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मेरी प्राथमिकता फिल्म नहीं, केवल किसानों का साथ : सोनिया मान

Tue, 09 Mar 2021 01:22 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 09 Mar 2021 01:22 AM IST
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My priority is not the film, but only with the farmers: Sonia Mann
अमर उजाला आफिस बहादुरगढ़ में सोनिया मान, डॉ. एसके मलिक व सुखविंदर सिंह लाली। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में महिला शक्ति की बड़ी भूमिका है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर टीकरी बॉर्डर पर महिलाओं की भारी भीड़ जुटी। हजारों अन्य महिलाओं के साथ-साथ अभिनेत्री सोनिया मान भी आंदोलन में शुरुआत से ही सक्रिय हैं। फिलहाल वह फिल्मों में अपने कॅरियर से अधिक महत्व किसान आंदोलन को दे रही हैं। मान सोमवार को बहादुरगढ़ में अमर उजाला कार्यालय पहुंची। किसान आंदोलन व अपने फिल्म कॅरियर को लेकर खुलकर बातचीत की।
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सोनिया मान ने कहा कि किसान आंदोलन की वजह से फिलहाल फिल्मों में अपने कॅरियर के बारे में उन्होंने सोचना ही छोड़ दिया है। किसान आंदोलन को एक जाति विशेष का आंदोलन बताने वाले सियासी नेताओं की मंशा को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा की प्रमुख घटक कीर्ति किसान यूनियन व उससे पहले नौजवान भारत सभा को समर्पित रहे कामरेड बलदेव सिंह की बेटी सोनिया मान न केवल अपने पिता के विचारों से इत्तेफाक रखती हैं, बल्कि उनके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयास भी करती हैं।
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किसान आंदोलन को कुछ लोगों द्वारा केवल एक जाति विशेष का आंदोलन कहे जाने पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, मेरी रगों में आतंकवाद से लड़कर अपनी जान कुर्बान कर देने वाले इंसानियत के रखवाले मेरे पिता कामरेड बलदेव सिंह का खून दौड़ता है। मेरे पिता ने पंजाब में आतंकवाद के दौर में हिंदुओं की हत्या का न केवल खुलकर विरोध किया, बल्कि हिंदुओं की जान बचाने के लिए कई तरह से प्रयास किए। इससे नाराज आतंकवादियों ने मेरे पिता की हत्या कर दी थी। ऐसे पिता की बेटी मैं सोनिया मान भी जातपात फैलाने और संप्रदायवाद फैलाने का हमेशा विरोध करती रहूंगी। इसके लिए चाहे जितना नुकसान झेलना पड़े। किसान आंदोलन को भी एक जाति विशेष का आंदोलन बताने वालों की कोशिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। सभी किसान एक हैं।
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पर्यावरण में लगातार गिरावट आने पर चिंता व्यक्त करते हुए अमृतसर की सोनिया ने कहा कि नए कृषि कानूनों से पूंजीपति पर्यावरण से भी खेलेंगे। वे अपने हिसाब से उत्पादन करवाने के लिए कीटनाशकों और दूसरे पर्यावरण विरोधी संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल करवाएंगे। रिलायंस जैसे पूंजीपति घराने इन कानूनों के जरिए खाद्य उद्योग पर एकाधिकार चाहते हैं। शायद इसीलिए रिलायंस ने को कई साल पहले रिटेल सेक्टर में पांव जमाना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले हमेशा स्वामीनाथन रिपोर्ट की हिमायत करने वाले नरेंद्र मोदी ने भी ये रिपोर्ट लागू नहीं की। आंदोलनकारी किसानों की भारी संख्या को फालतू की भीड़ बताने वाले नरेंद्र तोमर जैसे नेता चुनाव जीतने के लिए किस मुंह से भीड़ इकट्ठी करते हैं।

सोनिया मान तेलुगू, मलयालम, मराठी, हिंदी व पंजाबी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। फिलहाल 100 दिन से भी अधिक समय से किसान आंदोलन से जुड़ी हैं। फिल्म इंडस्ट्री में अपने कैरियर को लेकर वह गंभीर तो हैं, लेकिन किसान आंदोलन की कीमत पर चिंतित नहीं हैं। अमर उजाला कार्यालय में सोनिया मान के साथ जालंधर के सुखविंदर सिंह लाली और और बहादुरगढ़ के डॉ. एसके मलिक भी मौजूद रहे।
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