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Jhajjar-Bahadurgarh News: जापान के विद्यार्थियों ने सेहलंगा में सीखे जैविक खेती के गुर
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जापानी स्कूली बच्चे देशी खाने का आनंद लेते हुए।
साल्हावास (झज्जर)। साल्हावास क्षेत्र के किसानों की जैविक उत्पादों व बागवानी की धूम सात समुद्र पार विदेशों तक जा पहुंच चुकी है। सोमवार को गांव सेहलंगा के किसान भीम सिंह डागर के फार्म हाउस पर जापान के अलग-अलग क्षेत्र के स्कूली छात्र सेहलंगा में जैविक खेती के गुर सीखने पहुंचे। ग्रामीणों ने विदेशी मेहमानों को हरियाणा का भोजन खिलाया और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
जापानी बच्चों ने अपने अध्यापक के साथ सेहलंगा के राजकीय स्कूल का भी दौरा किया और यहां की शिक्षा नीति के बारे में जानकारी हासिल की साथ ही हरियाणवी गाने ओ ननदी के बीरा पर ठुमके भी लगाए। जापानी छात्रों ने भीम सिंह डागर के परिजनों के साथ मिलकर गांव का भ्रमण किया और ग्रामीणों को राम-राम कहकर उनका अभिनंदन किया। जापानी शिक्षक आइको सासामोटो ने बताया कि जब हरियाणा की जैविक खेती के बारे में सुना तो वे जापान से गुरुग्राम पहुंचे। वहां से सेहलंगा गांव के किसान कृषि रत्न अवार्डी भीम सिंह डागर से संपर्क कर उनके फार्म हाउस पर आए। जापानी बच्चों के दल में 14 छात्र व एक अध्यापिका थीं।
जैविक खेती की तकनीक सीखी, घास की गठड़ी सिर पर रखी
फार्म हाउस पर जापानी छात्रों ने बिजाई मशीन चलाकर देखी। बेड पर सब्जियों का उत्पादन कैसे किया जाता है, उसके बारे में जानकारी हासिल की। खेती में रासायनिक खाद के बजाय फसलों की पूर्ति के लिए कौन से पोषक तत्व प्रयोग में ले जाते हैं, जब यह जानकारी मांगी तब भीम सिंह डागर ने कहा कि वे राख और देसी खाद का ही फसलों में प्रयोग करते हैं। फार्म हाउस पर घास की गठड़ी को रखा हुआ देखकर जापानी छात्रों में दिलचस्पी बढ़ी और उसके बारे में जानकारी हासिल की। भीम सिंह डागर ने बताया कि यह पशुओं के लिए चारा है। इसे सिर पर उठाकर खेत से लाया जाता है। इतना कहते ही बच्चों में घास की गठड़ी को सिर पर उठाने की होड़ सी लग गई। इस दौरान छात्र इस लम्हे को कमरे में कैद करने लगे।
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जापानी बच्चों ने अपने अध्यापक के साथ सेहलंगा के राजकीय स्कूल का भी दौरा किया और यहां की शिक्षा नीति के बारे में जानकारी हासिल की साथ ही हरियाणवी गाने ओ ननदी के बीरा पर ठुमके भी लगाए। जापानी छात्रों ने भीम सिंह डागर के परिजनों के साथ मिलकर गांव का भ्रमण किया और ग्रामीणों को राम-राम कहकर उनका अभिनंदन किया। जापानी शिक्षक आइको सासामोटो ने बताया कि जब हरियाणा की जैविक खेती के बारे में सुना तो वे जापान से गुरुग्राम पहुंचे। वहां से सेहलंगा गांव के किसान कृषि रत्न अवार्डी भीम सिंह डागर से संपर्क कर उनके फार्म हाउस पर आए। जापानी बच्चों के दल में 14 छात्र व एक अध्यापिका थीं।
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जैविक खेती की तकनीक सीखी, घास की गठड़ी सिर पर रखी
फार्म हाउस पर जापानी छात्रों ने बिजाई मशीन चलाकर देखी। बेड पर सब्जियों का उत्पादन कैसे किया जाता है, उसके बारे में जानकारी हासिल की। खेती में रासायनिक खाद के बजाय फसलों की पूर्ति के लिए कौन से पोषक तत्व प्रयोग में ले जाते हैं, जब यह जानकारी मांगी तब भीम सिंह डागर ने कहा कि वे राख और देसी खाद का ही फसलों में प्रयोग करते हैं। फार्म हाउस पर घास की गठड़ी को रखा हुआ देखकर जापानी छात्रों में दिलचस्पी बढ़ी और उसके बारे में जानकारी हासिल की। भीम सिंह डागर ने बताया कि यह पशुओं के लिए चारा है। इसे सिर पर उठाकर खेत से लाया जाता है। इतना कहते ही बच्चों में घास की गठड़ी को सिर पर उठाने की होड़ सी लग गई। इस दौरान छात्र इस लम्हे को कमरे में कैद करने लगे।
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