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Jhajjar-Bahadurgarh News: पोलीबैग व पाऊच उद्योग का 50 प्रतिशत गिरा उत्पादन, डीजल बर्नर लगाने को मजबूर उद्यमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2026 02:21 AM IST
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Polybag and pouch industries have seen a 50% drop in production, forcing entrepreneurs to install diesel burners.
फोटो-55: बहादुरगढ़ के गणपति धाम स्थित एक फैक्टरी के बाहर डीजल वितरण के लिए पहुंचा टैंकर। संवाद
बहादुरगढ़। औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे प्लास्टिक पोली बैग(बीओपीपी) बनाने वाली इकाइयों ने अपना 50 प्रतिशत तक उत्पादन कम कर दिया है। वहीं गैस का स्टॉक भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। ऐसे में गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण उद्यमियों ने डीजल का सहारा लेना शुरू किया है। इसके लिए लाखों रुपये के बर्नर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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बहादुरगढ़ में पोली बैग व पाऊच बनाने की करीब 30 से ज्यादा फैक्टरियां हैं। करीब 80 से 100 श्रमिक हर फैक्टरी में काम करते हैं। यहां पर खाद्य पदार्थों के साथ-साथ फर्टिलाइजर की पैकिंग का सामान बनता है।
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शहर की गणपति धाम स्थित सिरिंक पैक कंपनी के मालिक सोनू ने बताया कि एलपीजी की आपूर्ति नहीं होने से उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। ऐसे में कामकाज को जारी रखने के लिए डीजल बर्नर लगाना मजबूरी बन गया है। पहले भी ये फैक्टरियां डीजल पर चलती थी लेकिन प्रदूषण बोर्ड के नियमों की वजह से एलपीजी का प्रयोग करना पड़ रहा है।
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मगर अब एलपीजी की कमी हुई तो डीजल पर दोबारा से आना पड़ रहा है। यह विकल्प काफी महंगा साबित हो रहा है। हमारी फैक्टरी में बर्नर बदलने के लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपये का आर्डर दिया है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उत्पादन में भी कमी आई है। सोनू ने बताया कि फैक्टरी में 425 किलो के 5 सिलिंडर ले रखे थे। अब दो-तीन दिन का ही स्टॉक है।

उधर, एमआईई व गणपति धाम स्थित सन पोली बैग के मालिक गणेश गुप्ता ने बताया कि एलपीजी की कमी हो रही है। फरीदाबाद से सप्लाई आती थी जो अब बंद है। एक-दो दिन का स्टॉक है। उनकी फैक्टरी में फर्टिलाइजर के बैग और पाऊच बनते हैं। हर रोज करीब 7-8 टन माल बनता था। अब मजबूरी में 50 प्रतिशत उत्पादन कम हो गया है। फैक्टरियों में बैग की प्रिंटिंग सुखाने और एडेसिव प्रयोग के लिए ब्लोअर चलाने पड़ते हैं। ऐसे में अब इन्हें चलाने के लिए डीजल का प्रयोग करना पड़ेगा।


यदि जल्द ही एलपीजी की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उद्योगों की स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि औद्योगिक इकाइयों के लिए एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और उद्योगों को अतिरिक्त खर्च से राहत मिल सके।
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