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कड़ाके की ठंड के बाद भी टिकी बॉर्डर पर डटे किसान

Fri, 18 Dec 2020 01:32 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 18 Dec 2020 01:32 AM IST
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Farmers still hanging on the border after the harsh winter
बहादुरगढ़ के टीकरी बार्डर पर सभा में जुटी किसानों की भीड़। - फोटो : Bahadurgarh
कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान वीरवार को 21वें दिन भी टीकरी बार्डर, बहादुरगढ़ में नेशनल हाईवे-9 और पुराने नेशनल हाईवे पर स्थित बस अड्डे तक लगभग 15 किलोमीटर तक धरने पर डटे रहे। वीरवार को भी एक किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि कई दिन पहले बीमारी वजह से अपने घर गए किसान की पीजीआई रोहतक में मौत हो गई। इस तरह अब तक टीकरी बार्डर धरने में शामिल आठ किसानों की बीमारी या हादसों में मौत हो चुकी है। उधर, वीरवार को कनाडा से टीकरी बार्डर आए एक एनआरआई ने आंदोलन में जान गंवा चुके किसानों के प्रत्येक आश्रित परिवार को 50 हजार रुपये की मदद देने की घोषणा की।
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पंजाब से वीरवार को भी काफी काफी संख्या में किसान श्रीगंगानगर-नई दिल्ली इंटर सिटी एक्सप्रेस और दूसरी गाड़ियों और ट्रैक्टर में भरकर टीकरी बार्डर पर पहुंचे। सैकड़ों की संख्या में किसान घरों को भी लौटे हैं। कनाडा से आए अनिवासी भारतीय (एनआरआई) बलविंदर सिंह ने उन परिवारों को 50-50 हजार रुपये मदद देने की घोषणा की जिनके परिजन की आंदोलन में जान चली गई है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से किसी और किसान की जान चली जाएगी तो उसके आश्रितों को भी वह यह मदद देंगे। ठंड बढ़ने से किसानों को परेशानी भले ही हो रही है, लेकिन वे डटे हुए हैं। सिंघु बॉर्डर पर गोली मारकर खुदकुशी करने वाले करनाल के बाबा राम सिंह को टीकरी बार्डर सभा में श्रद्धांजलि दी गई।
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सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि आत्महत्या से नहीं संघर्ष से मिलेगी जीत। सर्दी कितनी भी बढ़े, लेकिन अनुशासित संघर्ष से किसान जरूर जीतेगा। कुछ वक्ताओं ने कहा कि सरकार उनकी बात नहीं मानेगी तो सुप्रीम कोर्ट न्याय करेगा। ग्रामीण किसान मजदूर समिति राजस्थान के प्रवक्ता संतवीर सिंह टीकरी बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब हजारों किसानों के जत्थे दिल्ली-जयपुर हाईवे की तरफ बढ़ेंगे। पूर्व सैनिकों ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों को समर्थन दिया। इंडियन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े पूर्व सैनिक भी धरने में शामिल हुए।
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मुक्तसर साहिब कुलहिंद सभा पंजाब के चरनजीत सिंह, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रधान जितेंद्र उर्फ बबला, भाकियू सीसर हिसार के विकास, युवा भाकियू भिवानी के रवि आजाद, मानसा के सरजीत सरोहा और जींद के सूरजमल नैन ने भी वीरवार को टीकरी बॉर्डर पर किसानों की सभा में पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।
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