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Jhajjar-Bahadurgarh News: 16 साल से मरीजों की देखभाल कर रहीं निशा, कोविड भी नहीं तोड़ पाया हौसला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 01:55 AM IST
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Nisha has been caring for patients for 16 years, even Covid hasn't broken her spirit.
फोटो 98: निशा।
बहादुरगढ़। 16 साल से मरीजों की देखभाल कर रहीं बहादुरगढ़ के धर्मपुरा में रहने वाली स्टाफ नर्स निशा का हौसला कोविड भी नहीं तोड़ पाया। उन्होंने कोविड संक्रमण को हराकर न सिर्फ जिंदगी की जंग जीती बल्कि लोगों को साहस का परिचय दिया। अपनी चार वर्षीय बेटी को छोड़कर माहमारी के दौरान भी अपनी ड्यूटी में व्यस्त रहीं।
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खुद भी कोविड की शिकार हो गईं लेकिन हौसला नहीं टूटा। जल्द ठीक होकर फिर से अपनी ड्यूटी में जुट गईं। निशा फिलहाल बहादुरगढ़ के अग्रसेन अस्पताल में तैनात हैं।
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वह बताती हैं कि महामारी के दौरान जब लोग संक्रमित मरीजों से दूरी बना रहे थे उस समय काम करना काफी मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान उनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। परिवार और परिचितों में चिंता बढ़ गई लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए रखा, आइसोलेशन वार्ड में रहते हुए डॉक्टरों की सलाह का पालन कर 14 दिन बाद स्वस्थ हो गईं।
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कोविड के दौरान काम करने के लिए उन्हें क्षेत्र के लोगों ने बहादुर बेटी कहकर सम्मानित किया। बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में 117 नर्स दिन-रात मरीजों की सेवा में लगी रहती हैं।

1965 में हुई थी शुरुआत
नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म 12 मई 1820 को हुआ था और सबसे पहले इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1965 में की गई थी। तब से लेकर आज तक यह दिवस इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेज द्वारा अतंरराष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नर्सों के सराहनीय कार्य और साहस के लिए भारत सरकार के परिवार एवं कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगल पुरस्कार की शुरुआत की।


कोरोना महामारी ने यह साबित कर दिया कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। मरीजों की देखभाल से लेकर मानसिक सहारा देने तक, हर जिम्मेदारी नर्सें पूरी निष्ठा से निभाती हैं। महामारी के दौरान नर्सिंग स्टाफ ने दिन-रात ड्यूटी कर फ्रंटलाइन वर्कर की भूमिका निभाई थी।
-डॉ. विनय देशवाल, एसएमओ, नागरिक अस्पताल, बहादुरगढ़।

-फोटो- 98 : निशा, स्टाफ नर्स।
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