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लॉ की छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी प्राध्यापकों को समन जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Mon, 06 Jun 2016 01:21 AM IST
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चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के लॉ विभाग की छात्राओें के साथ छेड़छाड़ मामले में अदालत ने आरोपी प्राध्यापकाें को समन जारी किया है। आरोपियों में विश्वविद्यालय के लॉ विभाग के प्राध्यापक डॉ. राजेश मलिक, कंप्यूटर विभाग के प्रो. डॉक्टर दिलबाग सिंह व नॉन टीचिंग विभाग के कर्मचारी महेंद्र बेनीवाल शामिल है। विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा रोष प्रदर्शन करने के बाद तीनों प्राध्यापकों पर शहर थाना पुलिस ने चार मार्च 2015 को केस दर्ज किया था। बाद में पुलिस ने एफआईआर रद्द कर दी। पुलिस पर मनमानी का आरोप लगाते हुए एक पीड़ित छात्रा ने अदालत का द्वार खटखटाया। छात्रा ने आरोपी प्राध्यापकोें पर छेड़छाड़ करने, धमकी देने व अपशब्द बोलने के तहत अदालत में इस्तगासा दायर किया। न्यायाधीश नवजीत की अदालत ने सुनवाई करते हुए आरोपी प्राध्यापकों को समन जारी करते हुए आठ अगस्त 2016 को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला
लॉ विभाग की छात्राएं अपने हॉस्टल की तरफ जा रही थी। छात्राओं का आरोप है कि 11 फरवरी 2015 को हॉस्टल जाते समय शाम करीब छह बजे प्रो. राजेश मलिक, प्रो. दिलबाग व महेंद्र बैनीवाल ने उनके साथ छेड़छाड़ करने लगे। विरोध करने पर उन्होंने अश्लील टिप्पणी करनी शुरू कर दी और धमकी दी की किसी को इस बारे में बताया तो अच्छा नहीं होगा। अगले दिन विश्वविद्यालय की छात्राओं ने आरोपी अध्यापकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और रोष प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके बाद शहर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। लेकिन बाद में पुलिस ने मनमानी करते हुए एफआईआर रद्द कर दिया। जिसके बाद छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। सीडीएलयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय में पुलिस बुला ली। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को हिरासत में ले लिया। छात्राओं को हुडा पुलिस चौकी में ले जाया गया और शाम को उन्हें छोड़ दिया।
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क्या है मामला
लॉ विभाग की छात्राएं अपने हॉस्टल की तरफ जा रही थी। छात्राओं का आरोप है कि 11 फरवरी 2015 को हॉस्टल जाते समय शाम करीब छह बजे प्रो. राजेश मलिक, प्रो. दिलबाग व महेंद्र बैनीवाल ने उनके साथ छेड़छाड़ करने लगे। विरोध करने पर उन्होंने अश्लील टिप्पणी करनी शुरू कर दी और धमकी दी की किसी को इस बारे में बताया तो अच्छा नहीं होगा। अगले दिन विश्वविद्यालय की छात्राओं ने आरोपी अध्यापकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और रोष प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके बाद शहर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। लेकिन बाद में पुलिस ने मनमानी करते हुए एफआईआर रद्द कर दिया। जिसके बाद छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। सीडीएलयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय में पुलिस बुला ली। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को हिरासत में ले लिया। छात्राओं को हुडा पुलिस चौकी में ले जाया गया और शाम को उन्हें छोड़ दिया।
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