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सास-ससुर के हत्यारे को उम्रकैद, 10 हजार रुपये जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:01 AM IST
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corut
- फोटो : Bureau
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वर्ष 2013 में अपनी सास और ससुर की हत्या को अंजाम देने के मामले में झज्जर की एक अदालत ने एक व्यक्ति को उम्रकैद और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की पत्नी का मामला अभी झज्जर की ही जुवैनाइल कोर्ट में विचाराधीन है, जिस पर अभी फैसला आना बाकी है।
जानकारी अनुसार झज्जर के नीमवाली क्षेत्र में वर्ष 2013 में सुनीता और उसके पति साहब सिंह का शव पुलिस को घर में ही खून से लथपथ हालत में मिला था। हत्या की सूचना मृतक साहब सिंह की बेटी दीपिका ने पुलिस को दी थी। हालांकि बाद में पूछताछ के दौरान साहब सिंह की बेटी ने ही यह खुलासा किया था कि इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम उसके पति प्रवेश ने दिया है। बाद में जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरी घटना का पर्दाफाश हुआ। इसी मामले में पुलिस ने पहले तो मृतक साहब सिंह की बेटी दीपिका को हिरासत में लिया, जिसने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि वह घटना के बाद इतनी सहम गई थी कि वह दबाव में पूरी बात पुलिस को नहीं बता पाई।
पुलिस के समक्ष दीपिका ने यह भी कहा था कि नाबालिग होने के बावजूद उसके परिवार पर दबाव बनाकर प्रवेश ने उससे शादी की थी और बाद में रुपयों के लालच में इस घटना को अंजाम दिया। चूंकि घटना के समय दीपिका नाबालिग थी, इसी के चलते इस मामले में दीपिका के मुकदमे को जुवैनाइल कोर्ट में भेज दिया गया था। अभी इस मामले में जुवैनाइल कोर्ट का फैसला आना बाकी है। उधर, इसी मामले में स्थानीय अदालत ने प्रवेश को मामले का दोषी ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुना दी, साथ ही अदालत ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी किया।
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जानकारी अनुसार झज्जर के नीमवाली क्षेत्र में वर्ष 2013 में सुनीता और उसके पति साहब सिंह का शव पुलिस को घर में ही खून से लथपथ हालत में मिला था। हत्या की सूचना मृतक साहब सिंह की बेटी दीपिका ने पुलिस को दी थी। हालांकि बाद में पूछताछ के दौरान साहब सिंह की बेटी ने ही यह खुलासा किया था कि इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम उसके पति प्रवेश ने दिया है। बाद में जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरी घटना का पर्दाफाश हुआ। इसी मामले में पुलिस ने पहले तो मृतक साहब सिंह की बेटी दीपिका को हिरासत में लिया, जिसने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि वह घटना के बाद इतनी सहम गई थी कि वह दबाव में पूरी बात पुलिस को नहीं बता पाई।
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पुलिस के समक्ष दीपिका ने यह भी कहा था कि नाबालिग होने के बावजूद उसके परिवार पर दबाव बनाकर प्रवेश ने उससे शादी की थी और बाद में रुपयों के लालच में इस घटना को अंजाम दिया। चूंकि घटना के समय दीपिका नाबालिग थी, इसी के चलते इस मामले में दीपिका के मुकदमे को जुवैनाइल कोर्ट में भेज दिया गया था। अभी इस मामले में जुवैनाइल कोर्ट का फैसला आना बाकी है। उधर, इसी मामले में स्थानीय अदालत ने प्रवेश को मामले का दोषी ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुना दी, साथ ही अदालत ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी किया।
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