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Jhajjar-Bahadurgarh News: बूंदाबांदी से सुधरी हवा, ग्रैप-3 की पाबंदियां हटीं
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बहादुरगढ़।
बूंदाबांदी व बढ़ती ठंड से प्रदूषण स्तर में सुधार देखने को मिला। इसके चलते ग्रैप-3 की पाबंदियों को हटा दिया है। हालांकि ग्रैप-1 और ग्रैप-2 की पाबंदियां अभी भी प्रभावी रहेंगी। शुक्रवार को एक्यूआई 191 दर्ज किया गया। वहीं वीरवार को भी एक्यूआई 200 से नीचे रहा था।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक्यूआई के येलो जोन में आने के बाद लिया गया है। स्पष्ट किया कि जब तक वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है, तब तक ग्रैप-3 के तहत लगाई गई सख्त पाबंदियों की आवश्यकता नहीं है।
नए साल पर हुई हल्की बूंदाबांदी और मौसम में आए बदलाव के चलते प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गई। बारिश और तेज हवाओं की वजह से वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक तत्वों को फैलने और बैठने का अवसर मिला जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ।
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ग्रैप-3 में आती हैं ये सभी पाबंदियां
ग्रैप-3 में आमतौर पर निर्माण व तोड़-फोड़ गतिविधियों पर रोक, डीजल जनरेटर सेट के उपयोग पर प्रतिबंध और कुछ श्रेणियों के उद्योगों को बंद करने जैसे कठोर कदम शामिल होते हैं। इन पाबंदियों के हटने से आमजन और औद्योगिक गतिविधियों को आंशिक राहत मिलेगी।
ये पाबंदियां रहेंगी लागू
हालांकि, ग्रैप-1 और ग्रैप-2 के तहत लागू नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। इनमें निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सड़क सफाई और पानी का छिड़काव, वाहनों की जांच, कचरा जलाने पर सख्त निगरानी और लोगों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।
प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग की अपील
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष कौशिक ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें और अनावश्यक वाहन प्रयोग, कचरा जलाने व खुले में धूल फैलाने जैसी गतिविधियों से बचें। मौसम में बदलाव के बावजूद यदि प्रदूषण स्तर दोबारा बढ़ता है तो ग्रेप-3 की पाबंदियां फिर से लागू की जा सकती हैं।
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बूंदाबांदी व बढ़ती ठंड से प्रदूषण स्तर में सुधार देखने को मिला। इसके चलते ग्रैप-3 की पाबंदियों को हटा दिया है। हालांकि ग्रैप-1 और ग्रैप-2 की पाबंदियां अभी भी प्रभावी रहेंगी। शुक्रवार को एक्यूआई 191 दर्ज किया गया। वहीं वीरवार को भी एक्यूआई 200 से नीचे रहा था।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक्यूआई के येलो जोन में आने के बाद लिया गया है। स्पष्ट किया कि जब तक वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है, तब तक ग्रैप-3 के तहत लगाई गई सख्त पाबंदियों की आवश्यकता नहीं है।
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नए साल पर हुई हल्की बूंदाबांदी और मौसम में आए बदलाव के चलते प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गई। बारिश और तेज हवाओं की वजह से वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक तत्वों को फैलने और बैठने का अवसर मिला जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ।
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ग्रैप-3 में आती हैं ये सभी पाबंदियां
ग्रैप-3 में आमतौर पर निर्माण व तोड़-फोड़ गतिविधियों पर रोक, डीजल जनरेटर सेट के उपयोग पर प्रतिबंध और कुछ श्रेणियों के उद्योगों को बंद करने जैसे कठोर कदम शामिल होते हैं। इन पाबंदियों के हटने से आमजन और औद्योगिक गतिविधियों को आंशिक राहत मिलेगी।
ये पाबंदियां रहेंगी लागू
हालांकि, ग्रैप-1 और ग्रैप-2 के तहत लागू नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। इनमें निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सड़क सफाई और पानी का छिड़काव, वाहनों की जांच, कचरा जलाने पर सख्त निगरानी और लोगों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।
प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग की अपील
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष कौशिक ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें और अनावश्यक वाहन प्रयोग, कचरा जलाने व खुले में धूल फैलाने जैसी गतिविधियों से बचें। मौसम में बदलाव के बावजूद यदि प्रदूषण स्तर दोबारा बढ़ता है तो ग्रेप-3 की पाबंदियां फिर से लागू की जा सकती हैं।