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शर्मनाक : सरकारी अस्पताल के शौचालय में हुआ महिला को प्रसव

Sun, 30 Jul 2023 12:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 30 Jul 2023 12:54 AM IST
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Embarrassing: The incident happened to a woman in the toilet of a government hospital.
बहादुरगढ़। सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं देने के सरकारी दावे उस समय धरे रह गए जब एक गर्भवती महिला सरकारी अस्पताल के शौचालय में ही बच्चे को जन्म देने को मजबूर हो गई। परिजन चीखे-चिल्लाए, तब जाकर कहीं स्वास्थ्य कर्मियों ने जच्चा-बच्चा को संभाला। महिला ने बेटे को जन्म दिया। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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शनिवार की छोटूराम नगर की नेहा को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने एंबुलेंस को कॉल की। एंबुलेंस के जरिये गर्भवती को बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में लाया गया। प्रसव पीड़ा अधिक थी इसलिए एंबुलेंस से उतरते ही महिला शौचालय की तरफ भागी। परिवार की महिलाएं भी उसके साथ थी। इस दौरान महिला की शौचालय में ही डिलीवरी हो गई। परिजन चीखे-चिल्लाएं तो स्वास्थ्य कर्मियों में भी खलबली मच गई। नर्स व अन्य स्वास्थ्यकर्मी तुरंत शौचालय में गए और जच्चा-बच्चा को संभाला। आनन-फानन में दोनों को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। गनीमत रही कि किसी तरह की हानि नहीं हुई और दोनों जच्चा-बच्चा फिलहाल सुरक्षित हैं। नेहा ने बेटे को जन्म दिया है।
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नेहा के साथ आई महिला सोनी ने बताया कि एंबुलेंस से उतरे तो नेहा को काफी तेज दर्द और लघुशंका हुई। उसे संभालने के लिए एंबुलेंस में कोई स्वास्थ्य कर्मी या स्टाफ नहीं था। अस्पताल में भी एंबुलेंस से उतारे समय कोई कर्मी वहां प्रथम तल पर मिला। कर्मचारी न मिलने की वजह से दर्द से कराह नहीनेहा शौचालय में चली गई और डिलीवरी हो गई। जब बच्चे ने जन्म लिया तो वे चिल्लाए। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मी आए। वहीं एक एंबुलेंस ऑपरेटर ने बताया कि ईएमटी की बहुत कमी है। कॉल आने पर एंबुुलेंस में महिला स्वास्थ्य कर्मी की तैनाती होनी चाहिए। यदि एंबुलेंस में कोई महिला स्वास्थ्यकर्मी होती तो शायद सही जगह पर सही तरीके से डिलीवरी हो जाती। फिलहाल दोनों सुरक्षित हैं लेकिन इस घटना से व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान उठ गया है। हालांकि परिजनों द्वारा किसी तरह की शिकायत नहीं की गई है। इस बारे में जब बहादुरगढ़ अस्पताल के पीएमओ से बात करनी चाही तो उनके कार्यालय का गेट बंद था। फोन पर भी संपर्क नहीं हो सका।
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वर्जन
जच्चा को एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया था। महिला को जैसे ही उतारा तो दर्द ज्यादा होने से वह शौचालय में चली गई। जहां पर डिलिवरी हो गई जैसे ही स्टाफ को पता चला तो उन्होंने जच्चा बच्चा को संभाला। वे दोनों ठीक हैं।
- डॉ मंजू कादयान, पीएमओ, बहादुरगढ़।
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