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किसान संसद में पेश किया गया सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

Sat, 07 Aug 2021 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 07 Aug 2021 12:12 AM IST
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No-confidence motion presented against the government in the farmers' parliament
जंतर मंतर के पास प्रदर्शन करते किसान। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। दिल्ली में जंतर-मंतर पर शुक्रवार को चली किसान संसद में प्रतिनिधियों ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। किसान प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पर लंबी चर्चा कर इसको पास करने की मांग की।
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तीनों कानून एक दूसरे के पूरक
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले चली शुक्रवार की किसान संसद में टीकरी बॉर्डर पड़ाव से 20 किसानों ने भाग लिया। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के किसान नेता जयकरण मांडोठी, महेंद्र सिंह और अमरीत कौर ने जोरदार बहस की। चर्चा में भाग लेते हुए जयकरण मांडोठी ने कहा कि ये तीन कृषि कानून, जमाखोरी का कानून प्राइवेट मंडी कानून और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कानून एक दूसरे के पूरक हैं। इनके साथ बिजली बिल संशोधन 2021 और पराली संबंधी कानून हैं, जोकि किसानों को मारने के लिए हैं, उनके लिए डेथ वारंट हैं। क्योंकि यह पूंजीपतियों की सरकार है। सरकार चाहे जो कर ले हम कॉरपोरेट को भगाएंगे और कानून रद्द करवाएंगे।
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स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की
किसान नेता महेंद्र सिंह नायक ने कहा, कृषि मंत्री बार-बार कह रहे हैं कि कानून वापसी की मांग छोड़कर सरकार इन कानूनों में कुछ भी सुधारों पर वार्ता के लिए तैयार है। जबकि किसान इन कानूनों का नहीं चाहते। किसानों की विरोधी ये सरकार सत्ता में रहने के लायक नहीं है। महिला किसान नेता अमृत कौर ने कहा कि इन कानूनों से एमएसपी व मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। सरकारी खरीद ना होने से बीपीएल परिवार को मिलने वाला राशन भी बंद हो जाएगा।
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जमाखोरी में छूट मिलने से कॉरपोरेट घराने कौड़ियों के दाम पर अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, आलू, प्याज आदि आवश्यक वस्तुओं का असीमित स्टॉक करेंगे और बाद में मनमाने दामों पर उपभोक्ताओं को बेचेंगे। महंगाई कई गुना बढ़ जाएगी। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसान अपनी जमीनों से हाथ धो बैठेंगे। इन कानूनों को जिन भी देशों ने लागू किया है वहां के अधिकतर किसान जमीन से हाथ धो बैठे हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार किसानों का विश्वास खो चुकी है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को भी लागू नहीं किया।
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