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पूर्वांचलियों के घरों में दीपावली सा उत्साह
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छठ पूजा महोत्सव पर बहादुरगढ़ में भी पूर्वांचल की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। सोमवार से नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू हो गया। पूर्वांचलियों के घरों में दीपावली जैसा उत्साह है। 11 नवंबर को उगते सूर्य को अघ्र्य देने के साथ छठ महापर्व के अनुष्ठान का परायण होगा।
नगर में यूपी और बिहार के पूर्वांचल क्षेत्र के 50 हजार से अधिक लोग अलग-अलग स्थानों में रहते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में या तो काम कर रहे हैं या फिर यहां पर स्थायी रूप से रहने लगे हैं। छोटूराम नगर, बिहारी कालोनी निजामपुर रोड, बिहारी कालोनी लाइनपार, दुर्गा कालोनी और महावीर पार्क में पूर्वांचल के लोग बहुतायत में रहते हैं। पूर्वांचल परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा ने कहा कि छठ पर्व को मनाने के लिए पूर्वांचल और बिहार के लोग दीपावली के बाद से ही बेचैन रहते हैं। इन कालोनियों में रह रहे बिहार और पूर्वांचल मूल के परिवारों के बच्चों व बड़ों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह दिखाई पड़ रहा है। सोमवार से चार दिवसीय अनुष्ठान का प्रारंभ हो गया। पहले दिन नहाय खाय का अनुष्ठान हुआ।
लाइन पार निवासी राम आसरे ने बताया कि पहले दिन घर को पूरी तरह स्वच्छ किया जाता है और फिर नहाने के बाद शुद्ध शाकाहारी तरीके से भोजन व पकवान बनाया जाता है। जिसमें लौकी की सब्जी, दाल चावल जरूर बनाया जाता है। दूसरे दिन व्रती महिलाएं शाम को खीर रोटी प्रसाद के रूप में लेती हैं। जिसे खरना कहा जाता है। तीसरे दिन यानि कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन जो अस्त होते हुए सूर्य को अध्र्य पूजा पाठ के साथ ही चौथे दिन उगते सूरज को अध्र्य देकर पूजा की जाती है।
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मंगलवार 9 नवंबर की शाम को खरना का अनुष्ठान है। 10 नवंबर को शाम 5.20 बजे सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा। इस दिन पूजा स्थल पर मेले जैसा माहौल दिखाई पड़ेगा। अपनी परंपरा अनुसार छठ पर्व पर पानी में खड़े होकर अघ्र्य दिया जाएगा। 11 नवंबर को सुबह 6.25 बजे सूर्यदेव को अघ्र्य देने के साथ ही इस व्रत का परायण होगा। जहां पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति की झलक दिखाई पड़ेगी।
-फोटो 5 : बहादुरगढ़ में रेलवे रोड पर छठ पूजा का सामान से सजी दुकान।
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नगर में यूपी और बिहार के पूर्वांचल क्षेत्र के 50 हजार से अधिक लोग अलग-अलग स्थानों में रहते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में या तो काम कर रहे हैं या फिर यहां पर स्थायी रूप से रहने लगे हैं। छोटूराम नगर, बिहारी कालोनी निजामपुर रोड, बिहारी कालोनी लाइनपार, दुर्गा कालोनी और महावीर पार्क में पूर्वांचल के लोग बहुतायत में रहते हैं। पूर्वांचल परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा ने कहा कि छठ पर्व को मनाने के लिए पूर्वांचल और बिहार के लोग दीपावली के बाद से ही बेचैन रहते हैं। इन कालोनियों में रह रहे बिहार और पूर्वांचल मूल के परिवारों के बच्चों व बड़ों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह दिखाई पड़ रहा है। सोमवार से चार दिवसीय अनुष्ठान का प्रारंभ हो गया। पहले दिन नहाय खाय का अनुष्ठान हुआ।
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लाइन पार निवासी राम आसरे ने बताया कि पहले दिन घर को पूरी तरह स्वच्छ किया जाता है और फिर नहाने के बाद शुद्ध शाकाहारी तरीके से भोजन व पकवान बनाया जाता है। जिसमें लौकी की सब्जी, दाल चावल जरूर बनाया जाता है। दूसरे दिन व्रती महिलाएं शाम को खीर रोटी प्रसाद के रूप में लेती हैं। जिसे खरना कहा जाता है। तीसरे दिन यानि कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन जो अस्त होते हुए सूर्य को अध्र्य पूजा पाठ के साथ ही चौथे दिन उगते सूरज को अध्र्य देकर पूजा की जाती है।
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मंगलवार 9 नवंबर की शाम को खरना का अनुष्ठान है। 10 नवंबर को शाम 5.20 बजे सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा। इस दिन पूजा स्थल पर मेले जैसा माहौल दिखाई पड़ेगा। अपनी परंपरा अनुसार छठ पर्व पर पानी में खड़े होकर अघ्र्य दिया जाएगा। 11 नवंबर को सुबह 6.25 बजे सूर्यदेव को अघ्र्य देने के साथ ही इस व्रत का परायण होगा। जहां पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति की झलक दिखाई पड़ेगी।
-फोटो 5 : बहादुरगढ़ में रेलवे रोड पर छठ पूजा का सामान से सजी दुकान।