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धान की खेती न करें किसान, नहीं तो 10 साल में स्थिति हो जाएगी भयावह : डॉ. कादियान

Sun, 21 May 2023 01:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 May 2023 01:18 AM IST
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Farmers should not cultivate paddy, otherwise the situation will be dire in 10 years: Dr. Kadian
झज्जर। रोहतक व झज्जर जिले के साथ-साथ दादरी के कुछ भाग में भी जलभराव की वजह से लगभग 10 लाख एकड़ जमीन खराब हो चुकी है, इतना ही नहीं प्रतिवर्ष डेढ़ से दो प्रतिशत क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। अगर किसान धान की खेती इसी प्रकार करते रहे तो आने वाले 8 से 10 साल में स्थिति काफी भयावह हो जाएगी। यह बात सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा के प्रमुख अभियंता डॉ. सतबीर सिंह कादयान ने कही। डॉ कादयान शनिवार को जिले के गांव धौड़ में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा अमृत जलक्रांति अभियान के अंतर्गत धान, जलभराव, बाढ़, जलशोधन चक्र आदि विषयों पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को संबोधित कर रहे थे।
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डॉ. कादयान ने कहा कि विभाग पाइप ड्रेनेज तकनीक पर काम कर रहा है। अगर किसान धान की फसल लगाना बंद कर दें तो धौड़ सहित आसपास का क्षेत्र शीघ्र ही बाढ़मुक्त हो जाएगा। प्रमुख अभियंता ने कहा कि जल संरक्षण के लिए पिछले साल जिस प्रकार प्रदेशभर में किसानों ने लगभग डेढ़ लाख एकड़ धान के क्षेत्र में अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती की है, उसी प्रकार इस साल भी धान की जगह कम पानी वाली फसलों की खेती को तरजीह दें।
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जलभराव की समस्या के समाधान के लिए लगेंगे वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम
प्रमुख अभियंता ने कहा कि गत दिनों ग्रामीणों ने उनके कार्यालय पहुंचकर क्षेत्र में सेम की समस्या से निजात दिलाने की मांग रखी थी। ग्रामीणों की मांग के अनुरूप सरकार द्वारा वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जोकि काफी प्रभावी हैं। किसान सामूहिक रूप से धान की खेती न करने का संकल्प लें। धीरे-धीरे क्षेत्र से जलभराव की समस्या का समाधान हो जाएगा। इस बीच गांव खेड़ी के ग्रामीणों ने भी सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता के समक्ष जलभराव की समस्या रखी, जिस पर उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को विशेष कार्ययोजना तैयार करते हुए अविलंब समाधान करने के निर्देश दिए।
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35 ट्यूबवेल लगाकर किया जाएगा समाधान
कृषि अधिकारी डॉ. ईश्वर सिंह जाखड़ ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का संचय रखने की हमें बेहद आवश्यकता है। जलभराव के क्षेत्रों में करीब 35 ट्यूबवेल, जोकि सोलर ऊर्जा से संचालित होंगे। इनको लगाकर पानी को आठ नंबर ड्रेन में छोड़ा जाएगा। इससे करीब 800 से 900 एकड़ भूमि पर जलभराव की समस्या पर काबू पाया जा सकेगा। यह कार्य जल्द विभाग की ओर से किया जाएगा।

वैकल्पिक फसलों का पंजीकरण करवाने पर मिलेंगे सात जार रुपये
उन्होंने बताया कि धान को छोड़कर अन्य वैकल्पिक फसल जैसे अरहर, कपास, फल, फूल, मोठ, मूंगफली उगा सकते हैं। पंजीकरण करवाने के बाद विभाग की ओर से किसानों का सात हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जाएगा। इस अवसर पर तीनों जिलों के अधिकारी मौजूद रहे।
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