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Jhajjar-Bahadurgarh News: क्लेम नहीं दिया तो कोर्ट पहुंचा मामला, अब ब्याज समेत पैसा लौटाएगी कंपनी
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झज्जर।
स्वास्थ्य बीमा लेने के बावजूद बीमा कंपनी ने पिता-पुत्र के इलाज में खर्च हुई राशि को क्लेम करने पर नहीं दिया। इस पर पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को इलाज पर खर्च हुई 68220 रुपये की राशि 9 प्रतिशत साधारण ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा बीमा कंपनी को केस को लंबा चलाने पर 25 हजार रुपये और केस खर्च के रूप में सात हजार रुपये भी देने होंगे। बुपनिया निवासी प्रवीण ने 29 जनवरी 2020 को उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी।
उन्होंने बताया कि मणिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (पूर्व में) जिसे अब सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, उससे अपने, पत्नी और दो बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी 12 अक्तूबर 2017 से 11 अक्तूबर 2018 तक के लिए ली थी।
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बीमा पॉलिसी को 12 अक्तूबर 2018 से 11 अक्तूबर 2019 तक के लिए रिन्यू किया गया था। इस पॉलिसी के लिए एक साल के लिए 8312 रुपये का प्रीमियम जमा किया गया था। इसके बाद तीन जुलाई 2019 को शिकायतकर्ता बीमार पड़ गए और इलाज में 27,858 खर्च हुए।
बीमा कंपनी ने उन्हें यह रकम वापस नहीं दी। इसके बाद 16 अगस्त 2019 को शिकायतकर्ता का बेटा भी बुखार से पीड़ित हो गया। इलाज में 31800 रुपये खर्च करने पड़े और 8562 रुपये का दवा का खर्च भी उठाना पड़ा। बीमा कंपनी को पैसे नहीं दिए।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की तरफ से लिखित बयान में शिकायतकर्ता की बातों का विरोध किया गया। उपभोक्ता फोरम के प्रधान डॉ. शहाबुद्दीन और सदस्य वीना रानी ने पाया कि शिकायत करने वाला क्लेम की गई रकम के रीइंबर्समेंट का हकदार था लेकिन बीमा कंपनी ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी।
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स्वास्थ्य बीमा लेने के बावजूद बीमा कंपनी ने पिता-पुत्र के इलाज में खर्च हुई राशि को क्लेम करने पर नहीं दिया। इस पर पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को इलाज पर खर्च हुई 68220 रुपये की राशि 9 प्रतिशत साधारण ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा बीमा कंपनी को केस को लंबा चलाने पर 25 हजार रुपये और केस खर्च के रूप में सात हजार रुपये भी देने होंगे। बुपनिया निवासी प्रवीण ने 29 जनवरी 2020 को उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी।
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उन्होंने बताया कि मणिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (पूर्व में) जिसे अब सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, उससे अपने, पत्नी और दो बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी 12 अक्तूबर 2017 से 11 अक्तूबर 2018 तक के लिए ली थी।
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बीमा पॉलिसी को 12 अक्तूबर 2018 से 11 अक्तूबर 2019 तक के लिए रिन्यू किया गया था। इस पॉलिसी के लिए एक साल के लिए 8312 रुपये का प्रीमियम जमा किया गया था। इसके बाद तीन जुलाई 2019 को शिकायतकर्ता बीमार पड़ गए और इलाज में 27,858 खर्च हुए।
बीमा कंपनी ने उन्हें यह रकम वापस नहीं दी। इसके बाद 16 अगस्त 2019 को शिकायतकर्ता का बेटा भी बुखार से पीड़ित हो गया। इलाज में 31800 रुपये खर्च करने पड़े और 8562 रुपये का दवा का खर्च भी उठाना पड़ा। बीमा कंपनी को पैसे नहीं दिए।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की तरफ से लिखित बयान में शिकायतकर्ता की बातों का विरोध किया गया। उपभोक्ता फोरम के प्रधान डॉ. शहाबुद्दीन और सदस्य वीना रानी ने पाया कि शिकायत करने वाला क्लेम की गई रकम के रीइंबर्समेंट का हकदार था लेकिन बीमा कंपनी ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी।