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काले कपड़े पहनकर जाटों ने मनाया काला दिवस

Mon, 27 Feb 2017 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर Updated Mon, 27 Feb 2017 12:03 AM IST
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Observed black day by wearing black clothes Jats, jhajjar news
Jat reservation protest's black day
झज्जर।
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जाट संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तावित काला दिवस पर रविवार को भारी संख्या में जाट समुदाय के लोग पहुंचे। काला दिवस के दौरान जहां भी नजर गई, वहां पर सबकुछ काला ही काला नजर आ रहा था। वहीं धरने के दौरान क्षेत्र की बड़ी खाप दलाल-84 के प्रधान भूपसिंह दलाल ने कहा कि अभी तो जाटों ने सिर्फ प्रदेश स्तर पर अपनी संख्या दिखाई है, केंद्र सरकार को जाटों की ताकत का अहसास उस दिन होगा जब जाटों के ट्रैक्टर दिल्ली की तरफ बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर से करीब 5500 ट्रैक्टर आने वाले जंतर-मंतर कूच में हिस्सा लेंगे। इसमें सबसे अधिक संख्या दलाल खाप के ट्रैक्टरों की रहेेगी। उन्होंने कहा कि सरकार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है लेकिन वो सरकार को बता देना चाहते हैं कि अगर सरकार के बचे हुए दिन तक धरना जारी रखना पड़ा तो वे इसे जारी रखेेंगे और चुनाव में इस सरकार का तख्तापलट करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार उन 18 लोगों पर आज तक मुकदमे दर्ज करने से कतरा रही है, जिन्होंने छोटूराम धर्मशाला में नंगा नाच किया था, वहीं जाटों के बच्चों से मुकदमे हटाने से पीछे हट रही है। दलाल ने कहा कि सरकार को सभी पक्ष एक नजर से देखने चाहिए, जो कि सरकार देख नहीं रही है।

पटेेल समुदाय ने दिया जाटों को समर्थन
गुजरात मेे चले पटेल आंदोलन की महिला नेता वंदना पटेल ने झज्जर पहुंचकर जाटों की मांगों का समर्थन करते हुए उन्हें आश्वास्त किया कि पटेल समुदाय जाटों के साथ है। वंदना ने मंच से कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उनके नेता हार्दिक पटेल के द्वारा पटेल समुदाय के अन्य वरिष्ठ नेता हरियाणा के धरनों पर भेजे जाएंगे। वहीं वंदना पटेल ने धरने की अध्यक्षता कर रहे जिला प्रधान जितेंद्र धनखड़ की हार्दिक पटेल से फोन पर भी बातचीत करवाई। इसमें हार्दिक पटेल ने जाट समुदाय को भरपूर समर्थन का आश्वासन दिया।
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चिंटू को हाथ लगाया तो होगा गलत अंजाम
युवा नेता संजय दलाल ने धरने से कहा कि प्रदेश सरकार ने देशद्रोह के मुकदमे को मजाक बना दिया है, जो भी सरकार के खिलाफ बोलता है उस पर देशद्रोह का केस बना दिया जाता है। उन्होंने कहा कि चिंटू छारा पर गलत तरीके से केस बनाया गया है, ऐसे में सरकार ने चिंटू पर हाथ डालने की गलती की तो उसका गलत अंजाम होगा। उन्होंने कहा कि वे सरकार के इन मुकदमों से डरने वाले नहीं हैं।
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एससी समाज जाटों के साथ : तंवर
डाबौदा खुर्द के सरपंच जयंत तंवर ने कहा कि सरकार ये भूल कर रही है कि जाट अकेले हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं है, एससी समाज जाट बिरादरी के साथ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जाट बड़े भाई की भूमिका अदा कर रहे हैं तो बाकी बिरादरियां छोटे भाई की भूमिका में हैं। तंवर ने कहा कि सरकार को जाटों की जायज मांगें मान ली जानी चाहिए।

