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आमजन की समस्याओं के प्रति जागरूक करती हैं प्रेमचंद की रचनाएं : शारदा
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टीकरी बार्डर पर किसान आंदोलनकारियों ने शनिवार को महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद्र की 142वी जयंती मनाई। इस अवसर पर प्रेमचंद्र के साहित्य को आम आदमी से जीवन की सच्ची बात बताया गया।
मुंशी प्रेमचंद के साहित्य के विषय में बोलते हुए ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन की उपाध्यक्ष शारदा दीक्षित ने कहा कि प्रेमचंद्र ने अपनी रचनाओं में गरीब मजदूर किसान महिलाओं व समाज के दलित पीड़ित वर्ग की समस्याओं का बखूबी चित्रण किया है। उनकी कालजयी रचनाएं आज के युग में भी उतनी ही सार्थक व दर्द पैदा करने वाली, समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा करने वाली साबित हो रही हैं। लगभग 100 साल पहले लिखा उनका साहित्य आज भी हमें समाज परिवर्तन की दिशा बताता है। वह एक ऐसे साहित्यकार थे जो जन आंदोलनों को सामाजिक परिवर्तन का बहुत बड़ा उपाय मानते थे और सामाजिक जागरूकता व सामाजिक परिवर्तन के लिए उन्हें आवश्यक समझते थे।
शारदा दीक्षित ने कहा कि आज किसान आंदोलन के संदर्भ में समाज के दबे कुचले वर्ग की हालत को देखते हुए फिर से प्रेमचंद्र की रचनाओं को गहराई से समझने और उनका अध्ययन करने की आवश्यकता है। इस आयोजन में हरबंस कौर, अमरीक सिंह, बलविंदर सिंह, सतनाम सिंह, मिट्ठू राम, प्रेमचंद, धर्म सिंह, उधम सिंह, जगबीर सिंह, कुलदीप सिंह और हरबंस सिंह ने भी चर्चा में भाग लिया।
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मुंशी प्रेमचंद के साहित्य के विषय में बोलते हुए ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन की उपाध्यक्ष शारदा दीक्षित ने कहा कि प्रेमचंद्र ने अपनी रचनाओं में गरीब मजदूर किसान महिलाओं व समाज के दलित पीड़ित वर्ग की समस्याओं का बखूबी चित्रण किया है। उनकी कालजयी रचनाएं आज के युग में भी उतनी ही सार्थक व दर्द पैदा करने वाली, समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा करने वाली साबित हो रही हैं। लगभग 100 साल पहले लिखा उनका साहित्य आज भी हमें समाज परिवर्तन की दिशा बताता है। वह एक ऐसे साहित्यकार थे जो जन आंदोलनों को सामाजिक परिवर्तन का बहुत बड़ा उपाय मानते थे और सामाजिक जागरूकता व सामाजिक परिवर्तन के लिए उन्हें आवश्यक समझते थे।
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शारदा दीक्षित ने कहा कि आज किसान आंदोलन के संदर्भ में समाज के दबे कुचले वर्ग की हालत को देखते हुए फिर से प्रेमचंद्र की रचनाओं को गहराई से समझने और उनका अध्ययन करने की आवश्यकता है। इस आयोजन में हरबंस कौर, अमरीक सिंह, बलविंदर सिंह, सतनाम सिंह, मिट्ठू राम, प्रेमचंद, धर्म सिंह, उधम सिंह, जगबीर सिंह, कुलदीप सिंह और हरबंस सिंह ने भी चर्चा में भाग लिया।
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