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Jhajjar-Bahadurgarh News: 77.9 प्रतिशत किशोरों की राय...माता-पिता की संपत्ति पर मिले बेटा-बेटी दोनों को अधिकार

Sun, 19 Nov 2023 01:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 19 Nov 2023 01:34 AM IST
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Shaka of Bupnia, absconding for one and a half years, arrested
-75.3 किशोर मानते हैं महिला-पुरुष दोनों को पैसा कमाना चाहिए
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-63.9 प्रतिशत का मानना दोनों को करनी चाहिए घर की सफाई

-ब्रेकथ्रू संस्था ने 6 जिलों सोनीपत, रोहतक, करनाल, गुरुग्राम, झज्जर, पानीपत में किशोर-किशोरी सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत किया सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। युवा पीढ़ी की सोच बदल रही है। 77.9 प्रतिशत किशोर मानते हैं कि माता-पिता की संपत्ति पर महिला-पुरुष दोनों का अधिकार होना चाहिए। 75.3 प्रतिशत किशोरों का मानना है कि महिला-पुरुष दोनों को ही पैसा कमाना चाहिए और 63.9 प्रतिशत मानना है कि घर की सफाई व काम में दोनों का ही सहयोग होना चाहिए।
यह खुलासा प्रदेश सरकार की ओर से नामित संस्था ब्रेकथ्रू की ओर से प्रदेश के 6 जिलों सोनीपत, रोहतक, करनाल, गुरुग्राम, झज्जर और पानीपत में किशोर-किशोरी सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत किए गए सर्वे में हुआ है। यह सर्वे जुलाई में किया गया था, जिसका परिणाम अब जारी किया गया है। यह डाटा किशोर उनके माता-पिता, युवाओं, किशोरों के साथ 48 समूह चर्चाओं, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा और पंचायतीराज संस्थान के सदस्यों जैसे अन्य प्रमुख लोगों के साथ 18 साक्षात्कारों के बाद लिया है। कुल 1263 किशोरों और 186 शिक्षकों से डाटा एकत्र किया गया। सर्वे में सामने आया है कि सभी 6 जिलों के 81.3 प्रतिशत किशोरों का यह मानना है कि लड़कियों को शिक्षित करना आवश्यक है।
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शिक्षा ही दीर्घकालिक बदलाव लाने में सक्षम है। 85 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाता इस कथन से सहमत नहीं थे कि एक लड़की को उच्च अध्ययन नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसके लिए शादी करना मुश्किल होगा। लगभग 88 प्रतिशत किशोर इस कथन से सहमत हैं कि एक लड़की को उतना ही फुर्सत का समय मिलना चाहिए, जितना लड़कों को मिलता है। 60 से 80 प्रतिशत किशोर इस बात से सहमत नहीं थे कि महिलाओं को परिवार के पुरुषों के खाने के बाद ही खाना चाहिए। इस कथन से सहमत किशोरों का अनुपात सबसे अधिक सोनीपत और उसके बाद पानीपत में रहा। लगभग 60 प्रतिशत किशोर इस कथन से असहमत थे कि एक लड़की को स्कूल के अंदर या बाहर लड़कों से लंबे समय तक बात नहीं करनी चाहिए। हालांकि सोनीपत में 50 प्रतिशत से अधिक किशोर इस कथन से सहमत थे। इसी प्रकार लगभग 25 प्रतिशत किशोर इस बात से सहमत थे कि पारिवारिक शांति बनाए रखने के लिए महिलाओं को घरेलू हिंसा सहन करनी चाहिए। यदि हम जिलेवार तुलना करें तो पानीपत के लगभग 40 प्रतिशत किशोर इस कथन से सहमत हैं, जो अन्य जिलों की तुलना में अधिक है। 17.7 प्रतिशत किशोर इस कथन से सहमत थे कि छेड़छाड़ या उत्पीड़न की समस्याओं को रोकने के लिए लड़कियों की जल्दी शादी कर देनी चाहिए। बयान से असहमत किशोरों का अनुपात झज्जर में सबसे ज्यादा था।
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सर्वे में यह भी आया सामने
अंतर-लिंगीय संपर्क की सूचना देने वाले किशोरों का अनुपात
गुरुग्राम-51.20 प्रतिशत

पानीपत-36.80 प्रतिशत

सोनीपत-55.90 प्रतिशत

करनाल-50.20 प्रतिशत

झज्जर-52.60 प्रतिशत

रोहतक-49.80 प्रतिशत




किशोरों का बड़ों के साथ किसी विषय पर चर्चा का अनुपात

विषय हमेशा कभी-कभी कभी नहीं

करिअर लक्ष्य 54 39 7

शिक्षा आकांक्षा 61 32 6

फुर्सत के समय 25 63 12

अकेले या दोस्तों के साथ बाहर जाना 28 58 15

जीवनसाथी का चयन 6 31 63

शादी की उम्र 14 39 47


पुरुष और महिला दोनों की जिम्मेदारी...

-बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल-76.1 प्रतिशत
-खरीदारी के लिए बाजार जाना-69.2 प्रतिशत
-खाना पकाना-63.7 प्रतिशत
-प्रमुख घरेलू निर्णय लेना-59.3 प्रतिशत
-बर्तन धोना और कपड़े धोना-58.1 प्रतिशत


सर्वे मूल्यांकन से हमें पता चल रहा है कि लड़कियों की उच्च शिक्षा के लिए समुदाय भी अब खुल के समर्थन कर रहा है और अब शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य सिर्फ शादी करना नहीं है। लड़कियों के उच्च शिक्षा प्राप्त करने से उनकी कम उम्र में शादी की संभावना कम हो जाती है और वे अपने जीवन में वो लैंगिक भेदभाव और हिंसा से लड़ने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो जाती हैं।
स्वाति चक्रवर्ती, निदेशक अनुसंधान एवं मूल्यांकन, ब्रेकथ्रू संस्था
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