बहिष्कार की घोषणा के बाद आया समर्थन
बलिदान दिवस पर जाट समाज के द्वारा मंच से ऐलान किया गया था कि अगर पंच-सरपंच, नंबरदार, जिला परिषद सदस्य, विधायक और सांसदों ने धरने पर पहुंचकर लिखित में समर्थन नहीं दिया तो आने वाले चुनाव में उनका बहिष्कार किया जाएगा। इस पर काला दिवस पर नंबरदार एसोसिएशन मातनहेल की तरफ से बिल्लु नंबरदार और कुछ ग्राम पंचायतों के द्वारा लिखित में समर्थन दिया गया। वहीं आज दाल के साथ 10 क्विंटल चावल परोसे गए। आज गौरेया गांव की पंचायत ने 5 लाख 51 हजार का चंदा दिया।


संस्कार स्कूूल देगी दंगा पीड़ितों को फ्री शिक्षा
छारा गांव के संस्कार सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संचालक दीपक दलाल ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए युवकों के बच्चों को वे अपने स्कूल में फ्री पढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि उसके स्कूल से पढ़ते हुए बच्चे आगे बढ़ते हैैं तो पीएचडी तक का सारा खर्च वो उठाएंगे। बहादुरगढ़ में अखाड़ा चलाने वाले बुल्लड़ पहलवान ने घोषणा करते हुए कहा कि आंदोलन में मारे गए लोगों के आश्रित अगर चाहे तो उन्हें वे अपने अखाड़े में निशुल्क पहलवानी के दांव-पेंच सिखाएंगे व उनका पूरा खर्च उठाएंगे।

जहां तक नजर गई, हर तरफ काला ही काला रंग
रविवार को धरनास्थल पर पंडाल में काले झंडे और काला दिवस के बैनर लगाए गए थे। धरने में महिलाएं काले परिधान पहनकर पहुंची तो कुछ महिलाएं केवल काली चुनरी ही ओढ़कर आई। वहीं बुजुर्ग काले साफे के साथ नजर आए तो कुछ काले कुर्ते-पायजामे में नजर आए। वहीं युवा काली टी शर्ट पहनकर धरनास्थल पर पहुंचे। धरने में पहुंचने वाले वाहनों पर काले रंगे झंडे लगाए गए थे।

300 वालंटियर ने दी ड्यूटी
काला दिवस की व्यवस्था को संभालने के लिए जिला पुलिस द्वारा लगाए गए नाकों पर जाट वालंटियर ने भी ड्यूटियां दी। वहीं धरनास्थल पर महिलाएं भी वालंटियर की भूमिका में डटी हुई दिखाई दी। पंडाल में चाय-पानी पिलाने का कार्य महिलाओं ने खुद ही संभाला। वहीं धरने के दौरा छोटे-छोटे बच्चे भी काली पट्टियां बांधे हुए वालंटियर की भूमिका में नजर आए।

महिलाओं की संख्या रही ज्यादा
बलिदान दिवस के मुकाबले में काला दिवस पर भीड़ अधिक रही तो महिलाओं की संख्या में भी काफी इजाफा हुई। महिलाओं के लिए बनाया गया पंडाल छोटा पड़ गया और महिलाओं को खुले आसमान के तले बैठना पड़ा। महिलाओं ने धरने को भी संबोधित किया।


प्रशासन रहा मुस्तैद
जिला प्रशासन ने काला दिवस के दौरान पूरी मुस्तैदी दिखाई। कार्यक्रम के चलते पैरामिलिट्री की 6 कंपनियां और पुलिस की 5 कंपनियां नाकों पर तैनात रहने के साथ रिजर्व के तौर पर पुलिस लाइन में मौजूद रही। एसपी सतीश बालन ने बताया कि जाटों का प्रस्तावित कार्यक्रम शांतिपूर्वक तरीके से निपट गया, इसमें ड्यूटी पर तैनात रहे सभी जवानों का योगदान रहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन के द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर पूर्ण तैयारियां की गई थी।
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