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Jhajjar-Bahadurgarh News: पुत्रदा एकादशी व्रत आज, मां लक्ष्मी की पूजा करने से मिलता है सुख
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संवाद न्यूज एजेंसी
बादली। आज सावन माह की पुत्रदा एकादशी और मंगला गौरी व्रत का संयोग है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार भक्तों को मंगला गौरी व्रत का भी पुण्य मिलेगा। अखंड सौभाग्य के साथ ही वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति इस को रखने से होती है। इस दिन रवि और भद्रावास योग भी रहेगा। पंडित अमिताचार्य कौशिक ने बताया कि रवि योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से आरोग्य, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार साल में दो पुत्रदा एकदशी आती हैं। एक पौष माह में दूसरा सावन महीने में पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन एकादशी व्रत रखकर अपने संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाती है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से संतान संबंधी समस्याओं का समाधान होता है।
पुत्रदा एकादशी का व्रत एक सच्चे भाव और संयम के साथ किया जाए, तो भगवान विष्णु की कृपा से मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। एकादशी हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसे हर महीने की ग्यारहवीं तिथि पर रखा जाता है।
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इस दिन सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। इसके प्रभाव से साधक की सभी इच्छाएं पूरी और जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं। दरअसल, एकादशी पर तुलसी पूजन का विधान है। यही नहीं संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी महिलाओं को मिलता है।
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बादली। आज सावन माह की पुत्रदा एकादशी और मंगला गौरी व्रत का संयोग है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार भक्तों को मंगला गौरी व्रत का भी पुण्य मिलेगा। अखंड सौभाग्य के साथ ही वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति इस को रखने से होती है। इस दिन रवि और भद्रावास योग भी रहेगा। पंडित अमिताचार्य कौशिक ने बताया कि रवि योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से आरोग्य, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार साल में दो पुत्रदा एकदशी आती हैं। एक पौष माह में दूसरा सावन महीने में पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन एकादशी व्रत रखकर अपने संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाती है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से संतान संबंधी समस्याओं का समाधान होता है।
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पुत्रदा एकादशी का व्रत एक सच्चे भाव और संयम के साथ किया जाए, तो भगवान विष्णु की कृपा से मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। एकादशी हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसे हर महीने की ग्यारहवीं तिथि पर रखा जाता है।
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इस दिन सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। इसके प्रभाव से साधक की सभी इच्छाएं पूरी और जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं। दरअसल, एकादशी पर तुलसी पूजन का विधान है। यही नहीं संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी महिलाओं को मिलता है।