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बसों में भर कर प्रवासी श्रमिकों को लाई पुलिस,रिलीफ कैंपों में छोड़ा
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पैदल जा रहे प्रवासी श्रमिकों को पुलिस ने बसों में भरकर इस तरह पहुंचाया। रिलीफ कैंपों में।
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। पुलिस प्रशासन की तरफ से जिले भर की सड़कों पर पैदल पलायन कर रहे प्रवासी श्रमिकों को बसों में भरकर रिलीफ कैंपों में भेज दिया है। इन कैंपों में और बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखने के लिए आदेश तो जारी किए हुए हैं। लेकिन इनका असर धरातल पर दिखाई कम दे रहा है।
कैंपों में सोशल डिस्टेंसिंग का कोई खास ध्यान नहीं रखा जा रहा है। रात के समय श्रमिकों के पास ओढ़ने के लिए कंबल तक नहीं थे। एक-एक कंबल में चार-चार लोग घुसे हुए थे। शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए कैंप में रात के समय ऐसा देखने को मिला। श्रमिकों ने यहां तक कहा कि उन्हें कैदियों की तरह बसों में भरकर लाया गया है। इन कैपों में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। हालांकि देररात को उन्हें खाना भी उपलब्ध कराया गया। स्कूल में बनाए गए कैंप में शौचालयों तक की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि नगर पालिका के पास लाखों रुपये की लागत से खरीद गए मोबाइल टायलेट भी हैं। इसके बावजूद श्रमिकों को परेशानी आ रही है। फिलहाल जिलेभर के कैंपों में करीब 850 प्रवासी श्रमिकों को ठहराया गया है।
रिलीफ कैंप के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त
जिले में बनाए गए रिलीफ कैंप के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं, जो इनके खाने-पीने और स्वास्थ्य इत्यादि का ध्यान रखेंगे। सभी मुख्य मार्गों के साथ ऐसे रिलीफ कैंप स्थापित किए गए हैं और लोगों को रास्तों पर रहने की अनुमति बिल्कुल नहीं है। इन कैंप में बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति जो अकेले हों, उनका ध्यान रखने की भी व्यवस्था की गई है।
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अधिकारियों ने भी लिया व्यवस्थाओं का जायजा
रात के समय इन रिलीफ कैंपों को अतिरिक्त उपायुक्त, एसडीएम व तहसीलदार ने भी दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने रिलीफ कैंप के नोडल अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।
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कैंपों में सोशल डिस्टेंसिंग का कोई खास ध्यान नहीं रखा जा रहा है। रात के समय श्रमिकों के पास ओढ़ने के लिए कंबल तक नहीं थे। एक-एक कंबल में चार-चार लोग घुसे हुए थे। शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए कैंप में रात के समय ऐसा देखने को मिला। श्रमिकों ने यहां तक कहा कि उन्हें कैदियों की तरह बसों में भरकर लाया गया है। इन कैपों में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। हालांकि देररात को उन्हें खाना भी उपलब्ध कराया गया। स्कूल में बनाए गए कैंप में शौचालयों तक की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि नगर पालिका के पास लाखों रुपये की लागत से खरीद गए मोबाइल टायलेट भी हैं। इसके बावजूद श्रमिकों को परेशानी आ रही है। फिलहाल जिलेभर के कैंपों में करीब 850 प्रवासी श्रमिकों को ठहराया गया है।
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रिलीफ कैंप के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त
जिले में बनाए गए रिलीफ कैंप के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं, जो इनके खाने-पीने और स्वास्थ्य इत्यादि का ध्यान रखेंगे। सभी मुख्य मार्गों के साथ ऐसे रिलीफ कैंप स्थापित किए गए हैं और लोगों को रास्तों पर रहने की अनुमति बिल्कुल नहीं है। इन कैंप में बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति जो अकेले हों, उनका ध्यान रखने की भी व्यवस्था की गई है।
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अधिकारियों ने भी लिया व्यवस्थाओं का जायजा
रात के समय इन रिलीफ कैंपों को अतिरिक्त उपायुक्त, एसडीएम व तहसीलदार ने भी दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने रिलीफ कैंप के नोडल अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।