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Jhajjar-Bahadurgarh News: रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजेंगे गणपति, दूब और मोदक से करें पूजन

Sun, 17 Sep 2023 02:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 17 Sep 2023 02:03 AM IST
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Ganpati will be seated with Riddhi-Siddhi, worshiped with Doob and Modak.
-फोटो 51 : बाजार में गणेश की प्रतिमा को रंगों से सजाता कलाकार।
संवाद न्यूज एजेंसी
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बहादुरगढ़। भगवान गजानन के जन्मदिन पर श्रीगणेश चतुर्थी पर्व पर 19 सितंबर (मंगलवार) को मनाया जाएगा। मूषक पर सवार गणपति रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजेंगे। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा सहित देश के समस्त हिस्सों में यह पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। घरों में गणेश जी को स्थापित किया जाता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की धूमधाम से विदाई की जाती है। गणेश को बुद्धि, विवेक, धन धान्य, रिद्धि-सिद्धि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि गणेश जी को प्रसन्न करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति की स्थापना होती है।
भगवान गणेश को प्रिय हैं ये दो चीजें
गणेश जी को दूब घास (दूर्वा) प्रिय है। इसलिए दूब अर्पित करें, मोदक का भोग लगाएं, मोदक घर में बनाएं तो ज्यादा बेहतर होता है।

पंचांग मुहूर्त के अनुसार गणेश जी को स्थापित करें
पंचांग के अनुसार इस दिन के चौघड़िया को ध्यान में रखकर ही भगवान गणेश जी को घर पर स्थापित करेंए क्योंकि इस अवधि में स्थिर और चर लग्न भी शुभ हैं।
स्थापना के शुभ समय

-वृश्चिक स्थित लग्न : सुबह 10:40 से 12:30 बजे तक

-लाभामृत चौघड़िया : दोपहर 12:15 से 2:00 बजे तक
-शुभ चौघड़िया : दोपहर 12:15 से 2 बजे तक
-अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:50 से 12:40 बजे तक
-राहुकाल त्याज्य : अपराह्न 3 बजे से 4:30 बजे तक
मंगलवार को गणपति स्थापना होती है शुभ
मंगलवार का संबंध भगवान गणेश के अंगारक स्वरूप अर्थात सिंदूरी स्वरूप से हैं। कई प्रांतों में तो मंगलवार को गणेश जी का दिन ही माना जाता है। मान्यता अनुसार मंगल को गणेश पूजन से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। गणपति जी ने अंगारक मंगल देव की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें मंगलवार को गणपति पूजन का विशेष वरदान दिया था।
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बप्पा की कैसी मूर्ति लाना शुभ

कई बार लोग समझ नहीं पाते कि कैसी मूर्ति स्थापित होनी चाहिए। सबसे पहले ये समझ लेना जरूरी है कि मूर्ति मिट्टी की बनी हो। इसके विसर्जन के बाद प्रदूषण न फैलें। शास्त्रों में कहा गया है कि हर रंग की मूर्ति के पूजन का फल भी अलग होता है। पीले रंग और लाल रंग की मूर्ति की उपासना को शुभ माना गया है। पीले रंग की प्रतिमा की उपासना करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है।
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ऐसे करें पूजन
लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान ध्यान करके गणपति के व्रत का संकल्प लें। इसके बाद दोपहर को गणपति की मूर्ति या फिर उनका चित्र लाल कपड़े के ऊपर रखें। फिर गंगाजल छिड़कने के बाद भगवान गणेश का आह्वान करें। मंत्रोच्चारण करें। इसके बाद गणेश जी को जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी के मंत्र ऊं गं गणपतये नम: का जप करें और घी का दीपक जलाएं।
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