{"_id":"642c7f7d5020184165024c97","slug":"inundation-of-devotees-gathered-in-maa-bhimeshwari-devi-temple-jhjhar-news-c-17-1-113999-2023-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhajjar-Bahadurgarh News: मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhajjar-Bahadurgarh News: मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Wed, 05 Apr 2023 01:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 05 Apr 2023 01:20 AM IST
विज्ञापन
बेरी(झज्जर) चौदस के मौके पर माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने माथा टेकते हुए अपने परिवार के लिए मंगल कामना की। यहां मेले में जमकर खरीदारी भी की।मंगलवार सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगने लगा था।
महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे थे। दिन के समय में पूरे कस्बे में अलग ही रौनक देखने को मिली। चौदस के दिन मां की प्रतिमा के दर्शन करने की परंपरा है। जिसके साथ ही इस दफा का मेला समाप्त हो गया। जिसका असर है कि श्रद्धालुओं ने मंदिर में मात्था टेकने के बाद खरीदारी की। बेरी व आसपास के गांव के किसान छह माह तक खेतों में पसीना बहाते हैं। फसल की अच्छी ब्रिकी पर मां भीमेश्वरी के मंदिर में आते है और अपनी फसल का भोग लगाते है।
इस दिन विश्व प्रसिद्व मां भीमेश्वरी देवी के चरणों में किसान परिवार अपनी फसल का भोग लगाकर माथा टेकते है और अपनी आगे होने वाली अच्छी फसल की कामना करते है, लेकिन इस बार बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की अधिकतर फसल खराब हो गई। दरबार में पहुंंचे भक्तजनों का कहना है क माता भीमेश्वरी देवी से जो मंन्नते मांगी जाती है वे शीघ्र ही पूरी हो जाती है। प्रशासनिक स्तर पर पुलिस एंव प्रशासन की और से भी यहां पुख्ता इंतजाम दिखाई दिए। यह मान्यता महाभारत काल से चली आ रही है मां के दरबार में हर कोई अपनी हाजिरी लगाना चाहता है। सुबह पांच बजे बाद मां की प्रतिमा को अंदर वाले मंदिर से बाहर वाले मंदिर में लाया गया। पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना करवाई। बेरी थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह का कहना है कि नवरात्रों के नौ दिनों में मां के दरबार में कोने-कोने से श्रद्धालु आते है और चौदस के दिन बेरी के आसपास के गांवों के भक्त मंदिर में माथा टेकने के लिए आते है। मां की कृपा श्रद्धालुओं पर बनी हुई है, पुलिस की और से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे थे। दिन के समय में पूरे कस्बे में अलग ही रौनक देखने को मिली। चौदस के दिन मां की प्रतिमा के दर्शन करने की परंपरा है। जिसके साथ ही इस दफा का मेला समाप्त हो गया। जिसका असर है कि श्रद्धालुओं ने मंदिर में मात्था टेकने के बाद खरीदारी की। बेरी व आसपास के गांव के किसान छह माह तक खेतों में पसीना बहाते हैं। फसल की अच्छी ब्रिकी पर मां भीमेश्वरी के मंदिर में आते है और अपनी फसल का भोग लगाते है।
विज्ञापन
इस दिन विश्व प्रसिद्व मां भीमेश्वरी देवी के चरणों में किसान परिवार अपनी फसल का भोग लगाकर माथा टेकते है और अपनी आगे होने वाली अच्छी फसल की कामना करते है, लेकिन इस बार बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की अधिकतर फसल खराब हो गई। दरबार में पहुंंचे भक्तजनों का कहना है क माता भीमेश्वरी देवी से जो मंन्नते मांगी जाती है वे शीघ्र ही पूरी हो जाती है। प्रशासनिक स्तर पर पुलिस एंव प्रशासन की और से भी यहां पुख्ता इंतजाम दिखाई दिए। यह मान्यता महाभारत काल से चली आ रही है मां के दरबार में हर कोई अपनी हाजिरी लगाना चाहता है। सुबह पांच बजे बाद मां की प्रतिमा को अंदर वाले मंदिर से बाहर वाले मंदिर में लाया गया। पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना करवाई। बेरी थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह का कहना है कि नवरात्रों के नौ दिनों में मां के दरबार में कोने-कोने से श्रद्धालु आते है और चौदस के दिन बेरी के आसपास के गांवों के भक्त मंदिर में माथा टेकने के लिए आते है। मां की कृपा श्रद्धालुओं पर बनी हुई है, पुलिस की और से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए थे।
विज्ञापन