फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Relatives said- Deepak's age is very short, more opportunities will be available in the coming time

परिजन बोले, दीपक की उम्र बेहद कम, आने वाले समय में और भी मिलेंगे मौके

Fri, 06 Aug 2021 12:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 12:09 AM IST
विज्ञापन
Relatives said- Deepak's age is very short, more opportunities will be available in the coming time
अपने घर में टीवी पर अपने बेटे दीपक की कुश्ती देखते सुभाष पूनिया। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
गांव छारा के दीपक पूनिया टोक्यो ओलंपिक के 86 किलोग्राम भार वर्ग के फ्रीस्टाइल रेसलिंग मुकाबले में आखिरी चंद सेकंडों में कांस्य पदक से चूक गए। दीपक की इस हार से परिवार को मायूसी तो हुई है। लेकिन उनके हौसले अब भी बुलंद हैं।
विज्ञापन

ये दीपक की हार नहीं
दीपक का मुकाबला देखने के लिए घर में बड़ी टीवी स्क्रीन पर परिजनों और ग्रामीणों की नजरें टिकी हुई थीं। शुरुआत में दीपक ने अंक हासिल किए तो सबके चेहरे खिल उठे थे। बाद में मैच के अंतिम चंद सेकंड में दीपक हार गए। लेकिन उनकी हार के बावजूद छारा गांव के लोगों के हौसले नहीं टूटे हैं। पिता सुभाष ने कहा कि दीपक की उम्र अभी बेहद कम है। आगे आने वाले समय में उसे ओलंपिक खेलने के और भी मौके मिलेंगे। ये कोई बड़ी हार नहीं है। उन्होंने कहा कि दीपक कम से कम ओलंपिक के अनुभव लेकर तो लौटेगा। बेटे की इस हार का भी हम स्वागत करेंगे।
विज्ञापन

अटैकिंग खेलते तो रहता बेहतर
दीपक के घर मैच देख आए ग्रामीण बबलू प्रधान ने कहा कि अंतिम समय में दीपक ने प्वाइंट खोए हैं। उन्हें डिफेंसिव होने के बजाय अटैकिंग मोड में ही रहना चाहिए था। मगर फिर भी दीपक ने गांव का नाम विश्व स्तर पर चमकाया है। ऐसे में दीपक की हार नहीं हुई है। आगे आने वाले समय में और भी बहुत सारी प्रतियोगिताएं होनी है। जहां दीपक अपने देश का नाम रोशन करेगा और एक दिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

अभी कई मौके और
दीपक के कोच आर्य वीरेंद्र ने कहा कि दीपक बहुत अच्छा खिलाड़ी है। ये उसका पहला ओलंपिक था। इसके बावजूद उसने अपने भार वर्ग में दुनिया के कई चुनिंदा खिलाड़ियों को हराकर सेमीफाइनल तक प्रवेश किया। ओलंपिक में 32 साल की उम्र तक लड़ने का मौका मिलता है और अभी दीपक की आयु केवल 22 साल है। इस तरह उसको ओलंपिक में खेलने के अभी कई और मौके मिलेंगे।

बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवान दीपक पूनिया 86 किलोग्राम वेट कैटेगरी का ब्रॉन्ज मेडल का मुकाबला हार गए। सैन मैरिनों के माइल्स अमीन ने उन्हें 4-2 से हरा दिया। पांच मिनट 40 सेकंड तक दीपक 2-1 से आगे थे। लेकिन दूसरे बाउट में आखिरी 20 सेकेंड में माइल्स दीपक पर हावी हो गए और मैच को 4-2 से जीत लिया। सेमीफाइनल में दीपक पूनिया को अमेरिका के डेविड मौरिस टेलर से हार का सामना करना पड़ा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed