली गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश में स्थापित इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों को न केवल शिक्षा के साथ साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कालेज परिवार की ओर से डीसी शक्ति सिंह और पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ जीसी चौहान को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान दिया। सेमिनार के संयोजक और कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता सुनश्चयन प्रकोष्ठ प्रभारी. डॉ अमरदीप ने सेमिनार के शुभारंभ सत्र के दौरान सभी मुख्य मेहमानों और वक्ताओं को विषय वस्तु से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों, शोधकर्ताओं को आधुनिक शिक्षा पद्धति से अवगत कराना है। इस अवसर पर सेमिनार के सहसंयोजक डॉ सुरेंद्र सिंह, संगठन सचिव डॉ प्रदीप कुंडू, डॉ फूल कुमार, डॉ सुनील कुमार सहित आदि वक्ताओं ने सेमिनार में भाग लिया।
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