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रीयल एस्टेट कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Sun, 03 Apr 2016 01:51 AM IST
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एक नामी रीयल एस्टेट कंपनी पर फ्लैट आवंटन के नाम पर धोखाधड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। बहादुरगढ़ के माडल टाउन निवासी प्रमोद गुप्ता ने कंपनी पर लाखों रुपये देने के बावजूद फ्लैट नहीं देने का आरोप लगाया है। आरोप है कि कंपनी उनके फ्लैट के लिए निर्धारित जगह पर दुकानें बनाकर बेच चुकी है।
बंसल पोल्स प्रा. लि. के डायरेक्टर प्रमोद गुप्ता ने शनिवार को गोरैया पयर्टन केंद्र में बताया कि वर्ष 2007 में उन्होंने संबंधित रीयल एस्टेट कंपनी की कॉलोनी में फ्लैट बुक करवाया था। कंपनी की तरफ से उन्हें एक प्रस्तावित टॉवर में 3 बेडरूम का 203 नंबर फ्लैट देना तय हुआ।
उन्होंने 17 अक्तूबर 2007 को इसकी पहली किश्त के तौर पर 2,93,125 रुपये जमा करवाए। 23 अप्रैल 2008 को दूसरी किश्त के 3,36,875 रुपये जमा करवा दिए। तब भी फ्लैट न बनता देख उन्होंने अधिकारियों से बार-बार संपर्क किया तो बताया गया कि किन्हीं अड़चनों के कारण उक्त प्रस्तावित टावर बनाने के लिए मंजूरी नहीं मिली।
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इसके बाद कंपनी ने उन्हें ग्राउंड फ्लोर पर 106 नंबर प्लाट अलाट कर दिया। 18 महीने में इसे बनाकर देने के वादे के साथ तीसरी किश्त मांगी गई। जिस पर उन्होंने 21 अप्रैल 2010 को 2,90,623 रुपये जमा करवा दिए। बाद में उसे 26 अप्रैल 2012 को प्लाट के नक्शे के साथ बायर एग्रीमेंट के कागजात मिले जो उसने पूरे कर जमा करवा दिए। प्रमोद का कहना है कि इसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और 2014 में उसे पता चला कि जहां उसका फ्लैट दर्शाया गया था वहां दुकानें बनाकर बेच दी गई हैं। इस पर उन्होंने 1 दिसंबर 2014 को एसपी झज्जर को शिकायत दी।
एग्रीमेंट से पहले बेची दुकानें
प्रमोद की शिकायत पर 17 दिसंबर 2014 को पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। सुबूत इकट्ठे कर आईओ ने उन्हें बताया कि 28 मई 2012 को उनका बायर एग्रीमेंट साइन होने से पहले ही 9 मई 2012 को फ्लैट के स्थान पर बनाई दुकानें बेचने की बात सामने आई है।
शुरू हुई आंख मिचौली
शिकायतकर्ता प्रमोद का कहना है कि इसके बाद अचानक हालात बदले और उनकी शिकायत रद्द कराने का खेल शुरू हो गया। उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जाने लगी। वह आईजी तक से मिले मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। प्रमोद का कहना है कि हरेक दर से निराशा हाथ लगने के बाद 8 अप्रैल 2015 को उन्होंने पीएम शिकायत सैल में, 9 अप्रैल को सीएम विंडो में और 14 अप्रैल को लोकायुक्त को शिकायत भेजी।
क्या कहते हैं पुलिस अफसर
संबंधित रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ प्रमोद गुप्ता द्वारा दर्ज कराए गए केस की जांच आईजी रोहतक ने पानीपत से कराई थी। उस रिपोर्ट के आधार पर अदालत से एफआइआर रद्द करने की अनुमति मांगी गई थी। लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
-अशोक कुमार, एसएचओ, शहर थाना, बहादुरगढ़
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बंसल पोल्स प्रा. लि. के डायरेक्टर प्रमोद गुप्ता ने शनिवार को गोरैया पयर्टन केंद्र में बताया कि वर्ष 2007 में उन्होंने संबंधित रीयल एस्टेट कंपनी की कॉलोनी में फ्लैट बुक करवाया था। कंपनी की तरफ से उन्हें एक प्रस्तावित टॉवर में 3 बेडरूम का 203 नंबर फ्लैट देना तय हुआ।
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उन्होंने 17 अक्तूबर 2007 को इसकी पहली किश्त के तौर पर 2,93,125 रुपये जमा करवाए। 23 अप्रैल 2008 को दूसरी किश्त के 3,36,875 रुपये जमा करवा दिए। तब भी फ्लैट न बनता देख उन्होंने अधिकारियों से बार-बार संपर्क किया तो बताया गया कि किन्हीं अड़चनों के कारण उक्त प्रस्तावित टावर बनाने के लिए मंजूरी नहीं मिली।
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इसके बाद कंपनी ने उन्हें ग्राउंड फ्लोर पर 106 नंबर प्लाट अलाट कर दिया। 18 महीने में इसे बनाकर देने के वादे के साथ तीसरी किश्त मांगी गई। जिस पर उन्होंने 21 अप्रैल 2010 को 2,90,623 रुपये जमा करवा दिए। बाद में उसे 26 अप्रैल 2012 को प्लाट के नक्शे के साथ बायर एग्रीमेंट के कागजात मिले जो उसने पूरे कर जमा करवा दिए। प्रमोद का कहना है कि इसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और 2014 में उसे पता चला कि जहां उसका फ्लैट दर्शाया गया था वहां दुकानें बनाकर बेच दी गई हैं। इस पर उन्होंने 1 दिसंबर 2014 को एसपी झज्जर को शिकायत दी।
एग्रीमेंट से पहले बेची दुकानें
प्रमोद की शिकायत पर 17 दिसंबर 2014 को पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। सुबूत इकट्ठे कर आईओ ने उन्हें बताया कि 28 मई 2012 को उनका बायर एग्रीमेंट साइन होने से पहले ही 9 मई 2012 को फ्लैट के स्थान पर बनाई दुकानें बेचने की बात सामने आई है।
शुरू हुई आंख मिचौली
शिकायतकर्ता प्रमोद का कहना है कि इसके बाद अचानक हालात बदले और उनकी शिकायत रद्द कराने का खेल शुरू हो गया। उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जाने लगी। वह आईजी तक से मिले मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। प्रमोद का कहना है कि हरेक दर से निराशा हाथ लगने के बाद 8 अप्रैल 2015 को उन्होंने पीएम शिकायत सैल में, 9 अप्रैल को सीएम विंडो में और 14 अप्रैल को लोकायुक्त को शिकायत भेजी।
क्या कहते हैं पुलिस अफसर
संबंधित रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ प्रमोद गुप्ता द्वारा दर्ज कराए गए केस की जांच आईजी रोहतक ने पानीपत से कराई थी। उस रिपोर्ट के आधार पर अदालत से एफआइआर रद्द करने की अनुमति मांगी गई थी। लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
-अशोक कुमार, एसएचओ, शहर थाना, बहादुरगढ़