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आंदोलन के 9 माह पूरे : टीकरी बार्डर पर गरजे किसान
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सिंघू बार्डर पर हुए किसान अधिवेशन में टीकरी बार्डर से भी कई प्रतिनिधि हुए शामिल।
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। टीकरी बार्डर पर किसानों के आंदोलन को 9 माह पूरे हो गए हैं। सरकार व किसानों के बीच करीब सात माह से वार्ता का दौर भी नहीं हो पाया है। ऐसे में वीरवार को पंजाब, हरियाणा से काफी संख्या में किसान टीकरी बार्डर पहुंचे। बार्डर और नयागांव चौक दोनों सभाओं में किसान नेता सरकार के खिलाफ जमकर गरजे। तलवंडी साहिब से आए सिख प्रचारक सर्वजीत सिंह टुंडा ने धार्मिक कार्यक्रम पेश कर आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाया।
नौ महीने पूरे होने पर वीरवार से टीकरी बार्डर पर दो दिन का विशेष किसान सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें किसान, महिलाओं, युवा, कर्मचारी व मजदूर संगठनों ने भी अच्छी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। सरकार को चेताया कि वे अपने घरों को तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करती।
भाकियू राजेवाल गुट के नेता परगट सिंह ने कहा कि जिस तरह भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह और भगत सिंह के पिता किशन सिंह ने 1907 में अंग्रेजों के खेती विरोधी कानूनों के खिलाफ आंदोलन किया था और जीत प्राप्त की थी, उसी तरह संयुक्त किसान मोर्चा के भी 9 महीने पूरे हो गए हैं और इस अवधि में यह जन आंदोलन बन गया है। अनिवासी भारतीय डॉ. सवाई मानसिंह, स्वामी श्रद्धानंद, स्वामी आर्य वेद, रोहतक से स्वामी अग्निवेश, सर्व कर्मचारी संघ ब्लॉक बहादुरगढ़ से विजेंद्र सैनी ने भी सभा में अपने विचार व्यक्त किए।
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उच्चतम न्यायालय के वकील अमरजीत सिंह भुल्लर कहा कि दिल्ली पुलिस और कोर्ट ने 26 जनवरी वाले मामले में किसानों को दोबारा नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। किसी भी किसान को नोटिस मिलता है तो वो संयुक्त मोर्चा टीकरी बार्डर कमेटी से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी वाले मामले में किसी आंदोलनकारी का कोई ट्रैक्टर या कोई दूसरा वाहन अब भी पुलिस के कब्जे में है तो वे भी टीकरी बॉर्डर कमेटी से संपर्क करें, पुलिस से वाहन दिलवाया जाएगा।
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नौ महीने पूरे होने पर वीरवार से टीकरी बार्डर पर दो दिन का विशेष किसान सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें किसान, महिलाओं, युवा, कर्मचारी व मजदूर संगठनों ने भी अच्छी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। सरकार को चेताया कि वे अपने घरों को तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करती।
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भाकियू राजेवाल गुट के नेता परगट सिंह ने कहा कि जिस तरह भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह और भगत सिंह के पिता किशन सिंह ने 1907 में अंग्रेजों के खेती विरोधी कानूनों के खिलाफ आंदोलन किया था और जीत प्राप्त की थी, उसी तरह संयुक्त किसान मोर्चा के भी 9 महीने पूरे हो गए हैं और इस अवधि में यह जन आंदोलन बन गया है। अनिवासी भारतीय डॉ. सवाई मानसिंह, स्वामी श्रद्धानंद, स्वामी आर्य वेद, रोहतक से स्वामी अग्निवेश, सर्व कर्मचारी संघ ब्लॉक बहादुरगढ़ से विजेंद्र सैनी ने भी सभा में अपने विचार व्यक्त किए।
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उच्चतम न्यायालय के वकील अमरजीत सिंह भुल्लर कहा कि दिल्ली पुलिस और कोर्ट ने 26 जनवरी वाले मामले में किसानों को दोबारा नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। किसी भी किसान को नोटिस मिलता है तो वो संयुक्त मोर्चा टीकरी बार्डर कमेटी से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी वाले मामले में किसी आंदोलनकारी का कोई ट्रैक्टर या कोई दूसरा वाहन अब भी पुलिस के कब्जे में है तो वे भी टीकरी बॉर्डर कमेटी से संपर्क करें, पुलिस से वाहन दिलवाया जाएगा।