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लापरवाही: आंदोलन को धार देने पंजाब से आएंगे हजारों किसान, किसी को नहीं कोरोना का खौफ

Tue, 20 Apr 2021 11:37 PM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बहादुरगढ़ (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 20 Apr 2021 11:37 PM IST
सार

किसानों ने बताया कि बुधवार को पंजाब से हजारों किसान टीकरी बॉर्डर आएंगे। ये किसान भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के प्रयास से एकजुट हुए हैं। किसानों का ये काफिला संगरूर जिले के खनोरी से चलकर जींद होते हुए टीकरी बॉर्डर आएगा।
 

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Farmers from Punjab will Reach Tikri Border to support Kisan Andolan 
किसान आंदोलन में जुटे किसान। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी है। मंगलवार को किसानों ने धन्ना सेठ जाट का जन्मदिवस मनाया और समाज के सभी वर्गों से किसान आंदोलन में हर तरह की मदद देने की अपील की। किसानों ने बताया कि बुधवार को पंजाब से हजारों किसान टीकरी बॉर्डर आएंगे। ये किसान भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के प्रयास से एकजुट हुए हैं। किसानों का ये काफिला संगरूर जिले के खनोरी से चलकर जींद होते हुए टीकरी बॉर्डर आएगा।
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मंगलवार को टीकरी बॉर्डर सभा में किसानों की संख्या अच्छी रही। इनमें महिलाएं भी कम नहीं थी। सभा में तमाम वक्ताओं ने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान किया। सभा में सेठ धन्ना जाट को याद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि धन्ना भगवान के भक्त थे। उन्होंने भगवान को पाने के लिए कड़ी तपस्या की। दिल खोलकर दान किया। यहां तक कि खुद भूखे रहे जाते, लेकिन त्याग करना नहीं छोड़ा।
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पंजाब से आए किसान नेता सुखजिंदर सिंह ने कहा कि हम किसान ऐसे धन्ना सेठ के दिखाए रास्ते पर चलते हैं। धन्ना की तरह जरूरतमंद की मदद से पीछे हटना किसानों ने सीखा ही नहीं। जींद जिले से आए किसान राम सिंह ने सेठ धन्ना जाट की कहानी सुनाई। सभा में मौजूद किसानों ने पूरा किस्सा रुचि के साथ सुना।
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खेती से जुड़े हर वर्ग के हित

किसान नेता जोगेंद्र सिंह ने समाज के सभी वर्गों से किसान आंदोलन को हर तरह की मदद देने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेती से सभी वर्गों के हित जुड़े हुए हैं। खेती ही नहीं रहेगी तो हरेक कामधंधा खत्म हो जाएगा। खेती देश की अर्थव्यवस्था की मूल है। खेती के बिना व्यापारी का व्यापार नहीं चल सकता। इसलिए सभी वर्ग मिलकर खेती किसानी को बचा लेंगे तो दूसरे काम धंधों की भी रक्षा होगी। उन्होंने कहा कि जब हम खेतों में काम करते वक्त ही गर्मी की परवाह नहीं करते तो अब यहां दिल्ली के बॉर्डर पर मौसम की क्या फिक्र करनी है। मौसम को तो किसान अपने हिसाब से चलाना जानते हैं।

बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि किसान कटाई के लिए अपने घर गए किसान अब दिल्ली की सीमाओं पर लौटकर नहीं आएंगे। असलियत ये है कि 2 मई से पहले ही नहीं, जल्दी ही दिल्ली की सीमाओं पर किसानों की संख्या बढ़ जाएगी। बुधवार को ही पंजाब के संगरूर व अन्य सीमावर्ती जिलों से हजारों किसान टीकरी बॉर्डर के लिए चलेंगे।

भारतीय किसान यूनियन उग्राहां के झंडे तले एकजुट ये हजारों किसान पंजाब-हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर इकट्ठे होंगे। यहां से किसानों का काफिला जींद व रोहतक होते हुए टीकरी बॉर्डर पहुंचेगा। किसान नेता परमजीत सिंह ने कहा कि किसानों की एकता जल्द ही सरकार की आंखें खोल देगी। सरकार कोरोना संक्रमण फैलने जैसे जितने मर्जी बहाने बना ले। लेकिन किसान तीनों कानूनों के वापस होने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून बनने से पहले दिल्ली के यहां से नहीं जाएंगे।
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