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Jhajjar-Bahadurgarh News: गेहूं को ठंड से बचाने के लिए यूरिया खाद छिड़काव जरूरी
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फोटो नंबर 71: गेहूं में यूरिया छिड़काव के बाद सिंचाई कार्यकर्ता किसान।
बादली। दिसंबर माह का आखिरी सप्ताह चल रहा है और ठंड भी अपने चरम पर है। ऐसे में किसानों को गेहूं की फसल को ठंड से बचाने के लिए यूरिया खाद का प्रयोग करना चाहिए। 30 दिन से ज्यादा की फसल में यूरिया के साथ पोटाश और जिंक के छिड़काव से गेहूं की कल्ले ज्यादा निकलती है और पौधे मजबूत होते हैं।
किसान हरपाल, गौरव, अमित और जगबीर का कहना है कि अचानक सर्दी बढ़ने से गेहूं की देखभाल में जुट गए हैं। एक ओर जहां सिंचाई कार्य पूरा होने को है। वहीं यूरिया खाद का छिड़काव तेजी के साथ किया जा रहा है।
कृषि अधिकारी एवं एसडीओ सुनील कौशिक ने किसानों को बताया कि शुरुआती दिनों में सही खाद का सही समय पर उपयोग करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। एक पौधे से 200 कल्ले तक बनाने के लिए बुवाई के 25 से 35 दिन में आने वाली क्राउन रूट इनिशिएशन (सीआरआई ) स्टेज पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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पहली खाद के रूप में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन सबसे जरूरी है। यूरिया पौधे में हरियाली लाता है जिससे पौधा अपना भोजन अच्छी तरह से बना पाता है और यही ऊर्जा सीधे कल्ले बनाने के काम आती है।
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किसान हरपाल, गौरव, अमित और जगबीर का कहना है कि अचानक सर्दी बढ़ने से गेहूं की देखभाल में जुट गए हैं। एक ओर जहां सिंचाई कार्य पूरा होने को है। वहीं यूरिया खाद का छिड़काव तेजी के साथ किया जा रहा है।
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कृषि अधिकारी एवं एसडीओ सुनील कौशिक ने किसानों को बताया कि शुरुआती दिनों में सही खाद का सही समय पर उपयोग करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। एक पौधे से 200 कल्ले तक बनाने के लिए बुवाई के 25 से 35 दिन में आने वाली क्राउन रूट इनिशिएशन (सीआरआई ) स्टेज पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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पहली खाद के रूप में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन सबसे जरूरी है। यूरिया पौधे में हरियाली लाता है जिससे पौधा अपना भोजन अच्छी तरह से बना पाता है और यही ऊर्जा सीधे कल्ले बनाने के काम आती है।