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पेलपा में पुलिस सुरक्षा के बीच बांटा गया डीएपी
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बादली। क्षेत्र में डीएपी की कमी से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक रबी के लिए पिछले साल के मुकाबले एक चौथाई डीएपी ही पैक्स में पहुंचा है। किसान डीएपी के लिए इधर-उधर घूम रहे हैं लेकिन कहीं नहीं मिल रहा। अधिकतर किसानों को बिना डीएपी के ही सरसों की बिजाई करनी पड़ी और अब गेहूं की बिजाई को लेकर चिंतित हैं। पैक्स बादली के 24 गांवों में पिछले वर्ष अक्तूबर नवंबर माह में तीन हजार कट्टे डीएपी पहुंचा था लेकिन इस बार मात्र 880 कट्टे डीएपी ही पहुंचा है। जबकि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष सरसों का रकबा ज्यादा है और किसान गेहूं की अगेती फसल के प्रति आकर्षित हैं। इस तरह समय पर डीएपी नहीं मिलने से किसान बहुत परेशान हैं। बिजाई का रकबा बढ़ने के बाद डीएपी की मात्रा में कमी होना हैरान कर देने वाली है।
किसान रबी फसल की बिजाई के लिए जुट गए हैं। नवंबर माह का मध्य चल रहा है और किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रहा। गेहूं बिजाई का समय जोर पकड़ चुका है और डीएपी खाद न मिलने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी है। अभी तक सहकारी समितियों में डीएपी के मात्र 880 बैग पहुंचे हैं और निजी दुकानों में भी डीएपी नहीं मिल रहा।
बादली, पेलपा, गुभाना, माजरी, लुकसर, खेड़ी जट्ट और जहांगीरपुर के किसान प्रवीन, दीपक, सचिन, दिलबाग, समुन्द्र और पवन ने बताया कि सोसाइटी में डीएपी न होने से वे हताश हो गए हैं। किसान धर्मबीर, चेता, बदलूराम, बालू, हरकिशन, रामकुमार और राजेन्द्र का कहना है कि निजी दुकानदारों के पास भी स्टाक ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि अपनी खेती को बचा सके। सोसाइटी में खाद पता करने के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। यूरिया की भी किल्लत है। पैक्स प्रबंधक वजीर सिंह का कहना है कि किसानों की जरूरत के अनुसार डीएपी मंगवाया जा रहा है। रेवाड़ी से रैक की मंजूरी मिलते ही डीएपी पहुंच जाएगा। किसानों को भी स्टॉक करने की बजाय जरूरत के अनुसार ही डीएपी लेना चाहिए।
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विपक्ष कर रहा निंदा
बादली के विधायक कुलदीप वत्स का कहना है कि अधिक बारिश और जलभराव के चलते खरीफ की खेती नष्ट हो गई है जबकि सरकार क्षेत्र के साथ डीएपी के मामले में पक्षपात कर रही है। किसानों पर सरकार ने दोहरी मार डाल दी है। किसानों पर प्राकृतिक आपदा के बाद अब सरकार की गैर जिम्मेदारी से डीएपी की किल्लत बन गई है।
पुलिस सुरक्षा में बांटा
वीरवार की सुबह पेलपा केंद्र पर डीएपी खाद पहुंचा तो किसानों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। आधार कार्ड का प्रमाण लेकर एक-एक किसान को दो-दो कट्टे दिए गए। किसानों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की सुरक्षा लेनी पड़ी। पुलिस कर्मचारियों ने किसानों की लाइन लगवाकर कट्टे वितरित करवाए।
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किसान रबी फसल की बिजाई के लिए जुट गए हैं। नवंबर माह का मध्य चल रहा है और किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रहा। गेहूं बिजाई का समय जोर पकड़ चुका है और डीएपी खाद न मिलने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी है। अभी तक सहकारी समितियों में डीएपी के मात्र 880 बैग पहुंचे हैं और निजी दुकानों में भी डीएपी नहीं मिल रहा।
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बादली, पेलपा, गुभाना, माजरी, लुकसर, खेड़ी जट्ट और जहांगीरपुर के किसान प्रवीन, दीपक, सचिन, दिलबाग, समुन्द्र और पवन ने बताया कि सोसाइटी में डीएपी न होने से वे हताश हो गए हैं। किसान धर्मबीर, चेता, बदलूराम, बालू, हरकिशन, रामकुमार और राजेन्द्र का कहना है कि निजी दुकानदारों के पास भी स्टाक ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि अपनी खेती को बचा सके। सोसाइटी में खाद पता करने के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। यूरिया की भी किल्लत है। पैक्स प्रबंधक वजीर सिंह का कहना है कि किसानों की जरूरत के अनुसार डीएपी मंगवाया जा रहा है। रेवाड़ी से रैक की मंजूरी मिलते ही डीएपी पहुंच जाएगा। किसानों को भी स्टॉक करने की बजाय जरूरत के अनुसार ही डीएपी लेना चाहिए।
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विपक्ष कर रहा निंदा
बादली के विधायक कुलदीप वत्स का कहना है कि अधिक बारिश और जलभराव के चलते खरीफ की खेती नष्ट हो गई है जबकि सरकार क्षेत्र के साथ डीएपी के मामले में पक्षपात कर रही है। किसानों पर सरकार ने दोहरी मार डाल दी है। किसानों पर प्राकृतिक आपदा के बाद अब सरकार की गैर जिम्मेदारी से डीएपी की किल्लत बन गई है।
पुलिस सुरक्षा में बांटा
वीरवार की सुबह पेलपा केंद्र पर डीएपी खाद पहुंचा तो किसानों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। आधार कार्ड का प्रमाण लेकर एक-एक किसान को दो-दो कट्टे दिए गए। किसानों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की सुरक्षा लेनी पड़ी। पुलिस कर्मचारियों ने किसानों की लाइन लगवाकर कट्टे वितरित करवाए।