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लापरवाहियों के बीच लगी प्रदेश के सबसे बड़े बस स्टैंड के दुकानों की बोली
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
Updated Tue, 19 Apr 2016 01:37 AM IST
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रोडवेज
- फोटो : bureau
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अव्यवस्थाओं और लापरवाहियों के बीच प्रदेश के सबसे बड़े स्टैंड पर सोमवार को नई दुकानों की बोली लगी। दुकानदारों ने बढ़े ही उमंग से बोली लगाई। बोली में शामिल होने के लिए कोसली ,रोहतक गोहाना समेत कई जिलों से लोग आए थे। लेकिन दुकानदारों ने उस समय अपना माथा पकड़ लिया, जब उन्हें यह पता चला कि उन्होंने एक साल की राशि समझकर जो बोली लगाई है वह एक माह की है। इसके बाद तो बोली दाताओं के होश उड़ गए। दुकानदारों ने इसे विभाग की लापरवाही और सोची समझी साजिश बताया है। तो वही रोडवेज विभाग के जीएम ने ऐसी कोई गलती मानने से इनकार कर दिया। लेकिन हकीकत देखने पर जीएम ने गलती मानी। बोली में दुकानों की बोली पचास हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की लगी। इतनी बोली सुनकर कई दुकानदार भी भौचक्के रह गए। कुछ ने कहा कि दुकान का किराया तो चांदनी चौक की दुकानों से भी ज्यादा है। बता दें कि करीब एक सप्ताह पहले ही सीएम मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के सबसे बड़े स्टैंड का उद्घाटन कर लोगों को यह समर्पित किया था।
विभाग ने लिया पहले ही ले लिया 25 हजार की सिक्योरिटी ब्लैंक चेक
सोमवार की सुबह से ही दुकानदार और विभाग बोली लगाने के लिए जमा हो गया था। फार्म की कीमत 500 रुपये रखी गई। विभाग ने बोली दाता से लिए 25 हजार की सिक्योरिटी व ब्लैंक चेक भी लिया। बोली के लिए करीब 108 फार्म भरे गए, लेकिन इन फार्मों में विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई। विभाग की तरफ से जो फार्म जारी किए उनमें न तो दुकानों का किराया शामिल था और न ही ये दर्शाया गया कि कितने साल का टेंडर है और जो किराया राशि है वो एक महीने की है या फिर एक वर्ष की है।
फार्म में अलग-अलग करीब 15 दुकानें शामिल
ठेकेदाराें ने जो एक साल की राशी समझ कर दुकानाें की बोली लगा दी, लेकिन उनको बाद में पता चला कि उनके द्वारा लगाई गई बोली एक साल की नहीं महीने की है। उसके बाद तो दुकानदारों ने होश फाख्ता हो गए। अब देखिए विभाग की लापरवाही यही नहीं रुकती। उनके द्वारा जारी किए गए फार्म में अलग-अलग करीब 15 दुकानें शामिल की गई थी। ठेकेदारों ने 500 रुपये का फार्म खरीदकर अपनी चुनिंदा दुकानों पर क्लिक कर फार्म अप्लाई किया, लेकिन विभाग के जीएम व अन्य अधिकारियों की तरफ से फार्म तो शामिल कर लिया गया, लेकिन कई दुकानों की बोली ही नहीं लगी, जिसके बाद ठेकेदाराें में रोष दिखा। उन्होंने रोडवेज के जीएम को इसकी शिकायत भी दी। लेकिन रोडवेज जीएम ने उनकी एक ना सुनी। जब विभाग की गलती पर सवाल किए गए तो रोडवेज जीएम ने हर गलती को नकार दिया, लेकिन जब विभाग द्वारा जारी किए गए फार्म में मिली खामियाें को स्वयं जब उन्होंने देखा तो अपनी और विभाग की गलती को स्वीकार किया। वहीं विभाग से हुई गलती का खामियाजा बोली दाताओं को भुगतना पड़ा। कोसली ,रोहतक तो कोई गोहाना से झज्जर बस स्टैंड की दुकानों की बोली लगाने आए थे।
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विभाग ने लिया पहले ही ले लिया 25 हजार की सिक्योरिटी ब्लैंक चेक
सोमवार की सुबह से ही दुकानदार और विभाग बोली लगाने के लिए जमा हो गया था। फार्म की कीमत 500 रुपये रखी गई। विभाग ने बोली दाता से लिए 25 हजार की सिक्योरिटी व ब्लैंक चेक भी लिया। बोली के लिए करीब 108 फार्म भरे गए, लेकिन इन फार्मों में विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई। विभाग की तरफ से जो फार्म जारी किए उनमें न तो दुकानों का किराया शामिल था और न ही ये दर्शाया गया कि कितने साल का टेंडर है और जो किराया राशि है वो एक महीने की है या फिर एक वर्ष की है।
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फार्म में अलग-अलग करीब 15 दुकानें शामिल
ठेकेदाराें ने जो एक साल की राशी समझ कर दुकानाें की बोली लगा दी, लेकिन उनको बाद में पता चला कि उनके द्वारा लगाई गई बोली एक साल की नहीं महीने की है। उसके बाद तो दुकानदारों ने होश फाख्ता हो गए। अब देखिए विभाग की लापरवाही यही नहीं रुकती। उनके द्वारा जारी किए गए फार्म में अलग-अलग करीब 15 दुकानें शामिल की गई थी। ठेकेदारों ने 500 रुपये का फार्म खरीदकर अपनी चुनिंदा दुकानों पर क्लिक कर फार्म अप्लाई किया, लेकिन विभाग के जीएम व अन्य अधिकारियों की तरफ से फार्म तो शामिल कर लिया गया, लेकिन कई दुकानों की बोली ही नहीं लगी, जिसके बाद ठेकेदाराें में रोष दिखा। उन्होंने रोडवेज के जीएम को इसकी शिकायत भी दी। लेकिन रोडवेज जीएम ने उनकी एक ना सुनी। जब विभाग की गलती पर सवाल किए गए तो रोडवेज जीएम ने हर गलती को नकार दिया, लेकिन जब विभाग द्वारा जारी किए गए फार्म में मिली खामियाें को स्वयं जब उन्होंने देखा तो अपनी और विभाग की गलती को स्वीकार किया। वहीं विभाग से हुई गलती का खामियाजा बोली दाताओं को भुगतना पड़ा। कोसली ,रोहतक तो कोई गोहाना से झज्जर बस स्टैंड की दुकानों की बोली लगाने आए थे।
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