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नप अधिकारियों ने रद्द किए कई करोड़ के टेंडर
ब्यूरो अमर उजाला झज्जर
Updated Fri, 26 May 2017 11:58 PM IST
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नगर परिषद कार्यालय
- फोटो : amarujala beuro
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नगर परिषद के अधिकारियों ने शुक्रवार शाम को अचानक करीब छह करोड़ के विकास कार्यों के टेंडर रद्द कर दिए। जिस पर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन रवि खत्री समेत अनेक पार्षदों ने आपत्ति भी जताई। लेकिन पालिका अभियंता ओमदत्त और भारत भूषण ने उनकी आपत्ति को दरकिनार करते हुए टेंडर रद्द करने की घोषणा कर दी। पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद के अधिकारी ही विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बन रहे हैं। इसके अलावा इन टेंडरों के विज्ञापन पर भी लाखों रुपये के सरकारी धन की बर्बादी के लिए अधिकारी जिम्मेवार हैं।
नप ने वार्ड एक से 31 तक और शहर के प्रमुख मार्गों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए एक करोड़ 58 लाख 56 हजार रुपये के 18 टेंडर आमंत्रित किए थे। इन टेंडरों के लिए प्राप्त निविदाएं 29 मई को खुलनी थी। जबकि विभिन्न पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर ई-टायलेट के लिए 21 टेंडर लगाए गए थे। इन टेंडरों के लिए प्राप्त निविदाएं एक जून को खुलनी थी। जिन पर एक करोड़ 31 लाख 25 हजार रुपये की अनुमानित लागत आंकी गई थी।
इसके अलावा 31 वार्डों में विकास के लिए करीब तीन करोड़ 10 लाख की लागत से 37 टेंडर लगाए थे। इन टेंडरों के लिए प्राप्त निविदाएं 7 जून को खुलनी थी। लेकिन नगर परिषद के पालिका अभियंता ओमदत्त और भारत भूषण ने टेंडर खुलने से पहले ही शुक्रवार शाम को इनके रद्द करने की घोषणा कर दी। जिसकी सूचना मिलते ही पार्षदों में हड़कंप मच गया। पूर्व चेयरमैन रवि खत्री, समुंद्र सहवाग, राजेश खत्री, सतप्रकाश छिकारा, गुरदेव राठी और वजीर राठी आदि ने इस पर कड़ा एतराज जताया।
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शुक्रवार शाम को नगर परिषद अध्यक्ष शीला राठी के कार्यालय में दोनों एमई ओमदत्त व भारत भूषण की पार्षद रवि खत्री और समुंद्र सहवाग के साथ काफी बहस भी हुई। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अधिकारी शहर के विकास को गति देने के बजाय बीच में कचरा डाल रहे हैं। इससे जनता द्वारा चुने गए पार्षदों और चेयरपर्सन की छवि धूमिल हो रही है। पार्षदों का कहना है कि अधिकारी मनमाने तरीके से कानून को ठेंगा दिखाते हुए अपनी मर्जी से टेंडर लगाते हैं। जबकि उसके बाद स्वयं टेंडर रद्द करने की घोषणा कर रहे हैं। इन टेंडरों के विज्ञापन पर नगर परिषद द्वारा लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। पार्षदों ने कहा कि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार को दोषी अधिकारियों की शिकायत की जाएगी। वहीं पालिका अभियंता भारत भूषण का कहना है कि इन कार्यों में तकनीकि खामियां थी। जिसके कारण इन्हें रद्द किया गया है।
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नप ने वार्ड एक से 31 तक और शहर के प्रमुख मार्गों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए एक करोड़ 58 लाख 56 हजार रुपये के 18 टेंडर आमंत्रित किए थे। इन टेंडरों के लिए प्राप्त निविदाएं 29 मई को खुलनी थी। जबकि विभिन्न पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर ई-टायलेट के लिए 21 टेंडर लगाए गए थे। इन टेंडरों के लिए प्राप्त निविदाएं एक जून को खुलनी थी। जिन पर एक करोड़ 31 लाख 25 हजार रुपये की अनुमानित लागत आंकी गई थी।
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इसके अलावा 31 वार्डों में विकास के लिए करीब तीन करोड़ 10 लाख की लागत से 37 टेंडर लगाए थे। इन टेंडरों के लिए प्राप्त निविदाएं 7 जून को खुलनी थी। लेकिन नगर परिषद के पालिका अभियंता ओमदत्त और भारत भूषण ने टेंडर खुलने से पहले ही शुक्रवार शाम को इनके रद्द करने की घोषणा कर दी। जिसकी सूचना मिलते ही पार्षदों में हड़कंप मच गया। पूर्व चेयरमैन रवि खत्री, समुंद्र सहवाग, राजेश खत्री, सतप्रकाश छिकारा, गुरदेव राठी और वजीर राठी आदि ने इस पर कड़ा एतराज जताया।
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शुक्रवार शाम को नगर परिषद अध्यक्ष शीला राठी के कार्यालय में दोनों एमई ओमदत्त व भारत भूषण की पार्षद रवि खत्री और समुंद्र सहवाग के साथ काफी बहस भी हुई। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अधिकारी शहर के विकास को गति देने के बजाय बीच में कचरा डाल रहे हैं। इससे जनता द्वारा चुने गए पार्षदों और चेयरपर्सन की छवि धूमिल हो रही है। पार्षदों का कहना है कि अधिकारी मनमाने तरीके से कानून को ठेंगा दिखाते हुए अपनी मर्जी से टेंडर लगाते हैं। जबकि उसके बाद स्वयं टेंडर रद्द करने की घोषणा कर रहे हैं। इन टेंडरों के विज्ञापन पर नगर परिषद द्वारा लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। पार्षदों ने कहा कि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार को दोषी अधिकारियों की शिकायत की जाएगी। वहीं पालिका अभियंता भारत भूषण का कहना है कि इन कार्यों में तकनीकि खामियां थी। जिसके कारण इन्हें रद्द किया गया है।