किराया देखकर पीछे हटे बोलीदाता
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बोली के लिए करीब 108 फार्म भरे गए थे। बोली में शामिल होने के लिए रोहतक, कोसली सहित कई अन्य जिलों से लोग आए थे, लेकिन दुकानदारों ने उस समय अपना माथा पकड़ लिया जब उन्हें पता चला कि जो बोली लगाई जा रही है वह एक साल की नहीं बल्कि एक महीने की है।
विभाग की तरफ से जो फार्म जारी किए उनमें न तो दुकानों का किराया शामिल था और न ही ये दर्शाया गया कि कितने साल का टेंडर हैं और जो किराया राशि है वो एक महीने की है या फिर एक वर्ष की है। दुकानदारों ने इसे विभाग की साजिश बताया है। 15 दुकानों में से सोमवार को केवल 4 दुकानों की ही बोली लग पाई थी। जिन दुकानदारों ने बोली लगाई थी।
उन्हें मालूम नहीं था कि किराया कितने दिन का है और एक साल के हिसाब से दुकानदारों ने दुकान की बोली लगा तो दी, लेकिन जब उन्हें पता चला कि बोली का किराया एक महीने का है तो दुकानदारों ने दुकान में अपना काम शुरू नहीं किया। बोली के बाद दुकानदारों ने दुकान को छोड़ दिया। विभाग द्वारा जारी किए गए फार्म में अलग-अलग करीब 15 दुकानें शामिल की गई थी, ठेकेदारों ने 500 रुपये का फार्म खरीदकर अपनी चुनिंदा दुकानों पर क्लिक कर फार्म अप्लाई किया, लेकिन विभाग के जीएम व अन्य अधिकारियों की तरफ से फार्म तो शामिल कर लिया गया, लेकिन कई दुकानों की बोली ही नहीं की गई।
रोडवेज झज्जर के जीएम आरएस पूनिया से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि दुकानदार को जब किराया ज्यादा लग रहा है तो बोली ही नहीं लगाते। उन्होंने बताया कि दुकान की बोली की शुरुआत से लेकर दुकानदारों ने दुकान की बोली को दोगुना तक बोली लगाई और अब दुकानदारों ने दुकानों को छोड़ दिया है। सोमवार को हुई बोली में 4 दुकानों की ही बोली लग पाई थी और चारों दुकानदारों ने दुकानों को छोड़ दिया है।
जीएम रोडवेज ने कहा कि चारों दुकानदारों की सिक्योरिटी जो कि 25000 हजार रुपये बोली शुरू होने से पहले जमा कराई गई थी वो राशि जब्त हो जाएगी। बोली लगाने वाले दुकानदारों से जो ब्लैंक चेक लिए गए थे उनके माध्यम से 4 महीने का किराया भी काट लिया जाएगा। दोबारा से दुकानों की बोली इस महीने के अंत में की जाएगी।