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आंदोलन का असर : बहादुरगढ़ में बंद हो रहीं फैक्टरियां

Sat, 20 Feb 2021 02:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 02:10 AM IST
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Impact of protest : Factories closing in Bahadurgarh
गणपति धाम में फैक्ट्री पर लगा ताला। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। लगभग तीन महीने बीतने को हैं। किसान टीकरी बॉर्डर पर आंदोलनरत हैं। अब किसानों के आंदोलन का असर न केवल आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (एमआइई) बल्कि बहादुरगढ़ में दिल्ली-रोहतक रोड पर स्थित गणपति धाम औद्योगिक क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ने लगा है। दोनों ही औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही फैक्ट्रियां लगातार खाली होने लगी है। इसका नुकसान जमीन मालिकों को भी होने लगा है। आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र से जहां 20 से 25 फैक्ट्रियां खाली हो गई हैं तो गणपति धाम से भी लगभग दस फैक्टरी संचालक खाली करके चले गए हैं।
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तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर टीकरी बॉर्डर पर नवंबर माह से किसान यहां पर डटे हुए हैं। कुछ दिनों पहले तक इस आंदोलन का असर जहां आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र के पार्ट-ए और बी की फैक्ट्रियों पर पड़ने लगा था। वहीं अब गणपति धाम भी इससे अछूता नहीं रहा है। आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में जहां 200 से 250 वर्ग गज में फैक्ट्रियां चल रही थी। वहीं गणपति धाम में 500 वर्ग गज में चल रही फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। गणपति धाम के उद्योगपति नवीन ने बताया कि किसान आंदोलन के कारण फैक्टरी मालिकों को दिल्ली से कच्चा माल लेकर आने और तैयार माल भेजने में कई महीनों से दिक्कत आ रही थी। आंदोलन का असर पूरी तरह से काम धंधे पर पड़ रहा है। काम न होने के कारण अधिकतर फैक्ट्रियों के मालिक खाली करके चले गए हैं। इससे जमीन मालिक को भी नुकसान होने लगा है क्योंकि कराये पर दी गई फैक्ट्रियां खाली हो गई है।
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गणपति धाम में चल रही यह फैक्ट्रियां हुई बंद
गणपति धाम औद्योगिक क्षेत्र में चल रही कई फैक्ट्रियां किसानों के आंदोलन के कारण काम कम होने के कारण बंद हो गई है। इनमें आरएके पेट्रो, बीएस पावर, यूनिक प्रोसेसर के अलावा बालाजी इंडस्ट्रीज, मोल्डिंग बनाने वाली फैक्टरी, तेल पैकिंग की फैक्टरी शामिल हैं। फैक्टरी मालिक एके जैन का कहना है कि जब काम ही नहीं रहेगा तो चलाने का क्या फायदा। पहले तो कई महीने धंधों पर कोरोना की मार रही। अब पिछले तीन माह से किसान आंदोलन का असर काम धंधों पर पड़ने लगा था। ऐसे में फैक्ट्रियों का किराया निकालना और काम करने वाले श्रमिकों का वेतन निकालना बेहद ही मुश्किल होने लगा था। ऐसे में उन्होंने फैक्टरी बंद करना ही पड़ा।
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किसान आंदोलन का उद्योग धंधों पर असर
बीसीसीआई के वरिष्ठ उप प्रधान विकास आनंद सोनी का कहना है कि काम-धंधों पर पहले तो कोराना की मार ज्यादा रही। अब कई महीनों से किसान आंदोलन के कारण एमआइई में किराये पर चल रही अधिकतर फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। यदि किसान आंदोलन जल्द ही समाप्त नहीं होता है तो आने वाले दिनों में उद्योगपतियों के लिए बैंक लोन की किस्तें देनी भी मुश्किल हो जाएंगी।
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