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डॉक्टरों-कर्मचारियों ने छोड़ा काम, मरीज दो घंटे परेशान
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2016 02:11 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारियों में एक कैलेंडर उपजी कलह के कारण शुक्रवार को मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। सिविल अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारियों ने काम छोड़ कर सिविल सर्जन कार्यालय का रुख किया। अधिकारी दो डॉक्टरों के बीच छिड़े विवाद पर स्पष्टीकरण लेने में लगे रहे।
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इससे अस्पताल में सारा काम ठप हो गया और इसका खामियाजा मरीजों को झेलने पड़ा। दो घंटे तक स्वास्थ्य सेवा (इमरजेंसी को छोड़) ठप रही।
सूत्र बताते हैं कि सिविल अस्पताल का एक कर्मचारी कई दिन पहले चंडीगढ़ से कुछ विभागीय कलेंडर लेकर आया था। कलेंडर उसने एमएस डा. एनके गर्ग को सौंप दिया। इस बीच कलेंडर आने की सूचना उप सिविल सर्जन डा. ईश्वर सिंह को लगी तो कलेंडर न मिलने से वे भड़क गए।
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इसको लेकर डा. गर्ग और डा. ईश्वर सिंह में विवाद हो गया। शुक्रवार को विवाद बढ़ कर सिविल सर्जन के पास जा पहुंचा। सिविल सर्जन डा. एसआर सिवाच ने स्पष्टीकरण के लिए डा. गर्ग को कार्यालय में बुलाया।
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इसकी सूचना अन्य डॉक्टरों और कर्मियों को लगी तो वे भी अपनी सीट छोड़ कर डा. गर्ग के समर्थन में सिविल सर्जन कार्यालय जा पहुंचे। कलेंडर को लेकर यहां दोनों अधिकारियों में जमकर बहस हुई। डॉक्टरों और कर्मियों ने इस पर हंगामा कर नारेबाजी की। दो घंटे तक विवाद चलता रहा।
न बनी पर्ची, न मिला इलाज
कलेंडर को लेकर छिड़े विवाद में सिविल अस्पताल में सुबह 10 से 12 बजे तक स्वास्थ्य सेवाएं ठप रही। न तो पर्ची बनाने के लिए कोई कर्मचारी था और न ही ओपीडी में कोई डॉक्टर। मरीज और तीमारदार दो घंटे तक लाइनों में लगे कर्मियों और डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर भी महिला मरीजों की लंबी कतार लगी थी। दवा काउंटर बंद रहा। स्वास्थ्य सेवा ठप होने से मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। मरीजों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर इकट्ठा होकर जमकर नारेबाजी की।
ये पारिवारिक मामला है। इसे निपटाने के प्रयास किए थे। मरीजों की परेशानी को देखते हुए वार्ता बीच में छोड़नी पड़ी। बाद में आपस में बैठकर विवाद को निपटाया गया। डॉक्टरों और कर्मियों ने कुछ देर बाद काम संभाल लिया था और मरीजों को परेशानी नहीं हुई। - डा. एनके गर्ग, एमएस सिविल अस्पताल
डॉक्टरों में किसी बात को लेकर मनमुटाव था। दोनों पक्षों को बुलाकर बात सुनी गई। इस दौरान डाक्टरों व कर्मियों को काम न छोड़ने की अपील की गई थी। घर का विवाद था और मरीजों की समस्या को देखते हुए इसे लंबे समय तक नहीं लंबित नहीं रखा गया। - डा. एसआर सिवाच, सिविल सर्जन