फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   mom where is gone my father

मां पापा कहां गए, कब आएंगे

Fri, 26 Feb 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर Updated Fri, 26 Feb 2016 12:53 AM IST
विज्ञापन
mom where is gone my father
मां पापा कहां गए हैं, कब आएंगे। मेरी टॉफी, कुरकुरे क्यों नहीं लाए। पिछले पांच दिनों उप्रदव में मारे गए मृतक दिनेश की बेटी उर्वशी यह सवाल घर में सारे परिजनों से पूछ रही है। पोती की बात सुनकर सन्नाटे भरे माहौल में एक बार फिर से रोना-पीटना शुरू हो जाता है। जिसे देखकर बच्ची भी सहम जाती है और कुछ देर के लिए चुप हो जाती है। वहीं जवान बेटे की मौत का सदमा ऐसा लगा कि पिता ने खाट पकड़ ली है।
विज्ञापन




दूसरी तरफ पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। पांच दिन से परिवार में सन्नाटा छाया हुआ है। न हीं चूल्हा जला न किसी ने अन्न का एक दाना मुंह में डाला है। मां आशा के लिए मुश्किल की घड़ी है वह हार्ट के पेशेंट पति जवाहर को संभाले या फिर बेहोश हालत में बहू मंजू को।
विज्ञापन


पता होता तो कभी दवा लेने न भेजता
छारा चुंगी निवासी मृतक दिनेश शर्मा परिवार का इकलौता बेटा था, जो कि 20 फरवरी को उपद्रव के पहले दिन मौत का शिकार हो गया। परिजन कहते हैं कि वह पिता के लिए दवा लेने गया था, अगले दिन सुबह छोटूराम धर्मशाला के पास शव होने की जानकारी मिली। उनको नहीं पता कि बेटा किसकी गोली लगने से मरा है। घर पर शोक सांत्वना देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। कमरे में खाट पर पड़ा जवाहर मानों अपनी मौत का इंतजार कर रहा है। जिक्र आते ही रोते हुए एक ही बात कहता है कि-बुढ़ापे की लाठी इस तरह से टूटेगी, पता होता तो वह बेटे को दवा लेने कभी न भेजता। वह घर से सिविल अस्पताल में गया था, लेकिन लौटा उसका शव।
विज्ञापन
विज्ञापन


शादियों में पकवान बना चलाते थे घर का खर्च
मृतक दिनेश के पिता जवाहर ने बताया कि वे परिवार के गुजर बसर के लिए विवाह शादियों में हलवाई का काम करते थे। करीब एक साल पहले को उसे हार्ट अटैक आया था। इसके बाद इकलौते बेटे दिनेश पर घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई थी। शनिवार के दिन पिता जवाहर के सीने में दर्द बढ़ गया था और दिनेश दवा लेने सिविल अस्पताल गया था। रास्ते में फोर्स व उपद्रवियों के बीच हो रही झड़प में चली एक गोली दिनेश के सीने के पार हो गई।

हादसे के अगले दिन मिला शव
दिनेश के ताऊ सुभाष ने बताया कि जब शाम तक वह नहीं लौटा तो सभी को चिंता होने लगी। चिंता का मुख्य कारण शहर की सड़कों पर फैला उपद्रव था। चारों तरफ फोन करने के बाद भी दिनेश का कहीं पता नहीं चला। परिजनों का कहना था कि दिनेश के घर ना पहुंचने के कारण पूरी रात चिंता और दहशत में गुजर गई। परिवार का कोई भी सदस्य सो नहीं सका। सुबह खबर मिली की स्थानीय छोटूराम धर्मशाला में कुछ लाशें रखी हुई हैं। जब जाकर देखा तो उनमें एक लाश दिनेश की थी।


दो बहनों की शादी का भार था दिनेश पर
दिनेश की करीब ढाई साल पहले शादी हुई थी। वह दो बहनों 19 वर्षीय सुदेश व 17 वर्षीय अनु में सबसे बड़ा था। उसके पास दोनों बहनों की शादी की जिम्मेवारी के सिवा एक हर्ट पेशेंट बाप जवाहर, मां आशा, पत्नी मंजु व डेढ़ साल की बेटी उर्वशी के पालन पोषण की जिम्मेवारी का भार भी दिनेश पर ही था। दिनेश की मौत के बाद परिवार का बोझ उठाने वाला अब कोई नहीं है। पत्नी मंजू के सामने भी काटने के लिए पूरा जीवन पड़ा है। लेकिन किसके सहारे।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed