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Jhajjar-Bahadurgarh News: परिवार की खुशहाली के लिए ला रहे कांवड़
Tue, 30 Jul 2024 05:47 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 30 Jul 2024 05:47 AM IST
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झज्जर। शहर के कांवड़ शिविरों में कांवड़ियों को बेहतर जैसी सुविधाएं दी जा रही है। शिविरों में कांवड़ियों के रहने, खाने, ठहरने की व्यवस्था के साथ-साथ दवाईयों की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
शहर के गुर्जर धर्मशाला में शिव-गणेश कांवड़ सेवा समिति के शिविर के आयोजक समिति सदस्य ओमप्रकाश ने बताया कि शिविर का आयोजन करने से पहले वह दो बार कावड़ लेकर आए। उसके बाद सोचा कावडियों के लिए शिविर का आयोजन किया जाए, इसलिए लगातार 35 साल शिविर का आयोजन कर रहे हैं। शिविर में संजय गुर्जर, रवि, धनंजय सैन, अनिल ठेकेदार, सुनील, रवि, सतीश गुर्जर, अशोक, पवन, गिरीराज, मेजर, लीला, डैनी सैनी, बिंदू सैनी, विक्की, राजू गोठवाल सहयोग कर रहे हैं।
कोसली से हरिद्वार कांवड़ लेने गया था। आते समय झज्जर स्थित गुर्जर धर्मशाला में रुका। 22 साल से अपने परिवार की सुख शांति के लिए लगातार पैदल कांवड़ लाता हूं। कुछ मन्नत मांगी थी, वह भोलेनाथ ने पूरी कर दी। इस कारण कांवड़ लेकर आता हूं।
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अजय, गांव कोसली
मैं पिछले दो वर्ष से पैदल कावड़ ला रही हूं। जब पहली बार कांवड़ लाई उसी दौरान मेरे बेटे की मनोकामना पूरी हो गई थी। इसके बाद फिर से कावड़ लाई हूं।
सुमित्रा देवी, कोसली
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शहर के गुर्जर धर्मशाला में शिव-गणेश कांवड़ सेवा समिति के शिविर के आयोजक समिति सदस्य ओमप्रकाश ने बताया कि शिविर का आयोजन करने से पहले वह दो बार कावड़ लेकर आए। उसके बाद सोचा कावडियों के लिए शिविर का आयोजन किया जाए, इसलिए लगातार 35 साल शिविर का आयोजन कर रहे हैं। शिविर में संजय गुर्जर, रवि, धनंजय सैन, अनिल ठेकेदार, सुनील, रवि, सतीश गुर्जर, अशोक, पवन, गिरीराज, मेजर, लीला, डैनी सैनी, बिंदू सैनी, विक्की, राजू गोठवाल सहयोग कर रहे हैं।
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कोसली से हरिद्वार कांवड़ लेने गया था। आते समय झज्जर स्थित गुर्जर धर्मशाला में रुका। 22 साल से अपने परिवार की सुख शांति के लिए लगातार पैदल कांवड़ लाता हूं। कुछ मन्नत मांगी थी, वह भोलेनाथ ने पूरी कर दी। इस कारण कांवड़ लेकर आता हूं।
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अजय, गांव कोसली
मैं पिछले दो वर्ष से पैदल कावड़ ला रही हूं। जब पहली बार कांवड़ लाई उसी दौरान मेरे बेटे की मनोकामना पूरी हो गई थी। इसके बाद फिर से कावड़ लाई हूं।
सुमित्रा देवी, कोसली