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Jhajjar-Bahadurgarh News: होलाष्टक 17 से शुरू, 8 दिनों तक नहीं होंगे शुभ कार्य
Sat, 16 Mar 2024 12:46 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 16 Mar 2024 12:46 AM IST
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बहादुरगढ़। होली से आठ दिन पहले 17 मार्च से होलाष्टक लग रहा है। इसके आठ दिनों में शादी, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। होली पर्व 24 मार्च को है और दुल्हेंडी 25 मार्च को मनाई जाएगी। रंगों वाली होली के एक दिन पहले होलिका दहन होगा।
लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि आध्यात्मिक कार्यों में जीवन बिताना चाहिए। होलाष्टक के प्रथम दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहुल अपने उग्र रूप में होता है। उन्होंने बताया कि इन दिनों मानव मस्तिष्क विकारों और परेशानियों से घिरा रहता है।
क्या है होलिका दहन की प्रक्रिया
होलिका दहन में किसी पेड़ की शाखा को जमीन में गाड़कर उसे चारों तरफ से लकड़ी, कंडे या उपले से ढक दिया जाता है। इन सारी चीजों को शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। इसमें छेद वाले गोबर के उपले, गेहूं की नई बालियां और उबटन डाले जाते हैं। मान्यता है कि इससे साल भर व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है और सारी बुरी बलाएं इस अग्नि में भस्म हो जाती हैं। होलिका दहन के बाद लकड़ी की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है। होलिका दहन को कई जगह छोटी होली भी कहते हैं।
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ये हैं प्रमुख तिथियां
होलाष्टक प्रारंभ : रविवार 17 मार्च
होलाष्टम समाप्त : रविवार 24 मार्च
होलिका दहन : रविवार 24 मार्च
दुल्हेंडी : सोमवार 25 मार्च
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लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि आध्यात्मिक कार्यों में जीवन बिताना चाहिए। होलाष्टक के प्रथम दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहुल अपने उग्र रूप में होता है। उन्होंने बताया कि इन दिनों मानव मस्तिष्क विकारों और परेशानियों से घिरा रहता है।
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क्या है होलिका दहन की प्रक्रिया
होलिका दहन में किसी पेड़ की शाखा को जमीन में गाड़कर उसे चारों तरफ से लकड़ी, कंडे या उपले से ढक दिया जाता है। इन सारी चीजों को शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। इसमें छेद वाले गोबर के उपले, गेहूं की नई बालियां और उबटन डाले जाते हैं। मान्यता है कि इससे साल भर व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है और सारी बुरी बलाएं इस अग्नि में भस्म हो जाती हैं। होलिका दहन के बाद लकड़ी की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है। होलिका दहन को कई जगह छोटी होली भी कहते हैं।
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ये हैं प्रमुख तिथियां
होलाष्टक प्रारंभ : रविवार 17 मार्च
होलाष्टम समाप्त : रविवार 24 मार्च
होलिका दहन : रविवार 24 मार्च
दुल्हेंडी : सोमवार 25 मार्च