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निक्की हत्याकांड: हरियाणा के झज्जर की रहने वाली थी निक्की, गांव में मातम, पढ़ाई में थी होशियार

Wed, 15 Feb 2023 02:32 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 15 Feb 2023 02:32 PM IST
सार

निक्की यादव का परिवार दस साल पहले नजफगढ़ चला गया था। तीनों भाई-बहनों में सबसे बड़ी निक्की थी। निक्की और साहिल एक कॉलेज में पढ़ाई करते थे।

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Nikki yadav murder case: Nikki was a resident of Jhajjar in Haryana
घर में मातम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

खेड़ी खुम्मार गांव निवासी निक्की के शव का गांव में दिनभर इंतजार किया जाता रहा। गांव की गलियां दिनभर सूनी रहीं। बुधवार शाम को 5:48 बजे एंबुलेंस से शव लेकर पुलिस गांव पहुंची तो काफी संख्या में लोग वहां पर पहुंच गए। मात्र सात मिनट में शव को घर पर रखा गया और मां ने बेटी के अंतिम दर्शन किए। इसके बाद शवयात्रा श्मशान पहुंची। प्रशासन की ओर से पहले से ही अंतिम संस्कार की सभी तैयारी पूरी कर ली गई थी। मात्र 22 मिनट में गमगीन माहौल के बीच शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। छोटे भाई ने बहन को मुखाग्नि दी।

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निक्की यादव के परिवार के लोग ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लोगों में वारदात को लेकर गुस्सा था। परिवार के लोगों का मीडिया के प्रति भी आक्रोश था। परिवार के लोगों में कहा कि लिव इन रिलेशन का मामला बनाकर दिखाया जा रहा है। फ्रेंडशिप का मामला हो सकता है। बेटी की हत्या बहला-फुसला कर की गई है। मृतिका निक्की यादव तीनों भाई बहनों में सबसे बड़ी था। उसके पिता सुनील करीब दस साल पहले की अपने  परिवार को दिल्ली नजफगढ़ ले गया था।
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सुनील के माता-पिता को खाना बनाने व घर के अन्य कामकाज करने में समस्या आने लगी तो वे वापस अपने गांव खेड़ी में रहने लगा। परिजनों ने बताया कि निक्की तीनों भाई बहनों में सबसे बड़ी और उससे छोटी निधी व सबसे छोटा भाई शुभम है। शुभम का जन्म दिल्ली में ही हुआ था। वहीं सुनील ने कामकाज व बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए वहीं पर रहने का मन बनाया था।

मौजूदा समय में निक्की व निधी दोनों ही दिल्ली रहती थी। उनके पिता सप्ताह में एक या दो दिन के लिए अपने गाड़ियों के गराज को संभलाने के लिए जात थे। वहीं शुभम क्षेत्र के एक निजी स्कूल में ही पांचवीं कक्षा में पढ़ाई करता है।

मिली जानकारी के अनुसार आरोपी व मृतका निक्की दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। आरोपी साहिल कॉलेज से फार्मेसी का कोर्स कर रहा था वहीं निक्की अंग्रेजी ऑनरस की पढ़ाई कर रही थी। दोनों ने लॉकडाउन के बाद साथ रहने का फैसला लिया था।

पढ़ाई में होशियार थी निक्की
निक्की पढ़ाई में होशियार थी। निक्की ने छठी कक्षा तक गांव में ही पढ़ाई की थी। उसके बाद पढ़ाई के लिए उनके पिता उन्हें दिल्ली ले गए। निक्की के दादा रामकिशन ने बताया कि 23 दिसंबर 2022 को उसकी दोनों पोतियां घर आई थी और दोनों 4 दिन गांव में ही रह कर गई थी। उन्होंने बताया कि जाते समय दोनों को जेब खर्च के तीन-तीन हजार रूपये दिए थे। वहीं जब वह वापस गांव में आती तो सबसे पहले घर आते ही मुझसे मिलती थी। वहीं 12 फरवरी को निक्की की छोटी बहन निधी घर पर कॉलेज के किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाने के लिए आई थी। एक दिन घर पर रहने के बाद 13 फरवरी को वापस पढ़ाई करने के लिए कॉलेज चली गई। हर बार की तरह इस बार भी उनके दादा रामकिशन ने दोनों के जेब खर्च के लिए पैसे दिए थे। जब निधी अपने कॉलेज पहुचीं और जेब खर्च देने के लिए निक्की के पास फोन किया। बार-बार फोन मिलाने फोन नहीं मिलने पर इस बारे परिजनों को सूचना दी। 



नीति के दादा और उसकी बहन निधी।

चार से पांच दिन में परिवार वालों से बात करने के लिए फोन करती थी निक्की 
निक्की हर चार से पांच दिन में परिवार वालों से बात करने के लिए फोन करती थी। लेकिन इस बार निक्की ने कई दिनों से अपने दादा के पास फोन नहीं किया था। दोनों बहने अलग-अलग स्थानों पर रहती थी।

गांव में घटना चर्चा का विषय 
जैसे ही सूचना ग्रामीणों को लगी यह घटना आग की तरह गांव में फैल गई। ग्रामीण हर जगह पर इसी विषय में चर्चा करते नजर आ रहे थे। लेकिन सुनील के परिवार के बार में जानकारी सांझा नहीं कर रहे थे। सुनील का दिल्ली से गांव में आने का मुख्य कारण यह भी था कि उसके छोटे भाई ने फौज में रहते हुए लड़ाई के दौरान अपने अंग गवा दिए थे। जिसके कारण वह अपने माता-पिता को संभालने में असमर्थ था। सुनील के पिता रामकिशन को ऊंचा सुनाई देने लगा था और पैरों से चलने में भी समस्या हो रही थी उसने अपने बेटों को अपने देखभाल के लिए गांव बुला लिया था।

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