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बारिश के बाद भी आंदोलन स्थल पर डटे किसान
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बारिश में भीगे बिस्तरों को सुखाते किसान।
- फोटो : Bahadurgarh
तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर टीकरी बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं। दो दिन से बारिश के बीच भी किसानों का हौसला कम नहीं हुआ। बहादुरगढ़ में लगातार भारी बारिश होने से किसानों के टेंट में पानी भर गया, राशन खराब हो गया। इसके बावजूद किसानों के उत्साह में किसी तरह की कमी नहीं आई।
सोमवार से लगातार हो रही बारिश से किसानों झोंपड़ियों में पानी भर गया। पड़ाव में मंगलवार को दोपहर बाद तक किसानों ने अपने बिस्तर सुखाए। राशन को सुरक्षित किया। बारिश से बचाव के लिए अपने टेंट संभाले। जिन किसानों का रहने के लिए ट्रालियों में इंतजाम है, उनको परेशानी कम हुई।
सेक्टर-10 में सड़क पर अपने बिस्तर सुखा रहे बठिंडा के किसान सुखजिंदर सिंह, बलवंत सिंह और पम्मी ने कहा कि घरों और कोठियों में बैठे लोग भले ही बारिश से परेशान हो गए हों, लेकिन हमारा संकल्प पक्का है। सर्दी, गर्मी, बारिश सब सहम करेंगे, भूखे भी रह लेंगे लेकिन कानूनों को रद्द करवाकर ही घर जाएंगे।
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ढांसा बॉर्डर पर किसान यूनियन के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र डागर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सर्दी, गर्मी के बाद अब बारिश से मुकाबला हो रहा है। आंदोलन की शुरुआत में सर्दी से सामना हुआ, फिर गर्मी और अब बारिश में भी किसान डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका असली मुकाबला तीनों कानूनों से है, जिन्हें रद्द करवाने के बाद ही घर जाएंगे। किसान मौसम के बदलाव से हमेशा से खेलता रहा है। खेत में गर्मी और सर्दी सही है, अब बारिश भी सहन करेंगे, लेकिन तीनों कानूनों को रद्द होने से पहले घर नहीं जाएंगे।
वहीं, मंगलवार को भी ढांसा बॉर्डर पर जलभराव हो गया और किसान पानी के बीच बैठे रहे। किसानों को हिम्मल पहलवान, सुरेंद्र, धर्मेंद्र यादव सुरहेड़ा और सरजीत गुलिया ने संबोधित किया।
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सोमवार से लगातार हो रही बारिश से किसानों झोंपड़ियों में पानी भर गया। पड़ाव में मंगलवार को दोपहर बाद तक किसानों ने अपने बिस्तर सुखाए। राशन को सुरक्षित किया। बारिश से बचाव के लिए अपने टेंट संभाले। जिन किसानों का रहने के लिए ट्रालियों में इंतजाम है, उनको परेशानी कम हुई।
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सेक्टर-10 में सड़क पर अपने बिस्तर सुखा रहे बठिंडा के किसान सुखजिंदर सिंह, बलवंत सिंह और पम्मी ने कहा कि घरों और कोठियों में बैठे लोग भले ही बारिश से परेशान हो गए हों, लेकिन हमारा संकल्प पक्का है। सर्दी, गर्मी, बारिश सब सहम करेंगे, भूखे भी रह लेंगे लेकिन कानूनों को रद्द करवाकर ही घर जाएंगे।
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ढांसा बॉर्डर पर किसान यूनियन के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र डागर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सर्दी, गर्मी के बाद अब बारिश से मुकाबला हो रहा है। आंदोलन की शुरुआत में सर्दी से सामना हुआ, फिर गर्मी और अब बारिश में भी किसान डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका असली मुकाबला तीनों कानूनों से है, जिन्हें रद्द करवाने के बाद ही घर जाएंगे। किसान मौसम के बदलाव से हमेशा से खेलता रहा है। खेत में गर्मी और सर्दी सही है, अब बारिश भी सहन करेंगे, लेकिन तीनों कानूनों को रद्द होने से पहले घर नहीं जाएंगे।
वहीं, मंगलवार को भी ढांसा बॉर्डर पर जलभराव हो गया और किसान पानी के बीच बैठे रहे। किसानों को हिम्मल पहलवान, सुरेंद्र, धर्मेंद्र यादव सुरहेड़ा और सरजीत गुलिया ने संबोधित किया।